फिर भी ज़िंदगी हसीन हैं...

सोचे और करें

सोचे और करें
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Aug 20, 2021

सोचे और करें…


मेरे एक पुराने क्लाइंट अपने भाई जो कि व्यापार में उनके पार्टनर भी थे, के साथ मेरे पास आए। हमेशा एक दूसरे का पर्याय लगने वाले वे दोनों भाई आज मेरी आशा के विपरीत थोड़े चिंतित और परेशान नज़र आ रहे थे। शुरुआती बातचीत के बाद मुझे एहसास हुआ कि बदलते परिवेश के साथ व्यापार में आए बदलाव व उतार-चढ़ाव को वे एक दूसरे के द्वारा लिए गए निर्णय की असफलता के रूप में देख रहे थे। मेरे पूछने पर कि उनकी नज़र में इस समस्या का समाधान क्या है?, वे बोले, ‘आपके साथ एक अंतिम प्रयास करके देख रहे हैं अन्यथा अलग हो जाना ही अंतिम समाधान है।’ बहुत धैर्य से उनकी बातें और समस्या सुनने के बाद समाधान के रूप में मैंने उन्हें एक कहानी सुनाई, जो इस प्रकार थी-


बात कई वर्ष पुरानी है, गाँव में रहने वाले धनी एवं ज्ञानी सेठ का निधन हो गया। अपनी वसीयत में सेठ ने अपने तीन बच्चों के बीच पूरी सम्पत्ति बराबर भागों में बाँट दी। लेकिन तीनों पुत्र को वह सम्पत्ति तब मिल सकती थी जब वे सेठ द्वारा तय किए गए अनुपात में 17 ऊँटों को बाँट लेंगे। उस वसीयत के अनुसार बड़े पुत्र को आधे, मंझले को एक तिहाई और सबसे छोटे पुत्र को सत्रह ऊँटों में से नौवां हिस्सा लेना था।


हालाँकि तीनों पुत्र उच्च शिक्षित थे लेकिन उसके बाद भी पिता की इच्छा के अनुसार वे इस चुनौतीपूर्ण तरह से ऊँटों का विभाजन नहीं कर पा रहे थे। उन्हें लग रहा था कि सत्रह ऊँटों को आधा, एक तिहाई अथवा नौवें भाग में विभाजित करना सम्भव नहीं है। जब वे किसी भी तरह से हल नहीं निकाल पाए तो उन्होंने आपस में लड़ने के स्थान पर शहर के सबसे ज्ञानी व्यक्ति से सलाह लेने का निर्णय लिया।


बुद्धिमान, ज्ञानी व्यक्ति के पास पहुँचते ही सबसे पहले छोटे पुत्र ने उन्हें पूरा क़िस्सा सुनाते हुए इस समस्या का समाधान करने के लिए कहा। धैर्य पूर्वक पूरी बात सुनने के बाद ज्ञानी व्यक्ति बोले, ‘तुम्हारे पिता वाक़ई में बहुत बुद्धिमान थे। इस तरह ऊँट बाँटने का कहकर वे तुम्हें जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ सिखाना चाहते थे।’ उन सज्जन की बात सुन तीनों भाई लगभग एक साथ बोले, ‘जीवन का महत्वपूर्ण पाठ? कौनसा?’


बुद्धिमान व्यक्ति ने अपने नौकर से बाड़े में से एक ऊँट लाने का कहा और बोले, ‘पहले हम ऊँटों का विभाजन कर लेते हैं उसके बाद इसपर चर्चा करेंगे।’ जैसे ही नौकर ऊँट लेकर आया उन्होंने उस ऊँट को सत्रह ऊँटों में मिला दिया और तीनों भाइयों की ओर देखते हुए बोले, ‘अब हमारे पास अट्ठारह ऊँट हैं वसीयत के अनुसार इसके आधे अर्थात् 9 ऊँट बड़े भाई को मिलेंगे। मंझले को इसके एक तिहाई अर्थात् छः ऊँट मिलेंगे और सबसे छोटे भाई को कुल अट्ठारह ऊँटों का नवाँ भाग अर्थात् दो ऊँट मिलेंगे।’


वसीयत के अनुसार बड़े भाई को 9, मंझले को 6 और सबसे छोटे को 2 ऊँट मिल गए थे। इस तरह उन्होंने कुल सत्रह ऊँटों को वसीयत के अनुसार तीनों भाइयों में बाँट दिया था और अपना अट्ठारवाँ ऊँट बचा लिया था। 


कहानी पूरी होते ही मैंने उन दोनों भाइयों से कहा, ‘लड़ कर अलग हो जाना सबसे आसान तरीक़ा है। लेकिन यह आपकी ताक़त को भी आधा कर देगा। एक साथ रहोगे, कार्य करोगे तो समस्याएँ तो आएँगी लेकिन सही तरीक़े से उनका समाधान करना आपको जीवन में आगे बढ़ाएगा और तरीक़ा आप उपरोक्त कहानी से सीख सकते हैं।’ 


जी हाँ दोस्तों, जब तक जीवन है, उतार-चढ़ाव दोनों रहेंगे। कभी सब-कुछ आपकी इच्छा अनुसार होगा और कभी एकदम विपरीत। कभी जीवन में ढेरों ख़ुशियाँ होंगी तो कभी ढेरों समस्याएँ। जब ख़ुशियाँ मिलें तो ईश्वर, परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों का शुक्रिया अदा करना और जब समस्याएँ आए तो बातचीत कर अठारहवें ऊँट अर्थात् कॉमन ग्राउंड की तलाश कर, उसका समाधान करना। एक बार जब आप सामान्य आधार खोज लेते हैं तो समस्या को हल कर लेते हैं, हाँ यह थोड़ा मुश्किल है पर असम्भव नहीं। बस समस्या का हल खोजने से पहले मेरी यह एक बात याद रखिएगा, समस्या के समाधान तक पहुँचने का पहला कदम इस बात पर विश्वास करना है कि इस समस्या का समाधान हो सकता है। अगर आप सोचेंगे कि कोई समाधान नहीं है तो आप उन्हीं विचारों और परिस्थितियों में उलझे रहेंगे और समय, संसाधन और ऊर्जा खर्च करने के बाद भी कहीं नहीं पहुँच पाएँगे। इसीलिए तो ई ए बुकियानेर ने कहा है, ‘अगर सोचा जा सकता है तो किया जा सकता है, हर एक समस्या को दूर किया जा सकता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर 

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