दैनिक भास्कर - मैनजमेंट फ़ंडा    
एन. रघुरामन, मैनजमेंट गुरु 

कुछ समय के लिए ‘शॉर्ट टर्म रिस्पॉन्स स्टोर’ अच्छे हैं

कुछ समय के लिए ‘शॉर्ट टर्म रिस्पॉन्स स्टोर’ अच्छे हैं
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June 17,2021

कुछ समय के लिए ‘शॉर्ट टर्म रिस्पॉन्स स्टोर’ अच्छे हैं


करीब एक साल पहले महामारी के डर ने छोटे बिजनेसों की दुनिया उलट-पुलट दी थी। उपभोक्ता व्यवहार की दिशा बदल गई थी। रेस्त्रां-होटलों में सन्नाटा था, किराना दुकानों के बाहर लाइनें थीं और सैनिटाइजर की कमी हो गई थी।


तभी फैशन स्टोर चलाने वाले मेरे एक दोस्त ने महामारी के लिए कम अवधि का रिस्पॉन्स स्टोर खोला। उन्होंने कुछ दुकान मालिकों के साथ महीने-दर-महीने की लीज की व्यवस्था की और स्टोर्स का नाम रखा ‘मास्क एंड मोर’। उन्होंने वे सभी चीजें बेचीं जो आप महामारी के डर से खरीदते हैं। सैनिटाइजर, पीपीई किट, फेस शील्ड, डिसइंफेक्टेंट वाइप्स और महंगे तथा फैशनेबल मास्क आदि। उन्होंने बिक्री में सोशल मीडिया का भरपूर इस्तेमाल किया और प्रत्येक स्टोर के दो-तीन किलोमीटर के दायरे में घरों तक उत्पाद पहुंचाए। पांच महीनों में वे सब्जियां, महंगे फल और इम्यूनिटी प्रोडक्ट भी रखने लगे और दुकान के नाम में ‘इम्यूनिटी के लिए जरूरी चीजें भी’ जोड़ दिया। उन्होंने ऐसे संगठनों से अनुबंध किया जिनकी घरेलू बिक्री और निर्यात लॉजिस्टिक की कमी के कारण प्रभावित हुआ।


मैंने कई बार आस-पड़ोस के दुकानदारों को अपनी बंद दुकानों के अंदर जाते देखा। वे यह देखते थे कि सब सुरक्षित है, फिर किसी की दुकान के पीछे इकट्‌ठा होकर चाय पीते थे। चायवाला भी गैरकानूनी ढंग से बिजनेस करता था।


जब अन्य दुकान मालिक महामारी को कोस रहे थे, मेरे दोस्त ने 50% तक डिस्काउंट पर कपड़े बेचे जिससे 2019-20 का स्टॉक खाली हो गया। वे जानते थे कि उनमें बेचने का कौशल है, इसलिए इससे परेशानी नहीं हुई कि वे क्या बेच रहे हैं।


अब मुंबई जैसे शहरों में धीरे-धीरे कोविड प्रतिबंध कम हो रहे हैं तो कई लोग सोच रहे हैं कि क्या उपभोक्ता व्यवहार पहले ऐसा ही बना रहेगा या यह भी खत्म हो जाएगा।

यह तय है कि महामारी से पहले की बिजनेस दुनिया की विशेषताएं लौटेंगी, जिसमें भीड़ के समय का ट्रैफिक भी है, पर मेरे दोस्त जैसे कुछ लोग मानते हैं कि सिर्फ युवा उपभोक्ताओं को ही पहले जैसी स्थिति में लौटने और खोए हुए समय की भरपाई की जल्दबाजी होगी। उनकी पहले की दुकान, जो सभी उम्रवर्ग के लिए थी, अब पूरी तरह से युवाओं के फैशन पर केंद्रित है।


रणवीर सिंह और आयुष्मान खुराना जैसे सेलिब्रिटी अब जेंडर फ्लूइड (पहचान किसी एक जेंडर से न जोड़ने वाली) ड्रेसिंग अपना रहे हैं, तो युवाओं में भी यह स्टाइल मशहूर हो रही है। अगर आप सड़क पर किसी युवा को लाल-पीली पटि्टयों वाले पैंट के साथ सफेद पोल्का डॉट वाली नीली शर्ट पहने नहीं दखे सकते तो आप फैशन के बारे में कुछ नहीं जानते। आधुनिक फैशन ऐसे प्रिंट्स, कट्स, पैटर्न से जेंडर के बीच की खाई पाट रहा है, जो हमारी उम्र के लोग पसंद नहीं करते।


अब ‘रिवेंज शॉपिंग’ के तहत युवाओं ने उन सामानों और अनुभवों पर पैसा खर्चना शुरू कर दिया है, जो उन्हें पिछले 16 महीनों से नहीं मिल रहे थे। रेस्त्रां में लोगों की संख्या पहले ही बढ़ गई है। मेरे दोस्त की अब ‘कॉफी एंड मोर’ खोलने की इच्छा है क्योंकि युवा अब घर से बाहर, लेकिन सुरक्षित माहौल में वक्त बिताना चाहते हैं। वे मानते हैं कि ऐसे कम अवधि के रिस्पॉन्स स्टोर तब तक अच्छे चलेंगे, जबतक सब सामान्य नहीं हो जाता।


फंडा यह है कि जब तक उपभोक्ता के खरीद व्यवहार को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक कम अवधि के रिस्पॉन्स स्टोर पर काम करें, जो उपभोक्ताओं की तुरंत की जरूरतें पूरी करे।

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