दैनिक भास्कर - मैनजमेंट फ़ंडा    
एन. रघुरामन, मैनजमेंट गुरु 

त्योहार आपके अंदर का बचपन बाहर लाते हैं

त्योहार आपके अंदर का बचपन बाहर लाते हैं
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Oct 31, 2021

त्योहार आपके अंदर का बचपन बाहर लाते हैं


हवा में ठिठुरन है और दीपावली को कुछ दिन ही बाकी हैं। पचास साल पहले सर्दियां आज की तुलना में थोड़ी भारी होती थीं लेकिन कपड़े काफी पहले ही खरीद लेते थे, जो दर्जी की दुकान पर सिलने के लिए पड़े रहते थे। उन दिनों रेडीमेड कपड़ों और ब्रांडेड शर्ट का ज्यादा चलन नहीं था। नागपुर में हमारा दर्जी नुक्कड़ पर था। दुकान की शुरुआत में रखी लकड़ी की ऊंची टेबल पर कई काम होते थे। उसपर उसे कपड़ा काटने, इस्त्री करने, सिले हुए कपड़ों को तह करने में मदद मिलती थी और टेबल ग्राहकों को दुकान के अंदर आने से रोकती भी थी। नीचे कांच के शोकेस में हैंगर पर टंगे, सिले हुए कपड़े तथा उनके नीचे बिना सिले कपड़ों के ढेर दिखते थे।


बचपन में दिनभर में कई बार इस दुकान के सामने से गुजरता था और हर बार मेरी आंखें वह नया कपड़ा देखती थीं, जो मेरी शर्ट सिलवाने के लिए दिया गया था। मैं यह देखकर दुखी हो जाता कि दर्जी ने उसे सिलना शुरू नहीं किया है। मैं बच्चा था इसलिए उससे यह नहीं कह सकता था कि मेरी शर्ट पहले क्यों नहीं सी रहे, जबकि माप कई हफ्ते पहले दे दिया था। जब मैं साहस जुटाकर पूछता, तो दर्जी का तय जवाब होता, ‘तुम्हें दीपावली से पहले मिल जाएगा, अब जाओ।’ वह कभी तय तारीख नहीं बताता।


जब कपड़ा शोकेस से गायब हो जाता तो मैं बहुत खुश होता क्योंकि मैं जानता था कपड़ा, शर्ट में बदलने लगा है। लेकिन मेरी कभी टेलरिंग मशीन के पास जाकर प्रक्रिया देखने की हिम्मत नहीं होती थी। उन दिनों माता-पिता से ज्यादा, बच्चे दर्जी को परेशान करते थे, इसलिए वह हमें भगा देता था। उन 18 वर्षों में, जब मैं उससे कपड़े सिलवाता था, उसने कभी मेरे कपड़े दीपावली से बहुत पहले नहीं दिए। मुझे मेरी शर्ट त्योहार के एक दिन पहले ही मिलती थी। मैं सपने देखता था कि मैं शर्ट पहनकर, पिताजी का हाथ पकड़कर, सड़क पर शान से चल रहा हूं और पूरा नागपुर मुझे देख रहा है। तब मुझे नहीं पता था कि ब्लड प्रेशर क्या होता है, लेकिन मेरा त्योहार से पहले का एक हफ्ता भारी अनिश्चितता में बीतता था।


मुझे बचपन का किस्सा तब याद आया, जब मैं पिछले दो दिनों से इसी दौर से गुजर रहा था। मैंने कम से कम चार बार अपने स्पीड पोस्ट की स्थिति देखी होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि मेरे अंकल ने मेरे लिए 6 रंग-बिरंगी शर्ट खरीदकर भेजी हैं। दो महीने पहले मैं अपने मूल स्थान पर गया था और कुछ सफेद शर्ट खरीदी थीं। तब मेरे अंकल ने कहा था कि मुझे कुछ रंगीन शर्ट खरीदनी चाहिए, जो मुझपर अच्छी लगेंगी। एक हफ्ते पहले बातचीत में मैंने रंगों में उनकी आधुनिक पसंद की सराहना की थी क्योंकि उन्होंने जो रंग सुझाए थे, वे अमिताभ बच्चन ने कौन बनेगा करोड़पति के हालिया एपिसोड्स में पहने थे। उन्होंने तुरंत जवाब दिया, ‘मैं आज तुम्हें वैसी शर्ट भेज रहा हूं।’ चूंकि दुकानदार को मेरी साइज पता थी, इसलिए उन्हें भेजने में आसानी हुई। इसीलिए मैं उत्साह के साथ स्पीड पोस्ट की स्थिति जांच रहा हूं।


फंडा यह है कि कोई कुछ भी कहे, त्योहार आपके अंदर का बचपन बाहर लाते हैं और रंगों से सराबोर करते हैं। यह दीपावली से पहले आखिरी रविवार है। बाहर जाएं, स्थानीय बाज़ारों से खरीदारी करें और रंगों का आनंद लें।

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