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अच्छाई और उसकी अनुपस्थिति…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Oct 16, 2023
  • 3 min read

Oct 16, 2023

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों कहानियाँ वह बात बड़ी आसानी से कह जाती हैं जिन्हें अनुभव से सीखना अक्सर काफ़ी पेचीदा और परेशानी भरा हो सकता है। आज के लेख की शुरुआत हम ऐसी ही एक कहानी से करते हैं, जो बड़ी आसानी के साथ हमें जीवन का एक बड़ा पेचीदा सूत्र सिखाती है। बात कई साल पुरानी है विज्ञान के शिक्षक ने एक सेमिनार के दौरान बच्चों से प्रश्न किया, ‘क्या आपको लगता है इस दुनिया या इसमें जो कुछ भी है, सबको भगवान ने बनाया है? सभी बच्चे एक स्वर में बोले, ‘निश्चित तौर पर!’ जवाब सुन शिक्षक मुस्कुराए और बोले, ‘अगर यह सही है तो फिर बुराई भी ईश्वर के द्वारा ही बनाई गई होगी।’ उक्त कथन सुनते ही सभी बच्चे दुविधा में पड़ गये और आपस में कानाफूसी करने लगे कि ईश्वर ग़लत चीजों का निर्माण कैसे कर सकता है।


बच्चों की बातों याने तर्क-वितर्क को सुन शिक्षक मंद-मंद मुस्कुराते हुए बोले, ‘बच्चों, इतनी जल्दी किसी निष्कर्ष पर पहुँचने की ज़रूरत नहीं है। ऐसा करो, इस सवाल को यहीं छोड़ पहले मेरे दो और सवालों के जवाब दो। पहला, क्या इस संसार में सर्दी का कोई अस्तित्व है?’ सभी बच्चे एक स्वर में बोले, ‘जी गुरुजी, बिलकुल है। हम सभी सर्दी के मौसम में उसके प्रभाव को महसूस करते हैं।’ शिक्षक बच्चों की बात को लगभग बीच में ही काटते हुए बोले, ‘मुझे तो ऐसा नहीं लगता है क्योंकि विज्ञान के मुताबिक़ सर्दी कुछ होती ही नहीं है। हम तो विज्ञान की मदद से बस तापमान को माप सकते हैं। कुछ लोग कम तापमान को सर्दी कहते हैं अर्थात् सर्दी को आप गर्मी की अनुपस्थिति भर मान सकते है। जहां गर्मी नहीं होती, वहां हम ठंड का आभास करते हैं।’


शिक्षक के तर्कों के आगे सभी बच्चे निरुत्तर थे। वे अपनी बात आगे बढ़ाते हुए बोले, ‘अच्छा, चलो अब यह बताओ कि अंधकार का कोई अस्तित्व है?’ सभी बच्चों को यह प्रश्न बड़ा बचकाना लगा वे थोड़ा सा मुँह बनाते हुए बोले, ‘इसमें क्या प्रश्न पूछने जैसी बात है? क्या आप रोज़ रात को अंधेरा नहीं देखते?’ शिक्षक एक बार फिर मुस्कुराते हुए बोले, ‘मैं इस बार भी तुमसे सहमत नहीं हूँ। मेरी नज़र में अंधेरा कुछ नहीं होता, वह तो बस रोशनी की कमी का प्रतीक है।


इतना कहने के बाद शिक्षक कुछ पलों के लिए शांत रहे फिर धीमे स्वर में बोले, ‘बच्चों विज्ञान हमें लाइट और हीट याने प्रकाश और ताप के विषय में बताता है ना कि डार्क और कोल्ड याने अंधेरा और ठंड के विषय में नहीं। दूसरे शब्दों में कहूँ तो भौतिक शास्त्र में अंधेरा और ठंड याने डार्क और कोल्ड नाम का कोई विषय ही नहीं है। ठीक इसी तरह ईश्वर ने सिर्फ़ और सिर्फ़ अच्छाई नाम की चीज बनाई है, बुराई नहीं। वह तो सिर्फ़ अच्छाई की अनुपस्थिति भर है।


बात तो दोस्तों उन शिक्षक की बिलकुल सही है। वास्तव में इस सृष्टि में कहीं भी बुराई है ही नहीं। वह तो केवल प्यार, विश्वास और ईश्वर में हमारी आस्था में कमी का नाम है। दूसरे शब्दों में कहूँ तो जीवन में कभी भी स्थिति-परिस्थिति बुरी नहीं होती। अपितु उन्हें देखने का नज़रिया उन्हें अच्छा या बुरा बनाता है। इसका अर्थ हुआ सही नज़रिया आपको जीवन की विषम से विषम स्थिति-परिस्थिति से उबार कर शांत और खुश रहने का मौक़ा देता है। इसीलिए तो कहा गया है, ‘नजर को बदलो तो नजारे बदल जाते हैं, सोच को बदलो तो सितारे बदल जाते हैं। कश्तियां बदलने की जरूरत नहीं, दिशा को बदलो तो किनारे खुद-ब-खुद बदल जाते हैं।


तो आइए साथियों, आज से अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए सबसे पहले हम अपने नज़रिए को बेहतर बनाते हैं ताकि हम अपने जीवन को खुश और शांत रहते हुए जी सकें।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com

 
 
 

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