अतीत को लेकर ना बैठे रहें…
- Nirmal Bhatnagar

- Nov 9, 2025
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Nov 9, 2025
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

हाल ही में एक पारिवारिक कार्यक्रम में एक परिचित से काफ़ी समय बाद मिलना हुआ। वे सज्जन इस बात से काफ़ी हैरान थे कि मैं कुछ ही वर्षों में कंप्यूटर हार्डवेयर सप्लायर से आरजे, कॉलमिस्ट, मोटिवेशनल स्पीकर, कोच आदि कैसे बन गया? इसके साथ ही वे इस बात से भी हैरान थे कि मैंने बाज़ार में अपनी छवि कैसे बदली? असल में वे मेरे अतीत से, मेरे वर्तमान का अंदाजा लगा रहे थे, जो सही नहीं था क्योंकि अनुभव या ज़िंदगी से सीख लेकर कोई भी व्यक्ति ख़ुद को बेहतर बना सकता है।
हर इंसान का एक अतीत होता है, कभी वो उजला, तो कभी धुंधला, तो कभी इतना गहरा होता है कि वो दूसरों को डराने लगता है। यही उजले, धुँधले या डरावने अनुभव उस व्यक्ति की गहरी छवि बना देते हैं, जिससे बाहर आ पाना लोगों के लिए मुश्किल होता है। मेरा मानना है कि अतीत का अँधेरा ना तो इंसान को हमेशा के लिए “बुरा” बना सकता है और ना ही अतीत का उजाला व्यक्ति को हमेशा के लिए अच्छा बना सकता है। लेकिन अगर अँधेरे को सही तरह से समझा जाए, तो वह हमारे भीतर “प्रकाश” जगाने की क्षमता जरूर रखता है।
दूसरे शब्दों में कहूँ तो कई बार समाज इंसान को उसके बीते हुए समय के आधार पर आँकता है। याने उसकी अतीत की गलती, कहे हुए ग़लत शब्द या फिर जीवन में भटकने पर उसकी छवि हमेशा के लिए नकारात्मक बना देते हैं। लेकिन सोच कर देखियेगा, क्या कोई भी इंसान वैसा ही रहता है जैसा वो पाँच या दस साल पहले था? नहीं ना! जीवन का सौंदर्य ही यही है कि यह निरंतर परिवर्तनशील है। इंसान हर अनुभव से कुछ सीखता है, हर दर्द से कुछ समझता है, और हर असफलता से थोड़ा और परिपक्व बनता है। इसलिए ही कहते हैं, ‘जो व्यक्ति अपने अतीत से सीख लेता है, वही वास्तव में जीवन का विद्यार्थी बनता है।’
इसी तरह कई बार हम सालों पहले कही बातों को याद करके शर्मिंदा हो जाते हैं और सोचते हैं कि “मैंने ऐसा क्यों कहा था?” इस सवाल का मन में आना ही यह सिद्ध करता है कि आप बदल रहे हैं, आप बढ़ रहे हैं। मैंने खुद ने कई साल पहले कुछ ऐसी बातें कहीं, कुछ ऐसे काम किए, जिनसे आज मैं सहमत नहीं हूँ। इसका मतलब यह नहीं कि मैं दोहरा मापदंड या दो चेहरे रखता हूँ, इसका अर्थ तो सिर्फ़ यह है कि मैं विकसित हो रहा हूँ; मैं बदल रहा हूँ; मैं रोज़ बेहतर बन रहा हूँ। दोस्तों, हम सभी को यह स्वीकार करना चाहिए कि परिवर्तन जीवन का नियम है। अगर कोई इस सोच के विपरीत जीवन जी रहा है तो इसका मतलब सिर्फ़ इतना सा है कि वो जीवन जी नहीं रहा बल्कि काट रहा है। याद रखियेगा, समय के साथ बदलना कमजोरी नहीं, विकास है और विकास का पहला कदम अतीत को नकारना नहीं, स्वीकारना है। हम अपने अतीत को मिटा नहीं सकते, पर हम यह तय कर सकते हैं कि उससे क्या सीखना है। हर गलती, हर गलत शब्द, हर कठिन अनुभव — हमारे भीतर किसी नई समझ का बीज बोता है। जबकि अतीत के लिए बार-बार ख़ुद को सजा देना, आपका आनंद छीनता है। इसलिए जब भी कोई आपको अतीत से आंके तो ख़ुद से कहें, “हाँ, वो मैं था… लेकिन अब मैं वैसा नहीं हूँ। मैंने सीखा है, और यही मेरी असली जीत है।”
दोस्तों, समय के साथ हमारे विचार, हमारी प्राथमिकताएँ, हमारे सपने आदि सब बदलते हैं। लेकिन कई बार कुछ लोग यह समझ नहीं पाते। ऐसे में आपको उन्हें वहीं छोड़ कर, अपने परिवर्तन को स्वीकारते हुए आगे बढ़ना होगा। जिस तरह पेड़ पुराने पत्तों को गिराकर नए पत्ते उगाता है, वैसे ही हमें पुरानी धारणाओं, विचारों और डरों को छोड़कर, नए रूप में खिलना चाहिए।
इसलिए दोस्तों, किसी के अतीत से उसको मत आँको शायद अब वो उसके जीवन की बड़ी सीख बन गया हो। साथ ही स्वयं को अपने अतीत के लिए कोसना बंद करो अन्यथा आप जीवन को बेहतर बनाने वाली बातों को सीखने से वंचित रह जाओगे। याद रखना, हर इंसान बदल रहा है, और यही जीवन की सबसे सुंदर सच्चाई है। इसलिए, अतीत को दोष मत दो, वर्तमान को स्वीकारो, और भविष्य को अपने परिवर्तन से रोशन करो क्योंकि हर दिन, बार-बार बेहतर बनना ही जीवन का असली उद्देश्य है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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