• Nirmal Bhatnagar

अपने लक्ष्य को करें मजबूर कि वो आपको पाने के लिए उतावला हो जाए…

June 29, 2022

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, आपने निश्चित तौर पर कई लोगों को अपनी रूठी क़िस्मत को मनाने के लिए ना सिर्फ़ तरह-तरह की पूजा-पाठ करते हुए बल्कि टोना - टोटकों के रूप में विभिन्न तरह के पत्थरों को धारण करते हुए देखा होगा। लेकिन उसके बाद भी इनमें से ज़्यादातर लोग अपनी क़िस्मत को लेकर संशय में रहते हैं। असल में साथियों दिक़्क़त पूजा-पाठ या पहने गए पत्थरों अथवा किसी भी अन्य उपाय में नहीं होती। यह सब चीजें निश्चित तौर पर हमारे लिए लाभदायक रहती होंगी । लेकिन इन सब उपायों का अधिकतम लाभ हमें तब मिलता है जब वे अपने कार्य, परिवार अथवा जिस भी क्षेत्र में संघर्ष कर रहे हैं, के प्रति पूर्णतः समर्पित रहते हैं। जीवन में यही वह बिंदु हैं जब आपके लक्ष्य का लक्ष्य भी आपको पाना होता है। अपनी बात को मैं एक प्रसंग से समझाने का प्रयास करता हूँ।


बात कई साल पुरानी है, एक दिन भगवान कृष्ण के परम भक्त मुरली जाप करते हुए बाज़ार से कहीं जा रहे थे। तभी उन्होंने देखा की आसमान में एक देवदूत बहुत ही मोटा बही - खाता लेकर कहीं जा रहा है। ऐसा नजारा उन्होंने अपने जीवन में पहली बार देखा था। उत्सुक्तावश मुरली ने जोर से आवाज़ देकर फ़रिश्ते को रोका और पूछा, ‘आप इतनी मोटी बही कहाँ लेकर जा रहे हैं और इसमें किस चीज़ का हिसाब-किताब लिखा हुआ है?’


मुरली का प्रश्न सुन देवदूत मुस्कुराया और बोला, ‘इस बही में ईश्वर के परम भक्त लोगों के नाम लिखे हुए हैं।’ इतना सुनते ही मुरली के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। उसने तुरंत देवदूत से अपना नाम उस बही में चेक करने को कहा। देवदूत ने बड़े ध्यान से बही को 2-3 बार चेक किया, पर उसे मुरली का नाम उसमें कहीं भी नहीं मिला। उसने मुरली की ओर गम्भीरता से देखते हुए, ना में सिर हिलाया और वापस बही लेकर आसमान में उड़ गया।


अपना नाम ईश्वर की भक्ति करने वाले लोगों की सूची में ना पाकर मुरली बहुत परेशान हुआ । जीवन भर पूजन-अर्चन करने के बाद भी भगवान कृष्ण की पूजा करने वाले लोगों में मेरा नाम शामिल नहीं हो सका। लेकिन कुछ ही देर में मुरली के मन के विचार बदले। उसने सोचा, ‘भगवान कृष्ण तो बहुत भोले है, हो ना हो मेरे पूजन-अर्चन में कहीं न कहीं कोई कमी रह गई होगी । अगले दिन से ही मुरली ने और अधिक ध्यान से ईश्वर का, भगवान कृष्ण का ध्यान करना, पूजा करना शुरू कर दिया।


लगभग एक माह बाद मुरली को आकाश में उड़ता हुआ एक और देवदूत दिखा। इस बार भी देवदूत के हाथ में एक बही थी। लेकिन इस बार की बही बहुत ही पतली थी। इस बार भी मुरली ने उत्सुक्तावश देवदूत को जोर से आवाज़ लगाई और जैसे ही देवदूत ज़मीन पर आया उसने अपना पुराना प्रश्न दोहरा दिया, ‘‘आप इस बही को लेकर कहाँ जा रहे हैं और यह पिछली बार के मुक़ाबले इतनी पतली क्यूँ है? इस पतली बही में किस चीज़ का हिसाब-किताब लिखा हुआ है?’


एक साथ इतने प्रश्न सुन देवदूत मुस्कुराया और बोला, ‘मुरली मैं इसे लेकर प्रभु श्री कृष्ण के पास जा रहा हूँ। इस बार की बही इतनी पतली इसलिए है क्यूँकि इसमें उन देव समान इंसानों के नाम हैं जिनकी पूजा भगवान स्वयं करते हैं।’ देवदूत का जवाब तो मुरली की कल्पना से भी परे था। उसने पूरे आश्चर्य के साथ पूछा, ‘देवदूत जी, क्या इस दुनिया में ऐसे भी लोग हैं जिनकी पूजा भगवान स्वयं करते हैं? क्या आप मुझे किसी एक देव समान इंसान का नाम बाता सकते हैं?’ मुरली के भोलेपन को देख देवदूत मुस्कुराया और बोला, ‘बिलकुल ऐसे इंसान भी होते हैं जिनकी पूजा स्वयं भगवान भी करते हैं।’ इतना कहते ही देवदूत ने मुरली के सामने ही उस बही का पहला पन्ना खोला तो उसमें सबसे पहला नाम ही मुरली का लिखा हुआ था। मुरली का नाम देख देवदूत बोला, ‘मुरली जो लोग ईश्वर के मक़सद को पूरा करने के लिए कार्य करते हैं, उसके बनाए इस जहां को और बेहतर बनाने में लगे रहते हैं, उनकी भक्ति सचमुच इतनी ऊँची होती है कि ईश्वर स्वयं उनकी भक्ति करते हैं।


आशा करता हूँ दोस्तों इस कहानी से आप पूर्व में मेरे द्वारा कहे गए कथन ‘जब आप अपने कार्य, परिवार या जिस भी क्षेत्र में संघर्ष कर रहे होते हैं, के प्रति पूर्णतः समर्पित होते हैं तो आपको लक्ष्य की ओर नहीं जाना पड़ता है बल्कि लक्ष्य स्वयं आपकी ओर चलके आता है। ‘ का आशय समझ गए होगे।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com

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