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  • Writer's pictureNirmal Bhatnagar

अभाव का प्रभाव…

Feb 27, 2023

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, अभाव का प्रभाव भी जीवन में आपकी ख़ुशियों को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरीक़ों से प्रभावित करता है। कुछ लोग अभाव के प्रभाव में रोते हैं तो कुछ लोग अभाव से प्रेरणा प्राप्त कर अपने जीवन को बेहतर बना लेते हैं। अपनी बात को मैं आपको एक कहानी से समझाने का प्रयास करता हूँ। एक सज्जन साइकिल से बाज़ार जा रहे थे, तभी उनके पास से एक दोपहिया वाहन चालक अपने स्कूटर से निकला। उसे देखते ही साइकिल चला रहे सज्जन के मन में आया, ‘काश! मेरे पास भी ऐसा स्कूटर होता, कहीं भी आना-जाना कितना आसान होता।’ जिस वक्त साइकिल चालक स्कूटर के विषय सोच रहा था उसी पल दोपहिया वाहन चालक अपने पास से गुजरती कार को देखते हुए सोचता है कि भगवान ने इसे कितना भाग्यशाली बनाया है। काश मेरे पास भी ऐसी कार होती तो मुझे भी धूप, बारिश में इस तरह दोपहिया वाहन पर नहीं घूमना पड़ता।


ठीक इसी तरह कार चालक ऑडी के लिए और ऑडी वाला व्यक्तिगत हवाईजहाज़ के विषय में सोचकर अभाव के नकारात्मक प्रभाव में था। दोस्तों, अभाव का नकारात्मक प्रभाव आपको उस ख़ुशी, उस संसाधन के लाभ से भी वंचित कर देता है जो आपके पास पहले से होता है। जैसा उपरोक्त केस में हुआ था।


अब आप उपरोक्त घटना को दूसरे नज़रिए से देखिए। मान लीजिए साइकिल वाला दोपहिया वाहन चालक या दोपहिया वाहन चालक, कार वाले के या फिर कार वाला और बड़ी कार वाले के; और सबसे महँगी कार वाला व्यक्तिगत हवाईजहाज़ के प्रभाव में ना आता तो क्या होता? सभी अपने पूर्ण फ़ोकस और क्षमताओं के साथ अपना-अपना कार्य करते और निश्चित तौर पर अपने जीवन में आगे बढ़ते। इसका अर्थ हुआ दोस्तों, जो आपके पास है, अगर आप उसे ईश्वर का आशीर्वाद मान, स्वीकारते हैं अर्थात् जो आपके पास है उसके लिए आभारी रहते हुए अपनी प्राथमिकताओं पर काम करते हैं, तो अभाव आपके लिए प्रेरणा का कार्य करता है।


वैसे आभारी रहना आपको अभाव में भी खुश रहने का मौक़ा देता है। याद रखिएगा, अगर एक बार अभाव में रोने की आदत पड़ गई तो आप सब कुछ पाने के बाद भी रोता ही रहते है। इसका सबसे बड़ा नुक़सान यह है कि रोते समय हम यह भूल जाते हैं कि जीवन क्षणभंगुर है अर्थात् हम यहाँ हमेशा के लिए नहीं आए हैं, अभी हमें यहाँ से अगली यात्रा पर भी जाना है। ऐसे में दुखी रहना हमारे क़ीमती समय को नकारात्मक भावों में बर्बाद कर देगा। क्या पता हमें दूसरा अवसर मिलेगा या नहीं। बुद्धिमानी तो इसी में है कि हम इस अवसर का पूर्ण लाभ ले और अभाव में भी सद्कर्म करते हुए, खुश रहते हुए जिएँ। यहाँ सदैव एक जैसी स्थितियाँ तो किसी की भी नहीं रहती हैं, इसलिए परिस्थितियों की स्वीकृति के साथ जीवन यात्रा का आनंद लेना सीखिए।


जी हाँ दोस्तों, अपने जीवन को हर हाल में उपयोगी बनाने की ज़िम्मेदारी हमारी है, इसके लिए हमें निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए। याद रखिएगा, जीवन को ढोना नहीं, जीना है। इसलिये पल पल उत्सव और आनन्द मनाओ। हर स्थिति में खुश रहने का प्रयास करो क्योंकि ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

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