• Nirmal Bhatnagar

अव्यवस्थित जीना याने तनाव को निमंत्रण देना…

Nov 19, 2022

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, स्वभाव से मैं एकदम स्वच्छंद वातावरण में, खुद की शर्तों पर जीवन जीना पसंद करता हूँ, अर्थात् जब जैसा मन में आएगा, वैसा निर्णय लूँगा और कार्य करूँगा। लेकिन बीतते समय के साथ मुझे समझ आया कि सुनने और करने में अच्छा लगने वाला यह तरीक़ा हमें पूर्णता के साथ जीवन जीने का मौक़ा नहीं देता है। दूसरे और एकदम सरल शब्दों में कहूँ तो अव्यवस्थित तौर तरीक़ों के साथ सुखी और सम्पन्न जीवन की कल्पना करना, ‘मुंगेरी लाल के हसीन सपनों’ से ज़्यादा कुछ भी नहीं है।


जी हाँ साथियों, स्वच्छंदता, फ़्रीडम, मनमर्ज़ी का जीवन या कुल मिलाकर कहूँ तो अव्यवस्थित जीवनशैली हमारे जीवन में तनाव का प्रमुख कारण है। उदाहरण के लिए मुझे ही ले लीजिए, आज मैं 909वाँ रेडियो शो कर रहा हूँ और इन 909 के 909 शो का समय प्रथम दिन से सुबह 9:50 और शाम को 6:50 रहा है। लेकिन उसके बाद भी मैं कई बार दिन की धीमी शुरुआत करते हुए शो की रिकॉर्डिंग को अंतिम समय तक ले आता हूँ, जैसा आज भी मैंने किया। इस तरह जल्दबाज़ी में रिकॉर्ड किया गया शो कई बार तकनीकी दृष्टि से उतना अच्छा नहीं बन पाता है, जिसकी उसमें सम्भावना थी।


दोस्तों, अब अगर एक बार रीवाइंड कर याने पीछे जाकर पूरे घटनाक्रम को एक बार फिर देखा जाए तो आप पाएँगे कि दिन भर कार्य पूरा ना होने के कारण मैं तनाव में रहा और दूसरा मैंने कार्य की गुणवत्ता को नज़रंदाज़ कर अपना नुक़सान भी करा। इसीलिए मैंने पूर्व में कहा था, ‘अव्यवस्थित जीवनशैली हमारे जीवन में तनाव का प्रमुख कारण है।’ सामान्यतः इस तरह की जीवनशैली का प्रभाव साथियों तनाव पर आकर ही ख़त्म नहीं होता, बल्कि हमारे जीवन के दूसरे पहलुओं को भी प्रभावित करता है। जैसे, अगर आपका पूरा दिन तनाव में बीता है तो अब आपकी रात भी तनावपूर्ण ही रहेगी।


ज़रा सोच कर देखिए, अगर आप अपने कार्य के लिए किसी और पर निर्भर हैं और अगर वह व्यक्ति उस कार्य को आपकी अपेक्षा के अनुरूप समय पर नहीं कर पा रहा है, तो आपकी स्थिति क्या होगी? निश्चित तौर पर यह अपूर्ण कार्य आपको अशांत, परेशान और हैरान कर, आपके सुख, चैन और शांति को खत्म कर देगा, आपको तनाव में ला देगा। उपरोक्त आधार पर स्पष्ट तौर पर कहा जा सकता है कि अव्यवस्थित जीवनशैली के कारण अशांत मन, तनाव के साथ परेशानी और हैरानी भरा जीवन जीने वाला इंसान, इस स्थिति के लिए स्वयं ज़िम्मेदार होता है। हो सकता है, आप में से कुछ लोग मेरी बात से सहमत ना हों। आपको यह भी लग सकता है कि इस उम्र में भी इन बातों की चिंता करूँगा तो स्वयं को सफल कब बनाऊँगा। ऐसे सभी लोगों को मैं सिर्फ़ इतना कहना चाहूँगा कि ईश्वर अपने कार्य को पूरे व्यवस्थित तरीके से करता है। उसके यहाँ किसी भी कार्य को करने के लिए समय दिया नहीं जाता है, अपितु समय पर कार्य किया जाता है। उसने आपको जीने के लिए भी सीमित समय ही दिया है और समय पूर्ण होते ही वो आपको इस लोक से, दूसरे लोक में ले जाएगा। उस दिन उसे इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा कि आप क्या कर पाए और क्या नहीं।


इसीलिए साथियों, अगर आप अपने कार्य को समय पर करना, दूसरों पर निर्भर ना रहना, सीख जाते हैं, तो आप अपने जीवन को आसान, खुशहाल और तनाव रहित बनाते है। जी हाँ साथियों, अगर आप अपने दिन के चैन और रातों की नींद को बचाना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपनी जीवनशैली को व्यवस्थित बनाएँ। इसके लिए हमें छोटे से छोटे कार्यों को व्यवस्थित करना सीखना होगा। जैसे, उठना, बैठना, खाना, पीना, सोना, जागना, समय पर सब कार्य करना, स्वास्थ्य का ध्यान रखना आदि। याद रखिएगा, जब आप समय पर कार्य करेंगे तो ही आप समय पर आराम भी करेंगे। जब आपका कार्य और आपका आराम समय पर होगा तब आप स्वस्थ मन और स्वस्थ तन के मालिक बनेंगे अर्थात् आप सफलता के साथ सुख को भी भोग पाएँगे और स्वयं को समाज के लिए आदर्श के रूप में स्थापित कर पाएँगे।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com

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