• Nirmal Bhatnagar

आनंद के साथ जीना है, तो अपने दृष्टिकोण को रखें सही…

July 17, 2022

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, आज के लेख की शुरुआत मैं अपने जीवन के अनुभव से करना चाहूँगा। बात वर्ष 1987 की है, जब मुझे कक्षा दसवीं उत्तीर्ण करने के पश्चात परिवार की ओर से उपहार स्वरूप सिंकलेयर का एक होम पी॰सी॰ (कम्प्यूटर) मिला था। उस वक्त चूँकि बहुत ही कम लोग कम्प्यूटर के बारे में जानते थे, इसलिए जल्द ही मेरी पहचान कम्प्यूटर के विशेषज्ञ के रूप में बनने लगी। इसी वजह से बहुत कम उम्र में मुझे भारत के पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ैल सिंह के उज्जैन आगमन पर हॉट लाइन स्थापित करने में सहयोग करने का मौक़ा मिला। ठीक इसी तरह बैंक नोट प्रेस, देवास, जैसे बड़े संस्थानों के लिए टीनेज में कार्य करने का मौक़ा मिला। कम उम्र में मिली इस सफलता ने मुझे हमेशा नए कौशल को विकसित करने के और नई तकनीकों को सीखने के लिए प्रेरित किया। शायद इसी वजह से मैं अपने शहर उज्जैन को, कम्प्यूटर हार्डवेयर के पहले शोरूम के साथ कम्प्यूटर सम्बंधित कई नई टेक्नॉलजी से रूबरू करवा पाया।


बीस वर्षों तक जी तोड़ कार्य करने के बाद भी दोस्तों, कम्प्यूटर के क्षेत्र में मेरा कैरियर काफ़ी उतार-चढ़ाव भरा रहा। कई बार तो मैं समझ ही नहीं पाता था कि मेहनत के साथ ज्ञान, कौशल, सर्वश्रेष्ठ देने की इच्छा और सही उद्देश्य होने के बाद भी मुझे इतनी समस्याओं या उतार-चढ़ाव से क्यूँ गुजरना पड़ रहा है? मेरी इस समस्या का समाधान मुझे वर्ष 2007 में एक ट्रेनिंग सेशन के दौरान मिला, जिसमें मेरे गुरु श्री राजेश अग्रवाल सर ने बताया था कि, ‘सफलता प्रतिभा की अपेक्षा दृष्टिकोण पर अधिक निर्भर करती है।’


दृष्टिकोण के महत्व को समझते वक्त, उस दिन मुझे एहसास हुआ कि दुःख में सुख, हानि में लाभ, बुराई में अच्छाई और प्रतिकूलताओं में अवसर खोज लेना ही सही दृष्टिकोण होने की निशानी है। इस नई सीख और प्रतिकूल स्थितियों के साथ मैंने एजुकेशनल कंसलटेंसी और मोटिवेशनल ट्रेनिंग के क्षेत्र में कदम रखा। सही दृष्टिकोण, परिवार और अपनों के साथ, गुरु और ईश्वर का आशीर्वाद व सही दिशा में की गई मेहनत से मैंने जल्द ही अपनी मंज़िल के पहले पड़ाव को पा लिया।


दोस्तों, दुःख से सुख, असफलता से सफलता के इस सफ़र में मुझे एहसास हुआ कि जीवन में ऐसा कोई दुःख ही नहीं है जिसमें सुख की परछाइयों को देखा ना जा सके। ठीक इसी तरह जीवन में कोई ऐसी तकलीफ़ या बाधा नहीं है, जिससे प्रेरणा ना ली जा सके। इसे मैं आपको एक छोटे से उदाहरण से समझाने का प्रयास करता हूँ। रास्ते में पड़े हुए पत्थर से आपको ठोकर भी लग सकती है, आप उसे उठाकर किसी का सर भी फोड़ सकते हैं और आप उसी पत्थर से खुद के लिए घर भी बना सकते हैं या फिर उस पत्थर को सीढ़ी की तरह उपयोग करके किसी ऊँचे स्थान पर चढ़ सकते हैं। पत्थर का उपयोग आपके नज़रिए पर निर्भर करता है।


ठीक ऐसा ही विपरीत परिस्थितियों और चुनौतियों के दौर में होता है। 1987 से 2022 तक की अपनी जीवन यात्रा या कैरियर के अनुभव के आधार पर मैं आपको पूरे विश्वास से कह सकता हूँ कि जीवन का आनंद वही लोग उठा पाते हैं जिनका सोचने का ढंग सकारात्मक होता है, जो समस्याओं की जगह, सम्भावनाओं पर ध्यान लगाते है और सीधे शब्दों में कहूँ तो जीवन के प्रति सही नज़रिया रखते हैं। याद रखिएगा, इस दुनिया में जितने लोग दुःख, परेशानियों, किसी चीज़ की कमी, चुनौतियों या असफलताओं से परेशान या दुखी नहीं हैं उससे कई गुना ज़्यादा लोग जीवन को नकारात्मक नज़रिये से देखने की वजह से दुखी या परेशान हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो नकारात्मक सोच उनकी परेशानियों या दुःख की मुख्य वजह है। अगर आप जीवन का असली मज़ा या आनंद उठाना चाहते हैं, तो आज से सकारात्मक लोगों के साथ रहिए, सकारात्मक देखिए और सकारात्मक सोचिए, यह आपको अभावों के बीच भी जीवन को आनंद के साथ जीने का मौक़ा देगा।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com

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