आरंभ करना ही सबसे बड़ी जीत है !!!
- Nirmal Bhatnagar

- Mar 7
- 3 min read
Mar 7, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, हमारे जीवन का सबसे बड़ा भ्रम यही है कि “जब सही समय आएगा, तब शुरू करेंगे।” ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि इस दुनिया में बहुत लोग सपने देखते हैं, योजनाएँ बनाते हैं, अवसरों के बारे में सोचते हैं, लेकिन पहला कदम नहीं उठाते। वे हमेशा आदर्श परिस्थिति का इंतज़ार करते रहते हैं। उदाहरण के लिए जब हालात ठीक होंगे, जब पूरे संसाधन होंगे, जब डर खत्म होगा, तब शुरुआत करेंगे। लेकिन सच्चाई यह है कि जीवन में परिस्थितियाँ कभी पूरी तरह अनुकूल नहीं होतीं। इसी वजह से कई लोग सही समय का इंतज़ार करते-करते अपनी पूरी ज़िंदगी गुज़ार देते हैं।
इसी बात को समझाते हुए भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्म का संदेश देते हुए बताया कि मनुष्य को कार्य करने के लिए किसी विशेष मुहूर्त की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। जिस क्षण हम संकल्प लेते हैं, वही क्षण हमारे लिए सही समय बन जाता है। जो व्यक्ति लगातार सही समय की प्रतीक्षा करता रहता है, वह वास्तव में अपने भय, संदेह और आलस्य को बढ़ने का अवसर दे रहा होता है। अक्सर लोग कहते हैं, “अभी समय अनुकूल नहीं है”, “अभी संसाधन पूरे नहीं हैं”, “थोड़ा और इंतज़ार कर लेते हैं।” लेकिन जीवन में इंतज़ार की कोई सीमा नहीं होती। एक बार यदि टालने की आदत बन जाए, तो हर दिन एक नया बहाना तैयार मिल जाता है। जिसके फलस्वरूप बीतते समय के साथ सपने केवल कल्पना बनकर रह जाते हैं और समय चुपचाप आगे निकल जाता है।
इसी सत्य को समझकर महान उद्योगपति धीरूभाई अंबानी ने अपने जीवन को संवारा था। उन्होंने साधारण परिस्थितियों में जीवन शुरू किया। उनके पास न तो बड़े संसाधन थे, न कोई विशेष सुविधा। इसके बाद भी उन्होंने यह नहीं सोचा कि पहले सब कुछ ठीक हो जाए, फिर शुरुआत करेंगे। उन्होंने वहीं से शुरुआत की, जहाँ वे खड़े थे। याने योजनाबद्ध तरीके से छोटे-छोटे कदम उठाते हुए, जोखिम स्वीकार करते हुए और निरंतर प्रयास करते हुए उन्होंने अपने सपनों को वास्तविकता में बदल दिया। अगर वे भी सही समय का इंतज़ार करते रहते, तो शायद उनकी कहानी कभी लिखी ही नहीं जाती।
दोस्तों, जीवन का एक बड़ा सत्य यह है कि रास्ते हमेशा चलते हुए बनते हैं। जब तक हम खड़े रहते हैं, रास्ता दिखाई नहीं देता। लेकिन जैसे ही हम पहला कदम उठाते हैं, दिशा स्पष्ट होने लगती है। इसलिए ही कहते हैं जो व्यक्ति डर के साथ भी चलना सीख लेता है, वही आगे बढ़ता है और जो व्यक्ति केवल परिस्थितियों के परिपूर्ण होने का इंतज़ार करता है, वह अवसरों को अपने सामने से गुजरते हुए देखता रह जाता है।
दोस्तों, समस्याएँ जीवन का हिस्सा हैं और रहेंगी। संसाधन भी कभी पूरी तरह पर्याप्त नहीं होते। डर भी पूरी तरह समाप्त नहीं होता। लेकिन जो व्यक्ति इन सबके बावजूद शुरुआत कर देता है, वही सफलता की दिशा में बढ़ता है। याद रखियेगा, साहस का अर्थ डर का न होना नहीं है; साहस का अर्थ है डर के बावजूद कदम उठाना।
एक सत्य को और याद रखिएगा, समय को दोष देना बहुत आसान है, लेकिन साहस दिखाना कठिन। जीवन में वही लोग इतिहास बनाते हैं जो इंतज़ार नहीं करते, बल्कि शुरुआत करते हैं। अगर आप भी अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं तो सबसे पहले स्वीकारें कि सही समय कभी अपने आप नहीं आता, वह तो तब बनता है जब हम निर्णय लेते हैं और पहला कदम उठाते हैं। इसलिए हमेशा ख़ुद को याद दिलायें कि, ‘आज से बेहतर दिन कोई नहीं, अभी से बेहतर क्षण कोई नहीं। जो व्यक्ति आज शुरू करता है, वही कल आगे बढ़ता है।’ दोस्तों, सफल होना है तो टालना बंद कीजिए और शुरुआत कीजिए क्योंकि आरंभ करना ही सबसे बड़ी जीत है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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