top of page
Search

आशा की एक चिंगारी पूरी दुनिया को रोशन कर सकती है…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Nov 19, 2025
  • 3 min read

Nov 19, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, जीवन में कठिनाइयाँ सबके हिस्से में आती हैं। बस अंतर इतना होता है कि किसी के हिस्से में यह कम आती है, तो किसी के हिस्से में ज़्यादा। किसी को बाहरी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, तो किसी को भीतर से। लेकिन इतिहास यह नहीं देखता कि किसी ने कितनी मुश्किलें झेली, इतिहास केवल यह देखता है कि किसने मुश्किलों के बावजूद उठने का साहस बनाए रखा और यह तब संभव हो सकता है जब आप कठिन से कठिन दौर में भी अपने भीतर आशा का दीप जलाए रख सकें। इसी बात को बहुत ही सरल तरीके से समझाते हुए क्रिस्टोफ़र रीव ने कहा है, “Once you choose hope, anything is possible.” याने आशा वह रोशनी है जो अँधेरी रातों में भी रास्ता दिखा देती है। यही दोस्तों, जीवन का सबसे सरल सच है।



जी हाँ, कठिन परिस्थितियाँ इंसान को परखती हैं। कई लोग जीवन की चुनौतियों से टूट जाते हैं। वे अपने डर, अपने दर्द और अपनी असफलता को ही अपनी पहचान बना लेते हैं। वे कभी जान ही नहीं पाते हैं कि अगर वे एक कदम और बढ़ते तो क्या बन सकते थे। इसके विपरीत कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो परिस्थितियों के दबाव में टूटते नहीं, बल्कि उसी दबाव में तराशे जाते हैं। जैसे कोयला दबाव में हीरा बनता है, ठीक वैसे ही संकटों और परिस्थितियों के दबाव में इंसान निखरता है।


दोस्तों, आशा वह अदृश्य शक्ति होती है, जो चुनौतियों, परिस्थितियों और संकट के दौर में जीवन को बदल देती है। कहते हैं, डर आदमी को वहीं रोक देता है, लेकिन आशा उसे वहां तक ले जाती है जहाँ वह कभी पहुँचना चाहता था। डर कहता है, “यह असंभव है।”, आशा कहती है, “एक बार कोशिश तो करो।” डर कहता है, “तुम अकेले हो।”, आशा कहती है, “तुम्हारे भीतर तुम्हारा सबसे बड़ा साथी है। याने तुम खुद ही ख़ुद के सबसे बड़े हितैषी हो।”, डर भविष्य को धुंधला करता है और आशा भविष्य को चमकदार बनाती है। इसलिए मैं कहता हूँ, जिसने आशा चुन ली, वह कभी हारता नहीं। संभव है उनके लिए सफलता की राह लंबी हो, उसे पाने में थोड़ा समय लगे, लेकिन उन लोगों को मंज़िल मिलती जरूर है।


सहमत ना हों तो इतिहास उठा कर देख लीजियेगा, जीतने वाले में आपको वही लोग मिलेंगे, जिनके भीतर आशा थी। इन सभी जीतने वाले लोगों में एक बात और समान थी, ये सभों लोग किसी भी क्षेत्र में परफेक्ट नहीं थे। लेकिन वे सब आशावान ज़रूर थे। उदाहरण के लिए आप अब्राहम लिंकन को ही ले लीजिए। उन्होंने अपने जीवन में दर्जनों असफलताएँ झेलीं थी। एडिसन बल्ब बनाने के प्रयास में हज़ार से अधिक बार असफल हुए थे। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के साथ भी ऐसा ही हुआ था। वे भी कई बार रिजेक्ट हुए। पर इनमें से किसी ने भी हार नहीं मानी थी क्योंकि वे सभी जानते थे कि हार अंत नहीं, सिर्फ़ दिशा बदलने का संकेत है और इस संकेत को पहचानकर इंसान, अगर चाहे तो अपने जीवन को बदल सकता है।


याद रखियेगा दोस्तों, कठिन समय आपका दुश्मन नहीं, आपका गुरु होता है। इसलिए इस स्वीकारोक्ति के भाव के साथ जीवन जिएँ कि कठिनाइयाँ आपको रोकने नहीं आतीं, वे तो आपको तैयार करने आती हैं— वह भी उस सफलता के लिए, जिसके असली हकदार आप है या जिसके लिए ईश्वर ने आपको इस जहाँ में भेजा है याने सफलता का वह मुकाम, जिसे सम्भालना आसान नहीं है। सफलता के उस मुकाम को पाने के लिए बस याद रखें, आप जितना संघर्ष करते हैं, उतना ही मजबूत बनते जाते हैं। इस राह में आप गिरते सिर्फ़ इसलिए हैं, ताकि उठना सीख सकें। आप टूटते सिर्फ़ इसलिए हैं, ताकि एक बेहतर रूप में जुड़ सकें और आप हारते सिर्फ़ इसलिए हैं, ताकि जीत की कीमत समझ सकें।


याद रखियेगा दोस्तों, जीवन एक ही बात सिखाता है, हालात से बड़ा वह इंसान होता है, जिसने आशा को थाम रखा हो। हो सकता है आज का दिन मुश्किल और चुनौती भरा हो, लेकिन कल का सूरज आपके लिए एक नई कहानी लेकर आएगा क्योंकि अँधेरा चाहे कितना भी गहरा हो, आशा की एक चिंगारी पूरी दुनिया को रोशन कर सकती है और वह चिंगारी पहले से ही आपके भीतर है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

Comments


bottom of page