• Nirmal Bhatnagar

उम्मीद को जिंदा रखें और आगे बढ़ें…

Oct 18, 2022

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, आज के युग में तनाव और दबाव हमारी जीवनशैली का हिस्सा बन गए हैं। इसकी मुख्य वजह तेज़ी से बदलती इस दुनिया में खुद को रेस में बनाए रखना है। लेकिन कई बार यही तनाव या दबाव इतना अधिक हो जाता है कि हमें ऐसा लगने लगता है जैसे सारी दुनिया ही हमें नीचे गिराने या नीचा दिखाने के लिए कार्य कर रही है। ऐसी स्थिति में हमारे द्वारा जीवन को सार्थक बनाने की दिशा में किए जा रहे अनगिनत प्रयासों को नकार दिया जाता है। ऐसी स्थिति में दोस्तों, कभी भी हार ना मानें, निराश ना हों, बस एक बाद याद रखें घनी काली रात के बाद ही सूरज उगता है।


जी हाँ साथियों, सुनहरे भविष्य के लिए आशावान रहना आपको हताशा भरे नकारात्मक भावों को डील करने में मदद करेगा। ऐसी स्थिति में अपने उत्साह को बढ़ाने के लिए आप सकारात्मक और ऊर्जा बढ़ाने वाले सेल्फ़ अफ़रमेशंस भी बोल सकते हैं। हो सकता है इस वक्त मेरी बात को सुन आपको लग रहा होगा, ‘सर, आपके लिए कहना बड़ा आसान है। अगर ऐसी स्थितियों का सामना आपको करना पढ़ता तो पता चलता। आपको क्या लगता है हमने कोशिश नहीं करी होगी?’ तो आगे बढ़ने से पहले साथियों मैं आपको बता दूँ कि इस दुनिया में एक भी सफल इंसान नहीं होगा जिसने ऐसी विषम परिस्थितियों का सामना ना किया हो। मैं स्वयं भी अपने कार्यों में कई बार असफल हुआ हूँ, विपरीत परिस्थितियों के जाल में फँसा हूँ। लेकिन हर बार मैंने स्वयं को एक ही बात समझाई है, ‘तेरा प्रयास असफल हुआ है, तू नहीं!’


असल में दोस्तों, हर इंसान अपने जीवन को सुंदर बनाने की हर सम्भव कोशिश करता है लेकिन अक्सर आशातीत परिणाम ना मिल पाना उसे भ्रमित कर देता है। समय से पहले या जल्दबाज़ी में असफलता या हार के रूप में निष्कर्ष निकालना हमारी सकारात्मक आशाओं पर पानी फेर देता है। ऐसी स्थितियों में हमेशा याद रखिएगा, ग़ैर-लाभकारी या आशातीत परिणाम ना मिलना हार या असफलता की निशानी नहीं है, आशा के विपरीत मिले परिणाम तो बस यह बताते हैं कि आपके द्वारा किया गया प्रयास आपको अपने लक्ष्य की ओर नहीं ले जा रहा है। ऐसे स्थिति में किए जा रहे प्रयासों की दिशा बदलते ही पहले परिणाम और फिर हमारी दशा बदल जाएगी।


हो सकता है आपमें से कुछ लोग सोच रहे होंगे, ‘यह सब तो ठीक है, बस आप यह बताइए इसे किया कैसे जाए?’ तो चलिए साथियों, आज हम विपरीत परिस्थितियों में अपने अंदर आस जगाकर, मनचाहे परिणामों अर्थात् सफलता की ओर ले जाने वाले तीन साधारण से सूत्र सीखते हैं-


पहला सूत्र - मन को सकारात्मक बनाएँ

नकारात्मक परिणामों या परिस्थितियों के बीच खुद को अपनी पुरानी सफलताएँ याद दिलाना, उनके बारे में सोचना तत्काल अपने अंदर आशा जगाकर, ऊर्जावान बनाता है और अगर आपको ऐसा लगता है कि आपने अभी तक कोई सफलता अर्जित नहीं करी है तो याद रखिएगा यह दुनिया अभी ख़त्म नहीं हुई है। आप अभी एक बार ओर प्रयास कर सकते हैं, नई शुरुआत कभी भी, कहीं से भी की जा सकती है। मन को सकारात्मक बनाने के लिए आप अपनी सामान्य सोच कि ‘मैं तो असफल हो गया हूँ।’ या ‘लोग मुझे समझ नहीं पाते हैं।’ कि बजाए आईने के सामने खड़े होकर स्वयं से पूछें कि, ‘अपने सपनों को सच बनाने के लिए क्या मैं एक ओर प्रयास नहीं करना चाहूँगा?’

दूसरा सूत्र - खुद से बात करें

याद रखें दोस्तों, इस दुनिया में एक इंसान ऐसा है जो आपको कभी धोखा नहीं दे सकता है, वह हर पल, हर हाल में आपके साथ रहता है। उससे ना मिलना या उसे नज़रंदाज़ करना हमारी सबसे बड़ी भूल हो सकती है। उस इंसान से मिलने के लिए खुद को खुद की याद दिलाएँ। खुद से एक मीटिंग करें और एक नया मूल्यवान, अद्वितीय एजेंडा बनाएँ जो आपको अगले स्तर तक ले जा सकता है।

तीसरा सूत्र - सकारात्मक अफ़रमेशंस दोहराएँ

मन के सकारात्मक और आशावान होते ही सकारात्मक अफ़रमेशंस देना एक ज़बरदस्त ऊर्जा बढ़ाने वाला उपाय है। स्वयं से बार -बार कहें, ‘मैं सुंदर हूँ, मैं साधन संपन्न हूँ, मेरे पास क्षमता है, मैं कमजोर नहीं हूँ, मैं इसे जीवन में बना सकता हूँ, मैं विजेता था और हमेशा विजेता रहूँगा, ईश्वर ने मुझे शक्तिशाली बनाया है और मैं हर परिस्थितियों का सामना कर सकता हूँ।’ याद रखिएगा साथियों, ईश्वर आपको विजेता बनाकर, राजा या रानी के रूप में इस दुनिया में लाया था, आप अपने आप में अनोखे, अद्वितीय, उद्देश्यपूर्ण और सुंदर हैं।


दोस्तों, यहाँ सुंदरता का अर्थ शारीरिक सुंदरता से नहीं है। असल में ‘सुंदरता’ का अर्थ बड़ा व्यापक है, ऐसे कई कारक हैं जो सुंदरता को परिभाषित करते हैं। आप दिल और आत्मा से भी सुंदर हैं, खुद को यह याद दिलाएँ और किसी और के द्वारा मदद की आस रखने के स्थान पर खुद के मददगार बनें, खुद को ऊपर उठाएँ। हीन भावना को छोड़कर ऊपर उठें, किसी को अपना मोराल गिराने की छूट ना दें, फिर भले ही वह आपका दोस्त या परिवार का सदस्य ही क्यों ना हो।


अंत में इतना ही कहूँगा, जब तक आपकी साँस चल रही है ईश्वर ने आपके विषय में अंतिम निर्णय नहीं दिया है। किसी व्यक्ति या स्थिति को अपने से बड़ा ना बनने दें। बस हमेशा उम्मीद को जिंदा रखें और आगे बढ़ें।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com

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