क्या आप दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति से मिले हैं?
- Nirmal Bhatnagar

- Jun 24
- 3 min read
June 24, 2025
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, दुनिया जानने से ज्यादा जरूरी है, ख़ुद को जानना क्योंकि अगर आप दूसरों को मिलने और जानने में व्यस्त रहेंगे तो यकीन मानियेगा आप भगवान की बनाई उस अद्भुत कृति से मिलने से वंचित रह जाएँगे, जो इस वक़्त यह लेख पढ़ रही है। जी हाँ दोस्तों, ख़ुद से बात करना, ख़ुद से मुलाक़ात करना और अपने मन की सुनना वाक़ई अन्य किसी को मिलने या जानने से ज़्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके बिना आत्म-जागरूकता याने सेल्फ अवेयरनेस होना संभव नहीं है।
इसलिए जागरूकता याने अवेयरनेस के साथ वर्तमान में रहते हुए जीने की पहली सीढ़ी, ख़ुद को जानना है। याने ख़ुद के भीतर क्या चल रहा है, उसे जानना, समझना और स्वीकार करना ही सेल्फ अवेयरनेस की ओर ले जाता है। ऐसे लोग अपनी क्षमताओं और अपनी कमियों को बखूबी जानते हैं। दूसरे शब्दों में कहूँ तो सेल्फ अवेयर व्यक्ति अपने विचारों, भावनाओं और प्रतिक्रियाओं को बड़े ध्यान से देखता है। उसे इस बात का भी एहसास होता है कि कई बार वो ग़लतियाँ कर जाता है। याने वह कभी-कभी सही निर्णय लेने का मौक़ा चूक जाता है; दूसरों के हाथों का खिलौना बन जाता है; अपनी शक्तियाँ दूसरों को सौंप देता है। कभी-कभी उसका आत्मसम्मान भी डगमगाता है, और वह चीजों को जरूरत से ज्यादा दिल पर ले लेता है। सीधे शब्दों में कहूँ तो जागरूक याने सेल्फ अवेयर इंसान कभी ख़ुद से आँखें नहीं चुराता क्योंकि वह यह जान जाता है कि अगर वह ख़ुद से अजनबी होगा तो उसे दुनिया में कहीं भी सुकून नहीं मिलेगा।
जी हाँ दोस्तों, इस दुनिया का सबसे मजबूत रिश्ता जीवन में ख़ुद से सच्ची मित्रता होना ही है। इसलिए इस दौड़-भाग भरी ज़िंदगी में जब आप अपने कार्यों याने मीटिंग, कॉल्स, ईमेल्स, आदि की सूची याने टू-डू लिस्ट बनायें, तो उसमें ख़ुद से मिलने के लिए भी समय रखें। याद रखियेगा अगर आप ख़ुद के साथ नहीं हैं, ख़ुद से मिल नहीं रहें है, ख़ुद से बातें नहीं कर रहे हैं तो आप इस दुनिया की सबसे अहम डील मिस कर रहे हैं।
इसलिए दोस्तों, आज नहीं अभी, इसी पल से ख़ुद को प्राथमिकता दीजिए। अपने मन को अपनी डायरी में जगह दीजिए, अपने मन से बातें कीजिए, उसकी सुनिए, उसे समझिए। तभी आप पूर्णता के साथ अपने इस जीवन को जी पायेंगे। क्योंकि जब आप अपने विचारों की गुणवत्ता को पहचानने लगते हैं, अपनी भावनाओं की गहराई को समझने लगते हैं, तो धीरे-धीरे आपके भीतर एक स्थिरता, एक स्पष्टता आने लगती है। आप विपरीत परिस्थितियों में परेशान होने या टूटने की जगह अपनी जड़ों को और मज़बूत करने लगेंगे।
इसका अर्थ हुआ आत्म-जागरूकता याने सेल्फ अवेयरनेस के साथ जीना आपको अंदर से मजबूत बनता है, जो अंततः आत्मसम्मान को जन्म देता है और आत्मसम्मान के साथ जीना आपके आत्मविश्वास को बढ़ाता है, फिर ये दुनिया कैसी भी क्यों ना हो। याद रखियेगा दोस्तों, अपने आप से मिलना आत्म-जागरूकता याने सेल्फ अवेयरनेस का पहला कदम है और यह वाक़ई बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि जीवन की यात्रा अभी बाक़ी है।
इसका सीधा-सीधा अर्थ हुआ कि जीवन सुंदर ज़रूर है, लेकिन हमें अभी ख़ुद से किए कई वादे पूरे करने हैं, कई मंजिलों को पाना है, कई सपने अभी हकीकत बनने की राह देख रहे हैं। इसलिए खुद से मिलने का समय निकालिए; अपने भीतर के विचारों को जानिए; आत्म-जागरूकता से आत्मबल को पहचानिए और इस जीवन की यात्रा को सच्चे अर्थों में अर्थपूर्ण बनाइए।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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