• Nirmal Bhatnagar

क्षमा करें, मस्त रहें !!!

July 13, 2022

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, अगर आप अपने जीवन को पूर्णता के साथ जीने की चाह रखते हैं तो आपको उसे घृणा अर्थात् हेट्रेड, क्रोध अर्थात् एंगर और अपराध बोध अर्थात् गिल्ट के भाव से मुक्त रखना होगा। जी हाँ साथियों, उपरोक्त तीनों भावों के साथ जीवन का मज़ा लेना, अपनी क्षमताओं के अनुसार जीवन जीना या खुद को खोज पाना सम्भव नहीं है।


घृणा माहौल में कटुता और क्रोध भर कर आपके अंदर नकारात्मक भाव पैदा करती है। घृणा से अगर समय से ना निपटा जाए तो यह मानसिक रोग का रूप भी धारण कर सकती है। आमतौर पर देखा गया है कि घृणा के भाव का बीज हमारे अंदर ही मौजूद रहता है जो सामान्यतः किसी भी क्षेत्र में अन्य व्यक्ति द्वारा आपकी सोच या मूल्य के अनुसार कार्य ना करने पर जन्म लेता है और इसी वजह से यह दो लोगों के बीच दूरी को बढ़ाता है। ठीक इसी तरह अपेक्षाओं की पूर्ति ना होना क्रोध उत्पन्न करता है तो अपने जीवन मूल्यों के ख़िलाफ़ जाकर कार्य करना आपके अंदर अपराध बोध पैदा करता है।


तीनों ही स्थिति दोस्तों आपकी ऊर्जा को खत्म कर नकारात्मक भाव के साथ जीवन जीने को मजबूर करती है। अगर आप इस नकारात्मक ऊर्जा से बच कर अपना जीवन जीना चाहते हैं तो सबसे पहले घृणा के स्थान पर अपने अंदर प्रेम पैदा करें। इसी तरह क्रोध से बचने के लिए अपेक्षा के स्थान पर स्वीकारोक्ति का भाव पैदा करें और अंत में अपराध बोध से बचने के लिए जीवन को खुद के जीवन मूल्यों के अनुसार जीना सीखें।


अतीत में घटी घटनाओं की वजह से उपजी घृणा, ग़ुस्से और अपराध बोध के भाव से बचने के लिए आपको सबसे पहले माफ़ करना सीखना होगा, जो आसान तो क़तई नहीं होगा। जी हाँ साथियों, अगर आपको लगता है कि अतीत के नकारात्मक अनुभवों की वजह से उपजे उपरोक्त तीनों भाव आपको सकारात्मकता भरा जीवन नहीं जीने दे रहे हैं, तो सबसे पहले माफ़ करना सीखें। वह भी इसलिए नहीं कि आप बहुत महान हो गए हैं, बल्कि इसलिए कि आप अपना जीवन शांति और सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीना चाहते हैं।


दोस्तों, क्षमा या माफ़ करना कोई साधारण सा गुण नहीं है, मेरी नज़र में तो यह प्रमुख मानवीय गुणों में से एक है। शायद इसीलिए कहा गया है, ‘क्षमा वीरस्य भूषणं’ अर्थात् क्षमा करना वीरों का आभूषण है एवं ‘क्षमा वाणीस्य भूषणं’ अर्थात् क्षमा वाणी का भी आभूषण है। सीधे शब्दों में कहूँ तो साथियों किसी की गलती पर सजा देकर या डाँटकर आप अपनी शक्ति या बाहुबल को तो दर्शा सकते हो। लेकिन शक्ति या बाहुबल का यही प्रदर्शन आपके अंदर नकारात्मक भाव पैदा कर, आपकी ऊर्जा कम कर सकता है। इसके विपरीत माफ़ करके आप ना सिर्फ़ सामने वाले का दिल जीत सकते हैं, बल्कि खुद भी शांति के साथ जी सकते हैं।


इसीलिए हमारे शास्त्रों में कहा गया है, ‘बलवान वह नहीं जो किसी को दंड देने का सामर्थ्य रखता है, अपितु बलवान तो वह है जो किसी को क्षमा करने का सामर्थ्य रखता है।’ जी हाँ साथियों, यक़ीन मानिएगा, अगर आप किसी को क्षमा करने का सामर्थ्य रखते हैं तो आप वाक़ई शक्तिशाली सम्पदा के धनी हैं, जो सबका दिल जीतकर, उनका प्रिय बनने में मदद कर सकती है। दूसरों को माफ़ या क्षमा करने का एक और बहुत बड़ा लाभ है, यह आपके जीवन को बेहतर बनाता है, उसे समस्याओं से बचाता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com

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