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  • Writer's pictureNirmal Bhatnagar

खुशहाल जीवन के लिए बढ़ाएँ आपसी प्यार, सहयोग और अपनापन

Sep 30, 2023

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

आइये दोस्तों आज के लेख की शुरुआत एक कहानी से करते हैं। बात कई साल पुरानी है रामपुर के राजा रमेंद्र के राज दरबार में एक बहुत ही बुद्धिमान मंत्री था। एक दिन राजा रमेंद्र ने अपने मंत्री से प्रश्न किया, ‘मंत्री जी, एक बात बताइए, भेड़ों की जन्म दर के मुक़ाबले कुत्तों की जन्म दर बहुत अधिक है। अर्थात् कुत्तों की संख्या भेड़ों के मुक़ाबले बहुत अधिक होने के बाद भी हमें कुत्ते एक-दो या चार के झुंड में कहीं-कहीं नज़र आते हैं। लेकिन भेड़ों के तो झुंड के झुंड देखने में नज़र आते हैं। इसका क्या कारण है?’


मंत्री मुस्कुराते हुए बोले, ‘महाराज, आज रात एक कमरे में २०-२५ कुत्ते और दूसरे कमरे में २०-२५ भेड़ बंद करवा के रख दें, मैं कल उनसे पूछकर आपके इस प्रश्न का जवाब दूँगा और हाँ उन्हें समय पर खाना मिल जाये इसलिए कुत्तों के कमरे के बीच में आप रोटियाँ और भेड़ों के कमरे के बीच में आप थोड़ा हरा चारा रखवा दीजियेगा।’ इतना कहकर मंत्री जी ने राजा को प्रणाम किया और उनसे आज्ञा लेकर अपने घर चले गये।


अगले दिन तय समय पर मंत्री जी राजा के पास पहुँचे और पहले कुत्तों के कमरे में चलने का निवेदन किया, जिससे महाराज के प्रश्न का जवाब खोजा जा सके। वहाँ पहुँचते ही राजा देखते है कि कमरे में मौजूद सभी कुत्ते या तो गंभीर घायल हैं या मारे गये हैं और साथ ही उनको खाने के लिए दी गई रोटियाँ कमरे के बीच में वैसी ही पड़ी है। नजारा देखकर राजा आश्चर्यचकित थे और मंत्री जी मुस्कुराते हुए एकदम चुप।


कुछ पलों बाद मंत्री जी ने राजा से हाथ जोड़कर भेड़ों के कमरे में चलने का निवेदन किया। वहाँ पहुँच कर राजा ने देखा की कुत्तों के एकदम उलट सभी भेड़ें कमरे में रखे हरे चारे को खाकर एक दूसरे की गर्दन पर अपना सर रखकर मज़े से सो रही हैं। राजा एकदम हैरान थे, उन्होंने मंत्री जी की ओर देखते हुए कहा, ‘मंत्री जी, हम दोनों का व्यवहार देखकर एकदम हैरान हैं। लेकिन हमारा प्रश्न अभी तक वहीं है, भेड़ों के कई झुंड देखने में आते हैं और कुत्ते एकाध ही नज़र आते हैं जबकि संख्या में कुत्ते ज़्यादा होने चाहिये।’


मंत्री जी मुस्कुराते हुए बोले, ‘महाराज, कुत्ते आपस में रोटी के लिए लड़कर मर गये। जबकि भेड़ों ने मिल- जुलकर प्रेम के साथ हरा चारा खाया और एक दूसरे के गले लगकर सो गई। दूसरे शब्दों में कहूँ तो रोटी पहले मुझे मिलना चाहिये के लालच में सभी कुत्ते आपस में लड़ मरे और हमारा कोई साथी भूखा ना रह जाये, इस भाव के साथ, भेड़ों ने मिल बाँटकर प्यार से भोजन कर लिया और एक-दूसरे के गले में सर डालकर सो गई। यही कारण है जिसकी वजह से भेड़ों के वंश में वृद्धि और समृद्धि है और रही बात कुत्तों की तो आप ही बताइए जिनमें एक-दूसरे से घृणा और द्वेष होगा; जो आपस में ही ख़ुद को श्रेष्ठ सिद्ध करने का प्रयास करेगा उसकी वृद्धि भला कैसे हो सकती है?


दोस्तों कहानी है तो बड़ी साधारण सी, जिसमें मंत्री ने बड़े साधारण से भाव के साथ जीवन को बेहतर बनाने वाली एक बड़ी ही गंभीर बात कह दी है। आप स्वयं सोच कर देखिए जिस परिवार, कंपनी अथवा समूह में आपसी प्यार, आपसी सहयोग, एक दूसरे का ध्यान रखने की प्रवृति और अपनापन के स्थान पर घृणा, द्वेष और अनावश्यक प्रतियोगिता का भाव होगा वह अपने जीवन में खुश, प्रसन्न और शांत रहकर आगे कैसे बढ़ेगा? जी हाँ साथियों, अगर आप वाक़ई खुशहाल, आनंदमय और शांत जीवन जीना चाहते हैं तो अपने आसपास मौजूद लोगों के बीच में समभाव लाने का प्रयास करें अर्थात् जिस तरह का जीवन आप अपने लिए चाहते हैं, ठीक वैसा ही जीवन आप अपने परिवार, अपनी टीम और अपने आसपास मौजूद लोगों को जीने में मदद करें। अन्यथा खुशहाल, आनंदमय और शांत जीवन जीने का आपका सपना अधूरा ही रहेगा।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com

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