• Nirmal Bhatnagar

खुश, संतुष्ट और सुखी रहना है तो तुलना से बचें !!!

Sep 19, 2022

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, हर चीज़ में कमी देखना भी एक आदत है और जो है, उसे परिपूर्ण मानना भी एक आदत है। कुछ लोग, जो भी उन्हें मिलता है उसमें अपनी ख़ुशी खोज लेते हैं तो वहीं कुछ लोग, कुछ भी क्यूँ ना मिल जाए, असंतुष्ट ही रहते हैं। दोस्तों, अगर आपके जीवन की प्राथमिकता खुश रहते हुए जीवन जीना है या इस जीवन का सच्चा सुख भोगना है तो आपको सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने नज़रिए को परिवर्तित करना होगा और अपने अंदर इस भाव को जगाना होगा कि सुखी और खुशहाल जीवन के लिए जो भी आवश्यक था, वह हमें ईश्वर ने पहले से ही देकर इस दुनिया में भेजा है। जी हाँ दोस्तों, ‘जो प्राप्त है, पर्याप्त है!’ अर्थात् संतुष्टि का भाव ही सुखी और खुशहाल जीवन की कुंजी है। आईए, इसे मैं आपको एक कहानी से समझाने का प्रयत्न करता हूँ-


कांजिपूर के जंगलों में रहने वाला कालू कौवा वैसे तो अपने जीवन से बहुत संतुष्ट था, इसीलिए खुश और मस्त रहा करता था। एक बार झील पर पानी पीते वक्त उजले सफ़ेद हंस को देख, उसने खुद की तुलना हंस से करना शुरू कर दी और अशांत व परेशान रहने लगा। एक दिन कालू कौवे ने इस विषय में हंस से बात करते हुए कहा, ‘हंस भाई!, तुम कितने सौभाग्यशाली हो जो ईश्वर ने तुम्हें इतना सफ़ेद और सुंदर बनाया है। मुझे देखो, मैं कितना काला और बदसूरत हूँ। तुम अवश्य इस दुनिया के सबसे खुश और सुंदर पक्षी होगे।’ कौवे की बात सुन हंस मुस्कुराया और बोला, ‘पहले मैं भी यही मानता था और इसीलिए खुश और मस्त रहा करता था। लेकिन एक बार मैंने सामने पेड़ पर तोते को देख लिया। उसका शरीर दो बड़े सुर्ख़ और सुंदर रंगों की अनोखी छटा से सजा था। उसे देखने के बाद, मैं अपनी नज़रें उस पर से हटा ही नहीं पा रहा था।’ हंस की बात सुन कालू कौवे ने तोते से मिलने का निर्णय लिया।


तोते को देखते ही कौवे को एहसास हुआ कि हंस भाई बिलकुल सही बोल रहे थे। कालू कौवे ने तुरंत तोते से अभी तक की पूरी बात कह दी। तोता थोड़ा सा दुखी होते हुए बोला, ‘मैं भी तुम दोनों के समान ख़ुशी-ख़ुशी जीवन जी रहा था। लेकिन एक दिन मैंने नाचते हुए मोर को देख लिया। बस उस दिन मेरा भ्रम टूट गया और मैं दुखी रहने लगा। मुझे तो अब एकदम दृढ़ विश्वास है कि मोर से सुंदर तो कोई और हो ही नहीं सकता, इसलिए शायद वही इस दुनिया का सबसे खुशहाल और सुखी जीवन जीने वाला पक्षी है।’


सबकी बातें सुन अब कालू कौवा हैरान था, उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि आख़िर अब किया क्या जाए। कोई और उपाय ना देख उसने मोर से मिलने का निर्णय लिया। मोर के पास पहुँच कौवे ने पहले की सारी बात बताते हुए कहा, ‘मोर भाई, तुम वाक़ई पक्षियों में सबसे सुंदर और सौभाग्यशाली हो। इसीलिए प्रतिदिन लोग तुम्हें देखने के लिए आते हैं और मुझे तो अपने पास फटकने भी नहीं देते। तुम ही इस दुनिया के सबसे सुंदर और सुखी पक्षी हो ना?’


कौवे की बात सुनते ही मोर उदास हो गया और बोला, ‘मित्र, मुझे भी कुछ साल पहले तक यही लगता था। मैं तो स्वयं को इस दुनिया का ही नहीं, बल्कि ब्रम्हाण्ड का सबसे सुंदर पक्षी मानता था, इसलिए खुश भी रहता था। लेकिन अब मुझे कई बार लगता है, मेरी सुंदरता ही मेरी शत्रु बन गई है। कभी कोई मुझे चिड़ियाघर ले जाना चाहता है, तो कोई पालतू बनाने के लिए पिंजरे में रखना चाहता है, तो कोई मेरा शिकार करने का प्रयास करता है। मेरी बिरादरी के सभी लोगों को तो हर पल चौकन्ना रहना पड़ता है। अपने जीवन के अभी तक के अनुभव में तो मैं इस नतीजे पर पहुँचा हूँ कि सबसे सुरक्षित पक्षी कौवा ही है क्यूँकि मैंने उसे कभी किसी पिंजरे में क़ैद नहीं देखा, ना ही कभी कोई उसका शिकार करने का प्रयास करता है। इसलिए मैं कुछ दिनों से सोचने लगा हूँ कि काश मैं कौवा होता तो कम से कम अपना जीवन स्वतंत्रता के साथ तो जी पाता, मुझे रोज़-रोज़ की व्यर्थ चिंता तो नहीं होती और मैं इस दुनिया का सबसे खुश व सुखी पक्षी होता।’ मोर की बात सुन कौवे को अपने जीवन की असली क़ीमत का एहसास हो गया और वह मोर का शुक्रिया अदा कर वहाँ से चला गया।


जिस तरह दोस्तों, कालू कौवा अपनी उपयोगिता या क्षमता नहीं पहचान पाया था, ठीक उसी तरह अक्सर हम भी दूसरों से तुलना के चक्कर में खुद को पहचान नहीं पाते हैं। याद रखिएगा दोस्तों, 84 लाख योनियों में सबसे समझदार, सबसे बेहतर, सबसे शक्तिशाली मनुष्य को माना गया है। अर्थात् इस सृष्टि में ईश्वर ने हमें सबसे बेहतर बनाया है। बस हम सब इंसानों में अंतर इतना सा है कि कोई अपनी शक्तियों को पहचान कर या जो उसके पास है उसकी क़ीमत, उसकी क्षमता को जानकर अपने जीवन को पूर्णता के स्तर तक जीने लगता है और खुश व सुखी रहने लगता है। तो वहीं कुछ लोग दूसरों से तुलना के चक्कर में खुद के अंदर कभी झांक ही नहीं पाते हैं और सारा जीवन दुखी रहते हुए बिताते हैं। याद रखिएगा दोस्तों, अगर खुश और सुखी रहना है तो दूसरों से तुलना कर, हमारे पास क्या नहीं है देखने या खोजने में समय बर्बाद न करें। अपितु ईश्वर ने जो दिया है उसका पूर्ण उपयोग करें और खुश व मस्त रहें।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com

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