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  • Writer's pictureNirmal Bhatnagar

खोखला आदर्शवाद…

Feb 4, 2023

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, खोखला आदर्शवाद आपको महान नहीं बना सकता है। मेरा मानना है कि आप किसी भी क्षेत्र में, फिर चाहे वह सही हो या गलत, श्रेष्ठ तब बनते है जब आप किसी भी विचार पर अपनी आस्था 100 प्रतिशत रखते हैं। उदाहरण के लिए अक्सर आपने देखा होगा हम दूसरों को बताने या समझाने के लिए अक्सर कहते हैं, ‘जो होता है अच्छे के लिए होता है!’ लेकिन जब कोई विपत्ति, विपरीत परिस्थिति या चुनौती हमारे खुद के सामने आ जाती है तो हमारे विचार बदल जाते हैं और हम सोचने या कहने लगते हैं, ‘ऐसा हमेशा हमारे साथ ही क्यों होता है?’


हम सभी के लिए आदर्शवादी बातें करना तो बहुत आसान होता है, लेकिन उन्हीं बातों को जीवन में अपनाना मुश्किल। ठीक इसी तरह आपको धर्म एवं आध्यात्म की आदर्श बातें करते तो बहुत मिलेंगे, लेकिन जब इस विषय में परीक्षा की घड़ी आती है तो वे इधर -उधर छिप कर, तर्कों पर आधारित बातों का सहारा लेकर, बचते नज़र आते हैं। इन लोगों को देखने पर लगता है जैसे इनकी आस्था अपनी कही बातों पर ही नहीं है।


वैसे यह बातें सिर्फ़ धर्म, आध्यात्म, आदर्श जीवन आदि के क्षेत्र में ही काम नहीं करती है, अपितु अपने पूरे जीवन में आप जितनी भूमिकाएँ निभाते हैं, सभी में काम आती हैं। उदाहरण के लिए, आप अपने बचपन के दिनों या विद्यालय में पढ़ने वाले किसी बच्चे को याद करके देख लीजिए। आप पाएँगे कि पढ़ाई के विषय में चर्चा करने पर वे सालभर यही कहेंगे कि पढ़ाई अच्छी चल रही है, लेकिन परीक्षा का समय नज़दीक आते-आते या परीक्षा के दिनों में उनका यह भाव बदला नज़र आएगा। असल में परीक्षा को लेकर उनके आत्मविश्वास में आई कमी की मुख्य वजह सामान्य दिनों में पढ़ाई के दौरान आस्था और समर्पण में कमी होना था।


असल में दोस्तों, सामान्य काल में तो दम्भी, ईर्ष्यालु, झूटे, मक्कार लोग भी बड़ी-बड़ी जीवन मूल्यों पर आधारित बातें करते नज़र आ जाएँगे, पर जब वे अपने जीवन में असामान्य स्थितियों का सामना करते हैं तब उनकी असली सच्चाई नज़र आती है। ऐसे लोग आपको तात्कालिक या दूर से देखने पर सफल नज़र आ सकते हैं लेकिन अक्सर हक़ीक़त इसके बिलकुल विपरीत होती है। याद रखिएगा ख़ुशी, शांति और सफलता वैसे तो बड़े साधारण कार्यों को कर पायी जा सकती है। लेकिन अक्सर बड़ी-बड़ी बातों के पीछे भागने की अपनी आदत के कारण लोग इन साधारण कार्यों को कर नहीं पाते हैं। इसीलिए ख़ुशी, शांति और सफलता को बड़ा कार्य माना जाता है और बड़ा या विशेष कार्य सामान्य शक्ति से पूर्ण करना सम्भव नहीं है। इसलिए साथियों अगर आप कुछ बड़ा कुछ नया करना चाहते हैं तो आपको कठिन परिस्थितियों में अपनी प्रामाणिकता का परिचय देते हुए आगे बढ़ना होगा अर्थात् विषम परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा।


याद रखिएगा दोस्तों, धर्म, ईश्वर, जीवन मूल्य पर आस्था रखने वाला इंसान ही निजी जीवन में सदाचारी और सामाजिक जीवन में दूसरों की मदद करने वाला बन सकता है। इसलिए असली सफलता धन-दौलत कमा कर अमीर बनने में नहीं है। इसी तरह हर पल भगवान का नाम जपना या माला घुमाना ईश्वर का भजन करना नहीं है। असली सफलता तो विपरीत से विपरीत या विषम से विषम परिस्थितियों में भी अपनी आस्था पर अडिग रहते हुए खुश रहने में है। अगर आप ऐसा कर पाते हैं तो ही आप अपनी दुनिया को अधिक सुंदर, अधिक व्यवस्थित, अधिक विकसित बना सकते हैं। मेरी नज़र में तो इस दिशा में किया हुआ त्याग, बलिदान ही किसी व्यक्ति के प्रबुद्ध, जागृत, आदर्शवादी, ईश्वर भक्त एवं धर्मात्मा होने का चिन्ह हो सकता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

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