ख़ुद को जानें और अपनी खासियत पहचानें…
- Nirmal Bhatnagar

- May 31, 2025
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May 31, 2025
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, हम सभी लोग कभी ना कभी तुलना के कुचक्र में फँस ही जाते हैं और ख़ुद को दूसरों से कमतर आंकने लगते हैं। तुलना का यह कुचक्र हमें सोचने को मजबूर करता है कि हमारे पास वो चीजें नहीं है, जो दूसरों के पास है। यही सोच बीतते समय के साथ हमारे आत्मविश्वास को कमजोर करने लगती है। अगर दोस्तों, आप कभी भी ख़ुद को इस स्थिति में फँसा हुआ पाएँ तो सबसे पहले ख़ुद को याद दिलायें कि अरबों साल पहले इस ब्रह्मांड को बनाने के बाद, तमाम आकाशगंगाओं के निर्माण के बाद, करोड़ों साल पहले इस धरती पर जीवन देने के बाद भी ईश्वर को इस धरती पर कुछ कमी लग रही थी और इसलिए ही कुछ पच्चीस-पचास साल पहले उसने आपको इस धरती पर भेजा था।
उक्त विचार आपको याद दिलायेगा कि इस दुनिया में किसी भी जीव का जन्म बेवजह नहीं हुआ है। ईश्वर ने हर जीव को इस धरती पर किसी विशेष उद्देश्य से भेजा है। अर्थात् हर किसी जीव की एक अनोखी भूमिका होती है; उसके जीवन का कम से कम एक उद्देश्य ऐसा होता है, जिसे केवल वही निभा सकता है। इसी बात को हम कैसोवैरी चिड़िया की कहानी से भी समझ सकते हैं।
कई साल पहले की बात है, चिड़ियों का एक समूह कैसोवैरी चिड़िया को चिढ़ाते हुए बोला, “तुम कैसी अजीब सी चिड़िया हो जो उड़ भी नहीं सकती? तुम्हारी इस अक्षमता के कारण हम सब चिड़ियाओं का नाम ख़राब होता है।” इस तरह के तमाम तानों और मजाक को सुन-सुन कर कैसोवैरी चिड़िया को लगने लगा था कि वह बेकार है और उसका जीवन पूरी तरह व्यर्थ है। एक दिन इसी बात से परेशान होकर कैसोवैरी चिड़िया ने जंगल छोड़ने का निर्णय लिया और बहुत दुखी मन से वहाँ से चल दी।
अभी वह कुछ ही कदम चली थी कि पीछे से आई एक पेड़ की आवाज ने उसकी आँखें खोल दी। पेड़ ने उस चिड़िया से कहा, “कैसोवैरी तुम्हारी वजह से ही आज यह जंगल इतना हराभरा है। तुम्हारा अपनी मजबूत चोंच से फलों को तोड़कर खाना ही बीजों को पूरे जंगल में फैलाता है और जंगल को हराभरा बनाता है।” अंत में वह पेड़ बड़े गंभीर स्वर में बोला, “कैसोवैरी, बाक़ी चिड़िया भले ही पूरे आसमान की शोभा बढ़ाती है, लेकिन तुम अकेली चिड़िया हो जो इस धरती को जीवन देती है।”
पेड़ की बात सुन कैसोवैरी चिड़िया को पहली बार अपनी विशेषताओं का आभास हुआ और उसे लगा कि उसका इस धरती पर होना मायने रखता है। अब वह मान चुकी थी कि भगवान ने उसे जैसे बनाया है, वह उसी रूप में विशेष है। दोस्तों, हमारे जीवन में भी कई बार ऐसा ही होता है, जब हम दूसरों से की गई तुलनाओं की वजह से ख़ुद को कमज़ोर आँकने लगते हैं। जैसे, किसी के अधिक पैसा कमाने पर, किसे के अधिक सुंदर होने पर, किसी की प्रसिद्धि को देखकर, हमें लगता है कि हमारे जीवन में कुछ कमी है, हम पीछे रह गए है। इस वक्त अक्सर हम भूल जाते हैं कि हमारी अपनी एक खासियत है और हम अपने आप में ही अनूठे और अनोखे हैं।
दोस्तों, इंसान को सच्ची सफलता तब मिलती है जब वह ख़ुद को सही से जान पाता है; पहचान पाता है। जब हम अपने उद्देश्य को समझकर; अपनी खूबियों को पहचानकर जीवन में आगे बढ़ते हैं, तब हम सफल होते हैं। इसलिए, अपनी तुलना दूसरों से मत करो और हमेशा याद रखो कि हर व्यक्ति अनमोल है। जरूरी नहीं है कि आप ताक़तवर या पैसेवाले हों, लेकिन यह संभव है कि आपकी एक मुस्कान किसी का दिन बना दे, आपका एक शब्द किसी को नई राह दिखा दे।
याद रखिएगा, आप व्यर्थ नहीं हैं क्योंकि आप भी इस दुनिया की ज़रूरत हैं। आप इस धरती पर एक खास उद्देश्य के लिए आए हैं। अपने आप पर विश्वास रखिए, खुद को समझिए और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़िए। यही सोच आपके जीवन को सफल और संतुलित बनाएगी।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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