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ख़ुद पर करें विश्वास…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Oct 18, 2024
  • 3 min read

Oct 18, 2024

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, अकसर लोगों को किसी भी कार्य को शुरू करने के लिए पुश की आवश्यकता होती है अर्थात् जब तक उन्हें कोई मोटिवेट नहीं करता है, तब तक वे किसी भी कार्य को शुरू नहीं कर पाते हैं। ऐसे लोग बाहरी दुनिया से मिलने वाली सहायता, प्रेरणा और सहारे पर निर्भर रहते हैं। इन लोगों को आप तरह-तरह के टोने-टोटके, अंधविश्वास और मंदिर में माँगी गई मनौतियों के सहारे बैठा हुआ देख सकते हैं। ऐसे लोगों को अगर उपरोक्त तरीक़ों से मनचाहा परिणाम ना मिले, तो ये निराश होकर; हिम्मत हारकर बैठ जाते हैं। मेरी नज़र में दोस्तों यह स्थिति बहुत ही दुखद, परेशान और चिंता पैदा करने वाली होती है। इस दुख, चिंता और परेशानी की मुख्य वजह मेरी नज़र में क्षमता होने के बाद भी निराशा और परेशानी भरी ज़िंदगी जीना है। दूसरे शब्दों में कहूँ तो ईश्वर ने इन्हें अच्छा जीवन जीने के लिए आवश्यक योग्यता और क्षमता के साथ मौक़ा भी दिया था, लेकिन इन्होंने उसे बाहरी मदद की आस में गँवा दिया।


हो सकता है दोस्तों, आपमें से कुछ लोग मेरी इस बात से सहमत ना हों और आपको लग रहा हो कि मैं ऊपरी तौर पर बात कर रहा हूँ या फिर आपको लग रहा हो कि यह सब कहना बड़ा आसान है, लेकिन करना नहीं। तो मैं आगे बढ़ने से पहले आपको बता दूँ कि अगर मनुष्य ठान ले, तो यह स्थिति एक क्षण में बदल सकती है। बस ऐसे लोगों को बाहरी प्रेरणा के स्थान पर ईश्वर प्रदत्त क्षमताओं पर विश्वास रखते हुए अपने अंदर से प्रेरणा लेना शुरू करना होगा। आप स्वयं सोच कर देखिए, दूसरे लोगों की प्राथमिकता क्या होगी? वे हमारे बारे में सोचेंगे या ख़ुद के? लोग हम में दिलचस्पी क्यों लेंगे? उनके सहारे; उनसे मिलने वाले मोटिवेशन या प्रेरणा के भरोसे बैठना मेरी नज़र में नासमझी और मूर्खता से अधिक कुछ नहीं होगा। इसके स्थान पर अगर हम यह स्वीकार लें कि हमारा आत्मविश्वास और आत्मबल ही हमारी प्रेरणा का मूल आधार है, तो हम अपने अंदर से ही प्रेरणा प्राप्त कर अच्छा और सुखी जीवन जी सकते हैं।


याद रखियेगा दोस्तों, ईश्वर ख़ुद धरती पर उतर कर किसी की मदद नहीं करता, वो तो बस आपके अंदर प्रेरणा पैदा कर आपके आत्मबल को बढ़ाता है। अब अगर आप अपने आत्मबल पर पूर्ण विश्वास रख, धैर्य के साथ जीवन में आगे बढ़ते हैं, तो जीवन में अपने सपनों को हक़ीक़त में बदल लेते हैं। जीवन में आगे बढ़ने के रास्ते आपके लिये अपने आप खुलते जाते हैं। याद रखियेगा, ईश्वर पूजन सामग्री या आपके चढ़ाये पैसों से खुश होकर आपको अपने कंधे पर बैठाकर सफलता तक नहीं ले जाता है। जैसा मैंने पूर्व में कहा, वह तो सिर्फ़ उस इंसान की मदद करता है जो स्वयं पर, अपनी आत्मा और आत्मबल पर विश्वास रख धैर्य के साथ आगे बढ़ता है। मंदिर और अन्य धार्मिक स्थान ईश्वर के व्यापारिक प्रतिष्ठान नहीं हैं जहाँ आप कुछ देकर, मनचाही चीज पा लें।


इसलिए दोस्तों, अगर मनचाहा या सपनों वाला जीवन जीना चाहते हैं तो ‘अहं ब्रह्मास्मि’ याने ‘मैं ही ब्रह्मा हूँ’ के सिद्धांत को आधार मान अपने आत्मबल को सबसे बड़ा देवता मानें और जीवन में आगे बढ़ें। इसके साथ ही प्रतिदिन ख़ुद को बार-बार याद दिलाएँ, ‘मैं बलवान हूँ, दृढ़ संकल्पित हूँ, मुझमें असीम बल है, मुझे अवश्य सफलता मिलेगी।’ ऐसा करना याने सकारात्मक आत्म संकेत देना आपके आत्मबल को जादुई तरीक़े से बढ़ाता है। जीवन में आगे बढ़ते वक़्त याद रखियेगा, जो स्वयं अपने रास्ते पर चलता रहता है, ईश्वर उसकी आत्मा में धैर्य तथा विश्वास का बल भर देते हैं। जब यह बल जागृत होता है तो ईश्वर या परमात्मा आपकी सहायता के लिए उठ खड़े होते हैं। इसलिए दोस्तों, जब भी दुविधा, परेशानी या विपरीत परिस्थितियों में हों, तब सबसे पहले अपनी शक्ति और आत्म−बल पर पूर्ण विश्वास रखते हुए आत्मबल को पुकारें; उसे याद करें। जल्द ही आप पायेंगे कि ख़ुद पर विश्वास करते ही पूरा ब्रह्मांड आपकी मदद करने के लिए आपके साथ आ गया है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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