• Nirmal Bhatnagar

ख़ुशी के लिए सोचने, कहने और करने में रखें सामंजस्य…

July 6, 2022

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, ख़ुशी के बारे में अक्सर कहा जाता है कि यह हमारे अंदर ही होती है और अगर हम बाहरी दुनिया से ज़्यादा प्रभावित होने के स्थान पर इसे खुद के अंदर तलाशना शुरू कर दें तो हर हाल में खुश रहना सम्भव है। लेकिन इस स्थिति को आप सिर्फ़ तब पा सकते हैं जब आप जो सोचते हैं, जो कहते हैं और जो करते हैं, में पूर्ण सामंजस्य हो।


जी हाँ दोस्तों, इस दुनिया में हर महान व्यक्ति सिर्फ़ इसीलिए सफल हो पाया क्योंकि वह प्रत्येक क्षण अपने उद्देश्य के प्रति विचारशील रहते हुए, उसी विषय में बात करते हुए, संकल्प के साथ कर्म में संलग्न रहा। शायद इसी वजह से रेडियो से रिजेक्ट होने के बाद भी एक युवा हार ना मानने के कारण अमिताभ बच्चन के रूप में ख्याति प्राप्त सफल एक्टर बन जाता है और इसी तरह गल्फ़ की तेल कम्पनी में काम करने वाला युवा भारत की सबसे बड़ी कम्पनी रिलायंस खड़ी कर देता है। ठीक इसी तरह गरीब परिवार में जन्में बालक ने सरकारी विद्यालय में पढ़ते हुए सफल होने का सपना देखा और फिर अपनी मेहनत व लगन से इस देश का प्रसिद्ध वैज्ञानिक और बाद में राष्ट्रपति बन गया। जी हाँ मैं मिसाइल मैन डॉक्टर अब्दुल कलाम की बात कर रहा हूँ। ठीक ऐसी ही कहानी श्रीमती द्रौपदी मुर्मू की है जो इस वर्ष होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में सबसे ज़्यादा समर्थन प्राप्त प्रत्याशी हैं। ऐसा नहीं है दोस्तों कि ऐसे उदाहरण हमें सिर्फ़ इतिहास में देखने या सुनने को मिलते हैं। आप आज भी कई स्टार्टअप को इसी तरह सफल होते हुए देख सकते हैं। जैसे फ्लिपकार्ट, पेटीएम, ज़ोमेटो आदि।


उपरोक्त उदाहरणों को अगर आप गहराई से स्टडी करके देखेंगे तो आप पाएँगे कि सबसे पहले इन सभी लोगों ने सफल होने का बड़ा सपना देखा और अपने सपने पर भरोसा किया, उसे हर पल जिया, हमेशा उसी के विषय में बात करी, हमेशा उसे पाने के लिए मेहनत करी और अंततः सफल हुए।


इसीलिए कहता हूँ दोस्तों, अगर हक़ीक़त में सफल होना चाहते हो तो अपने लक्ष्यों के प्रति हमेशा सजग रहो। किसी भी स्थिति में आज किए जाने वाले कार्यों को कल पर मत टालो। कई बार आपको लगेगा कि समय अभी अनुकूल नहीं है, सामने कई चुनौतियाँ भी है, उसके बाद भी कर्म करना बंद मत करो। ऐसा मैं एक विशेष कारण से कह रहा हूँ, अगर आप कर्म करेंगे तो आप के सफल और असफल, दोनों होने की सम्भावना है। लेकिन अगर आप कर्म कर ही नहीं रहे हैं तो निश्चित तौर पर असफलता तय है।


शायद इसीलिए कहा गया है, ‘पुरुषार्थी के पुरुषार्थ के आगे तो भाग्य भी विवश होकर फल देने के लिए बाध्य हो जाता है।’ याद रखिएगा, प्रत्येक बड़ा आदमी कभी एक रोता हुआ बच्चा था और हर महल ज़मीन पर बनने के पहले हवा में बना था। प्रत्येक भव्य इमारत सफ़ेद पेपर पर कभी मात्र एक कल्पना थी। यह मायने नहीं रखता कि आज आप कहाँ हैं ? महत्वपूर्ण यह है कि कल आप कहाँ होना चाहते हैं? भगीरथ तो देवलोक से गंगा जी को ले आये थे जमीन पर। समय व्यर्थ मत गवाओ, अपने प्रयत्न जारी रखो, सफलता बाँह फैलाकर आपका स्वागत करने के लिए तैयार खड़ी है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com

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