छोटी-छोटी आदतें ही हमारी नियति को आकार देती हैं…
- Nirmal Bhatnagar

- Oct 15, 2024
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Oct 15, 2024
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, हर इंसान अपनी आँखों में एक सपना लिए, जीवन रूपी इस यात्रा को तय करता है। अर्थात् वह अपने जीवन की एक हसीन तस्वीर को अपनी आँखों; अपने दिल में बसाकर, उसे हक़ीक़त में बदलने के लिए हर पल प्रयासरत रहता है। लेकिन एक आँकड़ा बताता है कि मात्र 5 प्रतिशत लोग ही अपने सपने को पूरा कर पाते है। अगर आप इन 5 प्रतिशत लोगों से इनकी सफलता का राज पूछेंगे तो ये कहेंगे, ‘सपनों से हक़ीक़त याने सफलता की इस यात्रा को हमने छोटी-छोटी आदतों के कारण पूर्ण किया है।’
जी हाँ दोस्तों, जीवन की यात्रा में, अक्सर छोटी-छोटी आदतें ही हमारी नियति को आकार देती हैं। आपकी दिनचर्या, विचार और क्रियाएँ यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं कि आप कौन हैं और आप क्या हासिल कर सकते हैं। इसके लिए आपको बस ‘माइंडफुल लिविंग’ याने ‘सचेत जीवन’, जीना सीखना होगा क्योंकि सचेत याने माइंडफुल विकल्प ही हमें आशा के अनुरूप महत्वपूर्ण परिणामों को प्राप्त करने में मदद करते हैं। आइए आज हम यह जानने का प्रयास करते हैं कि किस तरह सचेत आदतों को अपनाने से हम ख़ुद को खोजते हुए, सफलतापूर्वक अपना जीवन जी सकते हैं।
पहला सूत्र - आदतें आपको बना सकती हैं, तो आपको मिटा भी सकती हैं
आदतें हमारे दैनिक जीवन की आधारशिला हैं, जो हमें चुपचाप उस जीवन की ओर ले जाती हैं, जिसका हम सपना देखते हैं या फिर जिससे हम डरते हैं। सुबह उठने से सोने जाने तक, हमारी आदतें हमारे दिन की लय तय करती हैं। ऐसे में यह स्वीकार करना अति महत्वपूर्ण है कि जिस तरह आदतें हमें बना सकती हैं, उसी तरह यह हमें मिटा भी सकती हैं। अर्थात् हम अपनी आदतों से ही जीवन में ऊपर उठते हैं या फिर समझौता पूर्ण औसत दर्जे का जीवन जीने के लिए मजबूर होते हैं। इसलिए, माइंडफुल लिविंग याने सचेत रहते हुए वर्तमान में जीना और अपनी अच्छी और बुरी आदतों को पहचानना और उनमें आवश्यकतानुसार बदलाव लाना सफलता की दृष्टि से लाभप्रद रहता है।
दूसरा सूत्र - अपने जीवन को परिभाषित करें
अपने जीवन को परिभाषित कर सेल्फ रिफ्लेक्शन याने आत्म-प्रतिबिंब देखना, ख़ुद को पहचानने की पहली सीढ़ी है। आप यह भी कह सकते हैं कि सेल्फ रिफ्लेक्शन या आत्म-प्रतिबिंब वह दर्पण है, जो हमारे सच्चे स्व को प्रकट करता है। यह हमें अपने अंदर गहराई से झांकने, अपनी अच्छाई और बुराई, अपनी स्ट्रेंथ और वीकनेस, अपने डर और अपनी आकांक्षाओं को पहचान कर, स्वीकार करने में मदद करता है। अगर आप इस शक्तिशाली टूल का लाभ लेकर, सचेत जीवन जीने की यात्रा शुरू करना चाहते हैं तो अपने जीवन को परिभाषित करें। इसके लिए आपको ख़ुद के लिए समय निकालना होगा और ख़ुद से पूछना होगा कि मैं कौन हूँ? मैं कैसा जीवन जीना चाहता हूँ? मेरे लिए क्या मायने रखता है और कौन से मूल्य मुझे प्रिय हैं? कौन सी आदतें मुझे आगे बढ़ाती हैं और कौन सी मुझे पीछे धकेलती हैं? याद रखियेगा, खुद को समझना, बदलाव और विकास को अपनाने की दिशा में पहला कदम है।
तीसरा सूत्र - नुक़सानदायक आदतों को छोड़ें और लाभदायक आदतों को अपनायें
ख़ुद को पहचानने के बाद जीवन में आगे बढ़ने की अगली कड़ी बुरी और नुक़सानदायक आदतों को छोड़ना और अच्छी आदतों को अपनाना है। आइये अब हम आज के युग की कुछ नकारात्मक और सकारात्मक आदतों पर चर्चा कर लेते हैं।
अपनी दिनचर्या से हटाने वाली कुछ नकारात्मक आदतें
1) सोशल मीडिया पर बिना सोचे-समझे स्क्रॉल करना
सोशल मीडिया फीड्स को बिना सोचे-समझे स्क्रॉल करने के अंतहीन चक्र को तोड़ें। उस समय को ज़्यादा उद्देश्यपूर्ण गतिविधियों के लिए आवंटित करें।
2) प्रोकास्टीनेट याने टाल-मटोल करना
उन कार्यों को टालना बंद करें जो आपके विकास के लिए ज़रूरी हैं। उन्हें सीधे निपटाएँ और अपनी उत्पादकता को आसमान छूते हुए देखें।
3) नकारात्मक आत्म-चर्चा याने नेगेटिव सेल्फ टॉक आत्म
आलोचना की जगह आत्म-करुणा को अपनाएँ। अपने साथ दयालुता से पेश आएँ और अपने आत्मविश्वास को खिलते हुए देखें।
अपनी दिनचर्या में शामिल करने के लिए कुछ सकारात्मक आदतें
1) ध्यानपूर्वक सांस लेना
हर दिन कुछ पल अपनी सांस पर ध्यान केंद्रित करने के लिए निकालें। खुद को स्थिर करने और तनाव कम करने के लिए गहरी, जानबूझकर सांस लेने का अभ्यास करें।
2) कृतज्ञता जर्नलिंग
हर दिन तीन ऐसी चीजें लिखकर कृतज्ञता की आदत डालें जिनके लिए आप आभारी हैं। यह सरल कार्य आपके दृष्टिकोण को सकारात्मकता की ओर मोड़ सकता है।
3) नियमित व्यायाम
अपनी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि को शामिल करें। चाहे वह तेज चलना हो, योग सत्र हो या जिम में कसरत, अपने शरीर को हिलाने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों में सुधार होता है।
चौथा सूत्र - 21/90 के नियम को अपनाएँ और सफलता की राह पर आगे बढ़ें
21/90 नियम नई आदतों को मजबूत करने और पुरानी आदतों से मुक्त होने का एक शक्तिशाली साधन है। इस नियम के अनुसार, किसी भी आदत को बनाने या छोड़ने में 21 दिन लगते हैं और इसे जीवनशैली में बदलने में 90 दिन लगते हैं। अर्थात् अगर आप 21 दिनों तक उन बातों या कार्यों को करें, जो आप अपनाना चाहते हैं या उन बातों को सचेत रहते हुए ना करें जिन्हें आप छोड़ना चाहतें हैं, तो आप अपने अंदर इन बातों या कार्यों के लिए नई आदतें विकसित कर सकते हैं और अगर आप इन्हें अगले 90 दिनों तक करते रहें तो आप अपने अंदर स्थायी परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। याद रखें, निरंतरता महत्वपूर्ण है।
पाँचवाँ सूत्र - माइंडफुल लिविंग के माध्यम से सफलता को अपनाना
अगर आपका लक्ष्य मेरे समान माइंडफुल लिविंग के रास्ते सफलता पाना है, तो एक बात हमेशा याद रखें सफलता दो मिनिट नूडल्स नहीं है, यह तो एक मैराथन है। यह रोजाना, जानबूझकर किए गए छोटे कार्यों और चुने गए विकल्पों की परिणति है। हानिकारक आदतों से मुक्त होकर, सार्थक आत्म-चिंतन में संलग्न होकर और सकारात्मक अभ्यासों को अपनाकर, आप खुद को व्यक्तिगत विकास, पूर्ति और सफलता की ओर अग्रसर करते हैं।
यक़ीन मानियेगा दोस्तों, उपरोक्त 5 सूत्र आपको अपने सपनों का जीवन जीने का मौक़ा दे सकते हैं। बस इसके लिए आपको माइंडफुल लिविंग को उद्देश्य, आनंद और प्रामाणिकता से भरपूर जीवन की ओर ले जाना होगा। अपने भविष्य की कल्पना को आकार देने के लिए आदतों की शक्ति को अपनाएँ और आज से ही शुरुआत करें और देखें कि एक-एक करके आपके जीवन में क्या बदलाव आते हैं।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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