• Nirmal Bhatnagar

छोड़े यह 9 आदतें, खुशहाल और खुद के प्रति दयालु रहने के लिए - भाग 2

July 1, 2022

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, आज के युग में बड़े भौतिक लक्ष्यों को एक साथ पाने की चाह में इंसान खुद के प्रति क्रूर हो गया है और इसी वजह से उसके लिए मानसिक शांति को पाना, खुद के लिए समय निकालना, खुश रहना, मुश्किल या असम्भव सा हो गया है। अगर आप वाक़ई खुशहाल जीवन जीना चाहते हैं तो आपको हमारी ख़ुशियों को चुराने वाली निम्न 9 आदतों को तत्काल छोड़ना पड़ेगा-


पहली आदत - ओवरथिंकिग अर्थात् ज़्यादा सोचना बंद करें

किसी भी विषय में अत्यधिक सोचना या ओवरथिंक करना नकारात्मक कल्पनाओं को जन्म देकर समस्याओं या विषय को हक़ीक़त से बड़ा और डरावना बनाकर, आपको जीवन में आगे बढ़ने से रोक सकता है। ओवरथिंकिंग से बचने के लिए आप निम्न 2 कार्य करें -

1) किसी भी कार्य या विषय के लिए निर्णय लेने की समय सीमा निर्धारित करें

छोटे-छोटे कार्यों या विषय, जिन पर तत्काल निर्णय लिया जा सकता है के लिए 30 सेकेंड की समय सीमा तय करें और इसी तरह महत्वपूर्ण या बड़े निर्णय, जिन्हें लेने के लिए आपके पास सभी तथ्य मौजूद हों, के लिए 30 मिनिट की समय सीमा रखें।

2) दैनिक कार्यों की सूची बनाकर रखें

दैनिक कार्यों की सूची और अपने जीवन सूत्रों को बेहद सरल तरीके से बनाकर हमेशा अपनी नज़रों के सामने रखना आपके फ़ोकस को सही जगह बनाए रखकर आपको खुद के प्रति दयालु रहने में मदद करता है।


दूसरी आदत - नकारात्मक विचारों के साथ जीवन जीना बंद करें

हमारे आसपास का माहौल हमारे सोचने के तरीके को प्रभावित कर हमारी ख़ुशी, शांति और मनःस्थिति को प्रभावित करता है। अगर आप नकारात्मक माहौल या विचारों के साथ अधिक समय बिताते हैं तो आप भय, हताशा और शक्तिहीनता के साथ जीवन जीते हैं और अपनी स्वयं की नज़रों में नीचे गिरकर जीवन जीने की सम्भावनाओं को सीमित करते हैं।

नकारात्मकता के प्रमुख स्त्रोत जैसे कोई व्यक्ति, ब्लॉग, न्यूज़ पोर्टल, फ़ोरम, पत्रिकाएँ, सोशल मीडिया चैनल, टीवी शो आदि को पहचानकर उससे दूरी बनाना और इससे मिले अतिरिक्त समय को सकारात्मकता बढ़ाने वाले कार्यों में लगाना आपको ऊर्जावान और आशावान बनाता है।


तीसरी आदत - अतीत और भविष्य में रहना बंद करें

अतीत के सुखद और सफलता भरे अनुभवों के स्थान पर अतीत की असफलताओं या ग़लतियों को बार-बार याद करना या फिर भविष्य की अनिश्चितताओं में जीना आपको नकारात्मकता के साथ 83% समय बिताने को मजबूर करता है। यह हमारे जीवन को तनावग्रस्त, अनिश्चय से भरा और डरावना बनाता है।


इससे बचने के लिए, जीवन को वर्तमान में जीना सीखें। यह आपको अनावश्यक नकारात्मक विचारों से दूर करेगा। साथ ही अपनी छोटी उपलब्धियों पर भी सेलिब्रेट करें। प्रतिदिन ध्यान करना, अपनी आती - जाती साँसों पर फ़ोकस करना, अपने आसपास घट रही हर घटना को अपनी समस्त इंद्रियों के साथ महसूस करना भी आपको वर्तमान में रहकर अपनी सकारात्मकता और ऊर्जा बढ़ाने में मदद करता है।


चौथी आदत - खुशहाल जीवन के लिए बड़े लक्ष्य ना रखें

अच्छी नौकरी अथवा बड़ा व्यवसाय, बड़ा बंगला, बड़ी कार जैसे बड़े लक्ष्यों के साथ अपनी ख़ुशी को जोड़ना अर्थात् ख़ुशी के लिए बड़े बार सेट करना आपको जीवन में कुछ बड़ा, अप्रत्याशित और अद्भुत घटने पर ही खुश रहने का मौक़ा देता है। इसी वजह से जीवन में नकारात्मकता बढ़ जाती है।


इससे बचने के लिए आपको खुद को बार-बार याद दिलाना होगा की खुश रहने के लिए हमें उन दुर्लभ अवसरों की प्रतीक्षा करने की ज़रूरत नहीं है। इसकी शुरुआत आप स्मार्ट फ़ोन की स्क्रीन पर अपने लिए रिमाइंडर रखकर कर सकते हैं। जैसे ‘मेरी ख़ुशी बड़े लक्ष्यों पर नहीं अपितु मेरे विचारों और आंतरिक स्थिति पर निर्भर करती है।’ यह आपको दैनिक जीवन में घटने वाली सामान्य घटनाओं या चीजों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगा। अर्थात् आप वर्तमान में अधिक समय बिताएँगे और बड़े लक्ष्यों के साथ-साथ परिवार के साथ खाना खाना, घूमने जाना, कुछ पल दोस्तों के साथ बिताना, सुहाने मौसम का मज़ा लेना आदि जैसे छोटे लक्ष्यों और घटनाओं के प्रति अधिक आभारी बन पाएँगे। यह आपको दिनभर में खुश रहने के कई मौके देगा।


पाँचवी आदत - तुलना करना बंद करें

सामान्यतः आजकल लोग रिश्ते से लेकर घर तक, साइकिल से लेकर कार तक और स्वास्थ्य से लेकर कैरियर तक, हर चीज़ की तुलना करते हैं। जो अंत में विफलता या असफलता का एहसास बढ़ाकर, आत्मसम्मान को नुक़सान पहुँचाती है। मेरे अनुसार यह 9 आदतें सबसे विनाशकारी या निराशा फैलाने वाली आदत, तुलना करके जीवन जीना ही है।


तुलना करने के स्थान पर अपनी हर छोटी उपलब्धि पर खुद की पीठ थपथपाएँ। जैसे, देखो तुम जीवन में कितना आगे बढ़ गए हो, तुमने अपने लक्ष्य और सपनों की दिशा में कितनी प्रगति करी है, तुम अपने स्वास्थ्य का कितना ध्यान रखते हो, आदि। जीवन में उठाए गए छोटे-छोटे कदमों, उससे मिली सफलताओं को याद करना आपको खुश रहने का मौक़ा देता है। यह बदलाव आपको अधिक ऊर्जावान बनाकर जीवन व उठाए गए कदमों को दयालु और मददगार नज़रिए से देखने का मौक़ा देते है। याद रखिएगा दोस्तों, शक्तिहीन, थका या नकारात्मक भावों से भरे हुए जीवन से आप जो चाहते हैं, वह पाने के लिए प्रयास करते रहना बेहतर है।


छठी आदत - जीवन में अनावश्यक जल्दबाज़ी से बचें

सब कुछ, एक साथ समय से पहले पाने की चाह आपके अंदर अनावश्यक जल्दबाज़ी पैदा करती है जो धीरे-धीरे आपके दैनिक कार्यों में दिखने लगती है। जैसे जल्दबाज़ी में गाड़ी चलाना, तेज़ चलना, किसी भी एक कार्य पर फ़ोकस ना कर पाना या अपने आस-पास घट रही घटनाओं के प्रति भावहीन हो जाना या उन्हें समझ ही ना पाना, आदि। अनावश्यक जल्दबाज़ी आपको तनावग्रस्त बनाती है जिससे आप फ़ोकस्ड नहीं रह पाते हैं और आपके लिए स्पष्ट सोचना मुश्किल हो जाता है।


इसके स्थान पर अपने लिए एक दिन में अधिकतम 3-5 लक्ष्य रखें ताकि आप सामान्य गति के साथ अपने दिन की शुरुआत कर सकें और अपने आस-पास घट रही घटनाओं या स्वाभाविक रूप से अपने वर्तमान में रहते हुए, जीवन जी सकें। याद रखिएगा, जीवन का हर रंग महत्वपूर्ण है उसे महसूस करना हमेशा आनंददायक रहता है।


आज के लिए इतना ही दोस्तों कल हम अगली दो आदतों को पहचानेंगे-


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com

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