• Nirmal Bhatnagar

छोड़े यह 9 आदतें, खुशहाल और खुद के प्रति दयालु रहने के लिए- भाग 3

July 2, 2022

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

कम समय में बहुत अमीर बनने की चाह में इंसान खुद के प्रति क्रूर हो गया है और इसी वजह से वह मानसिक रूप से अशांत, नाखुश और अति व्यस्त हो गया है। पिछले दो दिनों में हमने इसके लिए ज़िम्मेदार 9 आदतों में से 6 आदतों पर चर्चा की थी। आईए आगे बढ़ने से पहले उन्हें संक्षेप में दोहरा लेते हैं-


पहली आदत - ओवरथिंकिग अर्थात् ज़्यादा सोचना

सामान्यतः अत्यधिक सोचना या ओवरथिंक करना स्थिति को हक़ीक़त से बड़ा और डरावना बनाकर, नकारात्मक कल्पनाओं को जन्म देकर आपको जीवन में आगे बढ़ने से रोकता है। इससे बचने के लिए निम्न 2 कार्य करें -

1) किसी भी कार्य या विषय के लिए निर्णय लेने की समय सीमा निर्धारित करें

2) दैनिक कार्यों की सूची बनाकर रखें


दूसरी आदत - नकारात्मक विचारों के साथ जीवन जीना

अगर आप नकारात्मक माहौल में रहेंगे तो आपके ज़्यादातर विचार नकारात्मक होंगे, जो आपके मन में भय, हताशा और शक्तिहीनता को जन्म देकर; ख़ुशी, शांति और सकारात्मक मनःस्थिति से वंचित कर, आत्मसम्मान को नुक़सान पहुँचाता है। इसीलिए कहते हैं, ‘जैसी संगत, वैसी रंगत।’ इससे बचने के लिए ब्लॉग, न्यूज़ पोर्टल, फ़ोरम, सोशल मीडिया चैनल, टीवी शो आदि जैसे अपने प्रमुख नकारात्मकता के स्त्रोतों को पहचानें, उससे दूरी बनाएँ और बचे हुए समय का सकारात्मक प्रयोग करें।


तीसरी आदत - अतीत और भविष्य में रहना

अतीत की असफलताओं या ग़लतियों को बार-बार याद करना या फिर भविष्य की अनिश्चितताओं में जीना आपको अपनी असीमित क्षमताओं को पहचानने से रोककर, हमारे वर्तमान को तनावग्रस्त, अनिश्चय से भरा और डरावना बनाता है। इससे बचने के लिए वर्तमान में जीना, अपनी छोटी उपलब्धियों का जश्न मनाना सीखें। वर्तमान में रहना सीखने के लिए आप ध्यान करने के साथ अपनी साँसों पर फ़ोकस करें। यह सकारात्मकता और ऊर्जा बढ़ाने में मदद करता है।


चौथी आदत - खुशहाल जीवन के लिए बड़े लक्ष्य रखना

कम समय में अमीर बन सभी भौतिक सुविधाओं जैसे बड़े लक्ष्य रखना आपको कुछ बड़ा, अप्रत्याशित और अद्भुत घटने पर ही खुश रहने का मौक़ा देता है। यह स्थिति हमारे जीवन में नकारात्मकता बढ़ाती है। इससे बचने के लिए आप अपने लिए एक बड़ा लक्ष्य रखने के स्थान पर कम समय में पूरे हो सकने वाले कई लक्ष्यों को रख सकते हैं। इसके साथ ही खुद को बार-बार याद दिलाएँ कि खुशहाल जीवन आपकी पहली प्राथमिकता है। ऐसा करना आपको जीवन में घटने वाली छोटी-छोटी घटनाओं के लिए आभारी बनाएगा और प्रतिदिन खुश रहने के कई मौके देगा।


पाँचवी आदत - तुलना करना

परिवार, रिश्ते, संसाधन, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत चीजों में तुलना करना असफलता के एहसास को बढ़ाकर आत्मसम्मान को नुक़सान पहुँचाता है। याद रखिएगा दोस्तों, शक्तिहीन, थका या नकारात्मक भावों से भरा जीवन जीने से बेहतर आप जो चाहते हैं उसे पाने के लिए प्रयास करते रहे । इसलिए हर बात में तुलना करने के स्थान पर अपनी उपलब्धियों पर जश्न मनाएँ, खुद की पीठ थपथपाएँ। ऐसा करना आपको खुश रहने का मौक़ा देने के साथ-साथ खुद के प्रति दयालुता का नज़रिया रखने में मदद करता है।


छठी आदत - जीवन में अनावश्यक जल्दबाज़ी करना

तुलना करना, सब कुछ एक साथ समय से पहले पाने की चाह रखना, आपके अंदर अनावश्यक जल्दबाज़ी पैदा करता है। इसे आप जल्दबाज़ी में गाड़ी चलाना, तेज़ चलना, आस-पास घट रही घटनाओं पर ध्यान ना दे पाना जैसी आदतों से जोड़कर समझ सकते हैं। अनावश्यक जल्दबाज़ी तनाव पैदाकर स्पष्ट सोचने में बाधा पहुँचाती है। इसके स्थान पर सामान्य गति से जीवन जीने के लिए एक दिन में 3-5 कार्यों को पूर्ण करने का लक्ष्य रखें। याद रखिएगा, जीवन का हर रंग महत्वपूर्ण है उसे महसूस करना हमेशा आनंददायक रहता है इसलिए वर्तमान में जिएँ।


चलिए दोस्तों हम अब अगली 2 आदतों को पहचानते हैं-


सातवीं आदत - सकारात्मक रहने का प्रयास करना

हर पल सकारात्मक रहने के चक्कर में हम अक्सर अपनी भावनाओं को अनदेखा करना शुरू कर देते हैं जो अंततः हमारे अंतर्मन को नुक़सान पहुँचाती है। हर पल सकारात्मक रहने के स्थान पर अपने अंदर उठ रहे भावों को पूरी गहराई के साथ महसूस करें फिर भले ही वह भाव नकारात्मक ही क्यूँ ना हो। अपने भावों को आप डायरी या जर्नल बनाकर लिख भी सकते हैं अथवा अपने दिल के क़रीब किसी व्यक्ति के साथ साझा भी कर सकते हैं। ऐसा करना आपके अंतर्मन को अनावश्यक दबाव से बचाता है।


आठवीं आदत - अनावश्यक चीजों अथवा कार्यों में ऊर्जा लगाना

सामान्यतः लोग जो उनके लिए वास्तविकता में मायने नहीं रखता, पर अपनी अधिकतम ऊर्जा खर्च करते हैं। याद रखिएगा समय और ऊर्जा को बर्बाद करना बहुत आसान है लेकिन इसकी क़ीमत आपको अपनी ख़ुशहाली और शांति, दाँव पर लगाकर चुकानी पड़ती है। इसके स्थान पर आपके लिए वास्तव में क्या मायने रखता है, पर अपना समय और ऊर्जा, तय प्राथमिकताओं के अनुसार लगाना लाभदायक रहता है। सही प्राथमिकताओं के लिए आप स्वयं से पूछें, ‘इस साल मेरे जीवन में शीर्ष 4 सबसे महत्वपूर्ण चीजें क्या हैं?’ इस सवाल का सही जवाब आपके जीवन को सही दिशा दे सकता है। अपने जवाब को एक काग़ज़ पर लिख लें और इस नोट को अपने फ्रिज, बाथरूम के शीशे, पूजा के स्थान जैसी जगह पर लगाएँ और जब भी आपका ध्यान इस ओर जाए, इसे दोहराएँ। इससे आपको हर दिन अपना ध्यान सही स्थान पर लगाने में मदद मिलेगी।


आज के लिए इतना ही दोस्तों कल हम अंतिम आदत को पहचानेंगे-


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com

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