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जब मन में शांति होती है, तभी जीवन में शक्ति होती है…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Jun 6, 2025
  • 2 min read

June 6, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है...

दोस्तों, हम फ्लैट्स, रो हाउस, डुप्लेक्स या बंगलों में नहीं बल्कि अपने मन में रहते हैं। जी हाँ! हकीकत में हमारा असली घर हमारा मन ही है। जब तक वहाँ सुकून और शांति है, तब तक जीवन सुंदर है और अगर मन उलझन से भरा है, तो सब कुछ होते हुए भी जीवन संघर्ष बन जायेगा। यकीन ना हो तो जरा अपने आसपास नजर घुमा कर देख लीजियेगा, आपको महलों में अशांत और झुग्गी-झोपड़ी में खुशहाल लोग रहते मिल जाएँगे।


इसलिए ही तो माना जाता है कि हर हार या जीत, दुख या सुख, अशांति या शांति, उलझना या सुलझना आदि सब कुछ हमारे मन से शुरू होता है। एक बार प्रसिद्ध महिला टेनिस खिलाड़ी मार्टिना नवरातिलोवा से पूछा गया, “इस उम्र में भी आप इतनी फिट और फोकस्ड रहते हुए इतना शानदार प्रदर्शन कैसे कर लेती हैं?” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मेरे शरीर और टेनिस बॉल दोनों को ही नहीं पता है कि मेरी उम्र कितनी है।”


सुनने में मार्टिना की बात साधारण लग सकती है, लेकिन हक़ीक़त में इसमें जीवन की एक बहुत ही गहरी सच्चाई छुपी हुई है। जीवन के हर क्षेत्र में जीत या हार हमारे हमारे विचारों से तय होती है। इसलिए ही तो दोस्तों कहा जाता है, “मन के हारे, हार है और मन के जीते, जीत।” याने अगर आप जीवन में सफल होना चाहते हैं; अपने सपनों को हक़ीक़त में जीना चाहते हैं, तो आपको अपने मन को जीतना होगा। जिससे आप ख़ुद को रोकने से ख़ुद को रोक सकें।


यह तभी संभव हो सकेगा जब आप अपने मन को अनावश्यक नकारात्मक भावों से बचा पायेंगे। आप स्वयं ही सोच कर देखिए अगर मन रूपी घर में गुस्से की गांठें डाली हों; उसमें जीवन के तमाम पछतावों को एक कोने में इकट्ठा करके रखा हुआ हो; जीवन के तमाम राज़ों को उसके नर्म कालीन के नीचे दबा रखा हो, उसके किचन में हर क्षण उम्मीदें उबल रही हों और उस मन रूपी घर में चिंताएँ चारों और बिखरी पड़ी हो; उसमें कोई याने सकारात्मकत ऊर्जा रह सकती है क्या?


याद रखियेगा दोस्तों, हमारा प्रदर्शन, हमारी क्षमता नहीं, बल्कि हमारी आंतरिक शांति तय करती है। दूसरे शब्दों में कहूँ तो क्षमता में से मानसिक रुकावट को घटाने पर जो बचता है, वही हमारा प्रदर्शन होता है। इसलिए दोस्तों अगर आप वाक़ई शांत और संतुष्ट रहते हुए अपने जीवन में सफल होना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने मन रूपी घर की सफ़ाई कीजिए और नकारात्मकता रूपी सारे कचरे को बाहर निकाल फेंकिए क्योंकि बाहर की दुनिया तभी सुंदर लगती है, जब अंदर की दुनिया शांत हो।


इसलिए मैं हमेशा कहता हूँ, “जब मन में शांति होती है, तभी जीवन में शक्ति होती है।” कुछ महान लोग इस सच्चाई को समझते हैं कि मन की स्थिति ही जीवन की गुणवत्ता तय करती है। इसलिए वे सबसे पहले अपने मन को व्यवस्थित करते हैं। दोस्तों अगर आप भी अपने जीवन में ऊँचाइयों को छूना चाहते है तो सबसे पहले इस बात को स्वीकार लें कि शांति ही वो चाबी है, जो बंद किस्मत के ताले खोल सकती है। याद रखियेगा हमें इस जीवन को टुकड़ों में नहीं बल्कि पूरी आत्मा और विश्वास के साथ जीना है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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