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जिएँ अवेयरनेस के साथ !!!

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Feb 25
  • 3 min read

Feb 25, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, सुबह उठना, मोबाइल देखना, भागते-दौड़ते खाना और काम पर जाना, तनाव लेना, लौटना, फिर मोबाइल में खो जाना और अंत में फिर सो जाना; क्या यही जीवन है? अगर हाँ, तो दोस्तों मशीन और इंसान में फ़र्क़ ही क्या है? इस विषय में मेरा तो मानना है कि जीवन ऑटो-पायलट मोड पर नहीं, अवेयरनेस के साथ जिया जाता है। याद रखियेगा, जब आप बिना सोचे-समझे जीते हैं, तो परिस्थितियाँ आपको चलाती हैं और जब आप जागरूक होकर याने अवेयरनेस के साथ जीते हैं, तो आप परिस्थितियों को दिशा देते हैं।


दोस्तों, निश्चित तौर पर अब आप सोच रहे होंगे कि जीवन के परिपेक्ष्य में आख़िर अवेयरनेस है क्या? तो मैं आपको बता दूँ कि अवेयरनेस का अर्थ है, अपने विचारों, भावनाओं, शब्दों और कर्मों को पहचानना। अर्थात् अगर आपको पता है कि “मैं अभी गुस्से में हूँ,” तो आप जागरूक हैं। इसके विपरीत अगर आप गुस्से में हैं और आप इसका कारण भी नहीं जानते, तो आप बस प्रतिक्रिया दे रहे हैं याने रिएक्ट कर रहे हैं। दूसरे शब्दों में कहूँ, तो आप ऑटो मोड में जीवन जी रहे हैं। दोस्तों, अवेयरनेस ही प्रतिक्रिया और उत्तरदायित्व के बीच का पुल है।


दोस्तों, जब आप जागरूकता के साथ जीने के स्थान पर ऑटो मोड में जीते हैं तब आपका जीवन जल्दबाज़ी में लिए फैसलों से भरा होता है। जिसके कारण जीवन में अनावश्यक तनाव और पछतावे होते हैं। इसके विपरीत जब जागरूक रहते हुए जीते हैं तब आपका जीवन संतुलित, स्पष्ट और मजबूत होता है। याने जब आप जागरूकता के साथ जीते हैं, तब आप-

1) गुस्सा आने पर रुकते हैं

2) रिश्तों में सुनते हैं

3) पैसे सोच-समझकर खर्च करते हैं, और

4) शरीर के संकेत समझते हैं

यानी जागरूकता आपको मानसिक, भावनात्मक, आर्थिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाती है।


चलिए, इस बात को हम ब्रूस ली के प्रेरक उदाहरण से समझने का प्रयास करते हैं। ब्रूस ली सिर्फ़ मार्शल आर्टिस्ट नहीं थे, वे जागरूकता के साधक थे। उनका सिद्धांत था, “जिस क्षण आप पूरी तरह सचेत होते हैं, वही क्षण आपकी असली शक्ति बन जाता है।” उन्होंने सिर्फ़ अपने शरीर को ही नहीं, मन को भी साधा था। वे हर मूवमेंट से पहले ठहरते, महसूस करते, समझते और फिर एक्शन लेते थे। यही कारण था कि वे लड़ाई में तेज़ नहीं, सटीक थे। उनकी सफलता का रहस्य ताकत नहीं, जागरूकता के साथ, वर्तमान में जीना था।


दोस्तों, अगर आप भी जागरूक रहते हुए जीवन जीना चाहते हैं तो निम्न 5 सूत्रों को अपनाइए -

1) प्रतिदिन सुबह 5 मिनट शांति से बैठें और अपनी साँस पर ध्यान दें


2) प्रतिक्रिया देने से पहले 5 सेकंड रुकें


3) खर्च लिखना शुरू करें


4) बोलने से पहले सोचें - क्या यह सच, जरूरी और प्रेमपूर्ण है?


5) दिन में 3 बार खुद से पूछें, “मैं अभी कैसा महसूस कर रहा हूँ?”

ये छोटे अभ्यास आपके भीतर बड़ी जागरूकता पैदा करेंगे।


दोस्तों, लोग सोचते हैं सफल लोग भाग्यशाली होते हैं। लेकिन हकीकत में सफल लोग सजग होते हैं। वे जानते हैं कि समय और ऊर्जा को कहाँ लगाना है और कब रुकना है। इसलिए सफलता को कौशल याने स्किल और जागरूकता याने अवेयरनेस का जोड़ माना जाता है।


अंत में इतना ही कहूँगा दोस्तों कि भविष्य चिंता और अतीत पछतावा है। लेकिन वर्तमान, असली शक्ति है और इस शक्ति का लाभ वही ले सकता है जो वर्तमान में जागरूकता के साथ जीता है। अगर आप भी जागरूक रहते हुए जीना चाहते हैं तो आज एक संकल्प लें कि मुझे जल्दबाज़ी में नहीं, वर्तमान में मौजूद रहते हुए जीना है। मुझे जीवन में सिर्फ़ भागना नहीं, समझना है। मुझे सिर्फ़ करना नहीं, महसूस करना है क्योंकि अवेयरनेस के बिना जीवन मशीन जैसा है और अवेयरनेस के साथ जीवन शक्ति है। इसलिए दोस्तों, सच में जीना चाहते है, तो जागते हुए जियें।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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