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जिएँ कर्म आधारित जीवन…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Jan 9, 2024
  • 3 min read

Jan 9, 2024

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


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दोस्तों, आपकी सोच आपके जीवन को बना भी सकती है तो मिटा भी सकती है। ऐसा ही एक अनुभव मुझे हाल ही में एक शख़्स से चर्चा के दौरान उस वक़्त हुआ जब वे अस्पताल की ओपीडी में उस डॉक्टर को दिखाने आए, जो मेरे बहुत अच्छे मित्र थे। डॉक्टर मित्र ने उक्त शख़्स को देखते ही पहला प्रश्न किया, ‘वर्मा जी, अब तो आपने ख़ुद का अच्छे से ध्यान रखना शुरू कर दिया होगा?’ डॉक्टर मित्र की बात का जवाब देने के स्थान पर पहले तो वर्मा जी मुस्कुराए और फिर अपनी रिपोर्ट आगे बढ़ाते हुए बोले, ‘आप ही देख कर डिसाइड कर लीजिए।’ मित्र ने उनके हाथ से रिपोर्ट ली और उसे देखते हुए बोले, ‘इसका अर्थ हुआ वर्मा जी आप अभी भी नहीं सुधरें हैं।’ मित्र के इतना कहते ही वर्मा जी ठहाका लगा कर हंसे फिर बोले, ‘सर इन बीमारियों के डर से जीना छोड़ दूँ क्या?’ मित्र उनकी बात पर कुछ प्रतिक्रिया देता उसके पहले ही वे मेरी ओर देखते हुए बोले, ‘आप ही बताइए साहब ज़िंदगी जीने के लिए है या रोने के लिए।’ मैंने मुस्कुराते हुए कहा, ‘निश्चित तौर पर जीने के लिए, इसीलिए डॉक्टर साहब आपके लिये चिंतित हैं।’ मेरी बात पर वे एक बार फिर ज़ोर से हंसे फिर बोले, ‘देखिए साहब, तक़दीर में जो लिखा है वह तो घटेगा ही। अगर मेरी तक़दीर में बीमार होना लिखा होगा तो मैं निश्चित तौर पर बीमार होऊँगा और अगर मज़े से जीते-जीते इस दुनिया से जाना लिखा होगा तो वैसा ही होगा। इन काग़ज़ी रिपोर्टों के चक्कर में मैं अपना आज क्यों बिगाड़ूँ?’ इतना कहकर वे एक बार फिर हंसने लगे।


दोस्तों वे सही थे या नहीं; मैं इसपर तो नहीं जाऊँगा, लेकिन उस वक़्त मैं सोच रहा था कि इस तरह क़िस्मत, भाग्य या तक़दीर के नाम पर निश्चितता के साथ ग़लतियाँ या यूँ कहूँ बेवक़ूफ़ियाँ करना क्या उचित था? शायद नहीं। इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं क़िस्मत, भाग्य या तक़दीर पर विश्वास नहीं करता। यह सब निश्चित तौर पर हमारे जीवन में महत्वपूर्ण रोल निभाते होंगे। संभव तो यह भी है कि हमारा आज का जीवन ईश्वर ने पूर्व जन्मों में किए गए कर्मों के आधार पर पहले से ही लिख रखा हो। लेकिन इसके बाद भी सिर्फ़ भाग्य के भरोसे बैठकर तो जीवन नहीं जिया जा सकता है। सही कहा ना दोस्तों?


अगर आप अभी भी कर्म के महत्व को लेकर दुविधा महसूस कर रहे हैं तो एक बार इसी स्थिति को थोड़ा और आगे तक सोच कर देख लीजियेगा। उदाहरण के लिए, अगर पिछले जन्म में किए गए कर्मों के आधार पर हमें यह जीवन मिला है तो निश्चित तौर पर इस जन्म में किए गए कर्म हमारे अगले जीवन को प्रभावित करेंगे। कहने का अर्थ सिर्फ़ इतना सा है साथियों कि वजह कुछ भी क्यों ना हो, कर्म के महत्व को टाला नहीं जा सकता है। इसीलिए हिंदू धर्म में कर्म को प्रधान माना गया है। इस आधार पर भी कहा जाये तो जो व्यक्ति जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल प्राप्त होता है। अगर आप कर्म प्रधान जीवन शैली अपना लेंगे तो आप निश्चित तौर पर समस्याओं से बचते हुए, जीवन के हर क्षेत्र में सफल होंगे।


दोस्तों, वैसे अगर आप कर्म के विषय में मेरी राय जानना चाहेंगे तो मैं बस इतना ही कहूँगा कि इसे सिर्फ़ भाग्य के विचार से जोड़ कर देखना पूर्णतः ग़लत है। कर्म का सीधा-सीधा जुड़ाव तो बस एक्शन से है। अपनी बात को मैं एक जैन संत द्वारा दिये गये उदाहरण से समझाने का प्रयास करता हूँ। मान लीजिए आपके पूर्व जन्मों के अनुसार आपके भाग्य में कुत्ता बनना लिखा है तो आप निश्चित तौर पर कुत्ते के रूप में जन्म लेंगे। लेकिन आपके कर्म यह तय करेंगे कि आप सड़क पर मारा-मारा फिरने वाला कुत्ता बनेंगे या फिर किसी कार की पिछली सीट पर बैठ कर आरामदायक यात्रा करने वाला। तो आइए दोस्तों, आज नहीं अभी से ही कर्म आधारित जीवन जीना शुरू करते हैं और अपने जीवन को अपने सपनों जैसा सुंदर बनाते हैं।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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