• Nirmal Bhatnagar

जिएँ ज़िंदगी जी भर के !!!

Sep 15, 2022

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, रिश्तों में प्यार या दरार के पीछे मेरी नज़र में शुरुआती कारण कोई बहुत बड़े नहीं होते। अक्सर इसके पीछे की वजह बहुत छोटी होती है। ऊपरी तौर पर अगर आप देखेंगे तो आप पाएँगे कि इसके पीछे की वजह सामान्य अपेक्षाओं का पूरा ना होना है। जैसे खाने में किसी विशेष स्वाद की अपेक्षा रखना और वह स्वाद ना मिलने पर चिड़ना, किसी विशेष दिन विशेष व्यवहार की अपेक्षा करना और उसका पूरा होना या अधूरा रहना, आदि।


लेकिन अगर आप इन अपेक्षाओं के पूरे या अधूरे रहने को ही मुख्य कारण मान रहे हैं तो आप एक बड़ी बड़ी भूल कर रहे हैं क्यूँकि अगर आप अपेक्षा पूरी नहीं करेंगे तो सामने वाला चिड़ेगा, नाराज़ होगा और अगर आप सामने वाले की एक अपेक्षा पूर्ण करेंगे तो वह तत्काल आपसे दूसरी अपेक्षा रखने लगेगा और यह एक अंतहीन सिलसिला होगा। मेरी नज़र में तो साथियों रिश्तों में प्यार और दरार के पीछे सबसे महत्वपूर्ण रोल हमारी मानसिक स्थिति निभाती है।


अपनी बात को मैं आपको एक उदाहरण से समझाने का प्रयास करता हूँ। मान लीजिए आप भोजन करने बैठे हैं और आपके परिवार के सदस्यों द्वारा खाने की थाली परोसकर दी जाती है। इस थाली में दो सब्ज़ी, दाल, चावल, रोटी, पराठा, अचार, सलाद, पापड़ और खीर है। संयोग वश आज दो में से एक सब्ज़ी में खाना बनाते समय नमक डबल पड़ गया है। खाना खाते हुए जैसे ही आप डबल नमक वाली सब्ज़ी खाते हैं, तो आपकी प्रतिक्रिया क्या होगी? निश्चित तौर पर ज़्यादातर लोग मुँह बनाते, चिड़ते हुए बोलेंगे, ‘यह क्या है सब्ज़ी में कोई इतना नमक डालता है क्या?’ या फिर दूसरे शब्दों में ऐसी ही कोई शिकायत होगी। आपके द्वारा शिकायत करते ही सामने वाले व्यक्ति का भी मन दुखेगा क्यूँकि उसने बड़े मन से आपके लिए खाना बनाया था लेकिन एक छोटी सी गलती की वजह से उसकी सारी मेहनत पर पानी फिर गया।


एक थाली जिसमें 10 पकवान या चीज़ें परोसी गई थी, उसमें से खाने की 9 चीज़ें अच्छी होने के बाद भी आपने अपने मन को ख़राब करा और सकारात्मक और नकारात्मक भाव में से नकारात्मक भाव को चुनते हुए अपने व सामने वाले के मूड को ख़राब किया। इसके स्थान पर आप एक ख़राब बने पकवान को नज़रंदाज़ करते हुए 9 अच्छे पकवानों के विषय में बात करते तो सोच कर देखिए आपका व सामने वाले का मूड कैसा होता और उसका प्रभाव आपके रिश्ते पर किस तरह पड़ रहा होता।


सही कह रहा हूँ ना साथियों, इतनी सारी चीजों में से किसी एक चीज़ के ख़राब होने से किसी की सेहत पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। याद रखिएगा साथियों, यह ज़िंदगी अपूर्णता से भरी हुई है। जैसे, अपूर्ण लोग, अपूर्ण सपने, अपूर्ण बातें, अपूर्ण चीज़ें आदि। आपको हर जगह कमियाँ, दोष नज़र आएँगे। ना तो आप, ना ही मैं और ना ही इस दुनिया में कोई और पूर्ण या सर्वश्रेष्ठ हैं, हम सभी साधारण हैं और शायद इसीलिए इंसान हैं। जीवन के इतने सालों के अनुभव में मैंने यही सीखा है कि रिश्तों में प्यार के साथ आप अगर खुश, मस्त, शांत और सुखी रहना चाहते है, तो एक दूसरे को ग़लतियों के साथ ही स्वीकारो। जी हाँ साथियों, जो पसंद नहीं है, उसकी अनदेखी करो और जो पसंद है, उसे चुनो, आपसी सम्बन्धों को सेलिब्रेट करो।


दोस्तों, हमारी यह ज़िंदगी बहुत छोटी है, पता नहीं कब इसकी साँझ ढल जाए। इसलिए इसे दुःख, पछतावे, खेद या अन्य नकारात्मक भावों के बीच खत्म मत करो, बर्बाद मत करो। जो लोग आपसे जुड़े हुए हैं, आपसे प्यार करते हैं, आपका सम्मान करते हैं, आपसे अच्छा व्यवहार करते हैं, उनसे प्यार करो, उनके साथ समय बिताओ, उनकी मदद करो, उनका ध्यान रखो और जो लोग आपसे उपरोक्त व्यवहार नहीं कर रहे हैं उनके लिए दया रखो, सहानुभूति रखो, उनके लिए प्रार्थना करो।


शायद इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए तो किसी ने क्या ख़ूब कहा है, ‘मेरे पास वक्त नहीं उन लोगों से नफरत करने का जो मुझे पसंद नहीं करते, क्योंकि मैं व्यस्त हूँ उन लोगों को प्यार करने में जो मुझे पसंद करते हैं।’ दोस्तों, खुश, मस्त, सुखी और शांत रहना है तो आज से सिर्फ़ एक काम कीजिए, इस ज़िंदगी का आनंद लीजिए, इसका लुत्फ़ उठाइए क्यूँकि यह बहुत छोटी है और इसका अंत निश्चित है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com

7 views0 comments