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  • Writer's pictureNirmal Bhatnagar

जीना हो खुलके तो करें यह…

Jan 11, 2024

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, यक़ीन मानियेगा, इस दुनिया में अगर ईश्वरीय क्षमता किसी के पास है, तो वो या तो आप में हैं या मुझमें। जी हाँ, मेरी नज़र में तो इस सृष्टि में सिर्फ़ इंसान ही है, जिसके पास असीमित क्षमताएँ हैं; सिर्फ़ वही अपनी पसंद के अनुसार पहन सकता है; पसंद अनुसार खा सकता है; पसंदीदा जगह पर, पसंदीदा तरीक़े से रह सकता है, लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि ईश्वर के समकक्ष क्षमता होने के बाद भी इस सृष्टि में अगर कोई सबसे परेशान या दुखी अवस्था में अपना जीवन जीता है, तो वह इंसान ही है। दूसरे शब्दों में कहूँ तो जिसे सबसे ज़्यादा मज़े में रहना चाहिये था, वही बेहाल है। चलिए, एक कहानी के माध्यम से इसके पीछे की मुख्य वजह जानने का प्रयास करते है।


बात कई साल पुरानी है बेहालपुर में रहने वाला एक ग़रीब किसान राजू एक दिन ५ करोड़ की लॉटरी लग जाने की वजह से अचानक ही गाँव का सबसे अमीर इंसान बन गया। शुरू में तो राजू को कुछ समझ ही नहीं आया कि मैं क्या करूँ। फिर उसने अपने मित्रों की सलाह पर पहले तो एक बड़ा घर ख़रीदा, फिर उस घर में सारी सुख-सुविधाएँ जुटाई और अंत में अपने लिए एक बहुत ही महँगी कार ख़रीद कर लाया।


इसके बाद तो राजू की जीवनशैली पूरी तरह बदल गई थी। अब वह रोज़ सुबह तैयार होकर अपनी कार से घूमने निकल ज़ाया करता था। उसे ऐसा करते देख पूरे गाँव वाले हंसा करते थे। अजीब तो राजू को भी लगता था, लेकिन वह सभी को नज़रंदाज़ कर, अपनी मस्ती में मस्त रहा करता था। उसने कभी जानने का प्रयास ही नहीं किया कि आख़िर सब लोग उस पर क्यों हंसा करते हैं। जब भी कोई उससे इस विषय में पूछता तो वह कहता था, ‘मैं अमीर बन गया हूँ ना इसलिए यह सब मुझसे जलते हैं।’

समय ऐसे ही बीतता जा रहा था और राजू की ज़िंदगी मज़े से कट रही थी, समस्या थी तो बस इतनी सी कि ऑडी जैसी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ कार होने के बाद भी उसे गाँव का एक चक्कर लगाने में लगभग पूरा दिन लग ज़ाया करता था। आप अंदाज़ा लगा सकते हैं क्यों? चलिए मैं ही बता देता हूँ। असल में राजू को इस बात का एहसास ही नहीं था कि कार के अंदर ५००० हॉर्स पॉवर का इंजिन लगा है और वह उसे तेज गति से आगे बढ़ने में मदद कर सकता है। उसे तो बस इतना ही पता था कि जब तक किसी गाड़ी के आगे २ बैल नहीं लगायेंगे तब तक गाड़ी का चलना संभव ही नहीं है।


हंसने की ज़रूरत नहीं है दोस्तों। हम में से ज़्यादातर लोगो की हालत भी राजू के समान ही है। हम सभी को भी भगवान ने असीम क्षमता दी है लेकिन हम भी राजू की तरह अपने जीवन की गाड़ी को परिस्थितियों या क़िस्मत नाम के बैल लगा कर चलाने का प्रयास करते हैं और कभी अपनी क्षमता पहचान ही नहीं पाते हैं। दोस्तों, अगर आप अपना जीवन उच्चतम स्तर तक जीना चाहते हैं तो बाहरी चकाचौंध में खोने या बाहरी दुनिया में ख़ुशी खोजने के स्थान पर ख़ुद के अंदर झांकने का प्रयास करें।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

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