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  • Writer's pictureNirmal Bhatnagar

जीवन को आनंददायक बनाने के 4 सूत्र !!!

Oct 25, 2023

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, अक्सर मैंने लोगों को अपनी ज़िंदगी को दोष देते हुए देखा है, कुछ को अपने अतीत से समस्या होती है तो कुछ को परिवार, रिश्तेदार या परिचितों से। कुछ को महसूस होता है कि लोग उन्हें पहचान नहीं पा रहे, उन्हें उचित सम्मान नहीं दे रहे, तो कुछ लोग क़िस्मत या भाग्य को लेकर परेशान हैं। इन्हीं लोगों में साथियों कुछ तो ऐसे भी हैं जिन्हें अपने जन्म पर तो कुछ को भविष्य की अनिश्चितताओं को लेकर समस्या है। कुल मिलाकर कहा जाये तो जीवन से मिले कुछ नकारात्मक अनुभवों और ग़लत प्राथमिकताओं के कारण यह लोग अपने जीवन को ग़लत नज़रिए से देखने लगते हैं। संभव है कि अब आपमें से कुछ लोग मेरी बात या मेरे नज़रिए पर ही प्रश्न चिन्ह लगाकर यह सोच रहे हों कि आपके जीवन में सब ठीक चल रहा है ना ऐसा इसलिए कह रहे हैं। तो साथियों आगे बढ़ने से पहले मैं आपको बता दूँ कि मेरा मक़सद किसी को भी ग़लत ठहराना या ऐसे लोगों की समस्याओं, परेशानियों और वास्तविक चुनौतियों को कम आंकना नहीं है और ना ही मैं उन्हें नज़रंदाज़ कर रहा हूँ या नज़रंदाज़ करने के लिए कह रहा हूँ। मैं तो बस उन्हें याद दिलाते हुए इतना कहना चाह रहा हूँ कि यह सब याने समस्या, परेशानी, चुनौतियाँ आदि तो ज़िंदगी में निश्चित तौर पर हमेशा हमारे साथ रहेंगी। लेकिन इन सबके बीच भी जो ख़ुद को शांत, संतुष्ट और खुश रख पाएगा वही अपने जीवन को आनंददायक तरीक़े से जी पाएगा। आइये आज हम अपने जीवन को आनंददायक तरीक़े से जीने के लिए आवश्यक सबसे महत्वपूर्ण 4 सूत्र सीखते हैं-


पहला सूत्र - संवेदनशील बनें

अतीत के अनुभवों से अपने आज को बर्बाद करने के स्थान पर उन्हें पीछे छोड़ना और वर्तमान में जीना; दूसरे के नज़रिए से चीजों को देखना; प्रतिदिन मात्र दो मिनिट अपनी सभी इंद्रियों के साथ विचार शून्य रहते हुए अपने आसपास के वातावरण, जैसे, चहचहाती चिड़िया की आवाज़, हिलते हुए पेड़ों के पत्ते, फूलों से आती ख़ुशबू, गुजरती हुई कोई पसंदीदा गाड़ी, इत्यादि को अपने साथ महसूस करना अर्थात् मात्र २ मिनिट तक अपनी सभी इंद्रियों के साथ वर्तमान में जीना आपको संवेदनशील बनाता है।इससे आपके दिमाग और शरीर को आराम मिलेगा। सोचना आसान हो जाएगा और साथ ही आशावादी दृष्टिकोण के साथ आप अधिक स्वाभाविक महसूस करेंगे।


दूसरा सूत्र - प्यार करें

आमतौर पर हम अपने लोगों को अपनी दैनिक प्राथमिकताओं में रखते ही नहीं हैं। इसलिए नहीं कि हम उन्हें प्यार नहीं करते या हमारे जीवन में उनका महत्व नहीं है, बल्कि सिर्फ़ इसलिए कि हम यह सोचते हैं कि यह तो हमारे अपने हैं, हमेशा हमारे साथ हैं, तो फिर अलग से इस बात का एहसास करवाने की आवश्यकता क्या है। ठीक इसी तरह की एक गलती हम और करते हैं, हम इंसानों से ज़्यादा चीजों से प्यार करना शुरू कर देते हैं।


जीवन में दोस्तों दोनों तरह के लोग मिलेंगे घृणा करने वाले भी और प्यार करने वाले भी। घृणा करने वालों को नज़रअंदाज़ करें और अपने लोगों को, जो आपको प्यार करते हैं उन्हें एहसास कराएँ कि आप उनका ख़याल रखते हैं, उनसे प्यार करते हैं।


तीसरा सूत्र - कृतज्ञता का भाव रखें

जीवन में कृतज्ञ रहना एक ऐसा नायाब तरीक़ा है जो हमारे मन को शांत रखकर क्रोध, अहंकार आदि जैसे कई नकारात्मक भावों को दूर रखते हुए हमारे मूड को सकारात्मक बनाकर, हमारी ख़ुशियों को कई गुना बढ़ा देता है। कृतज्ञता की शक्ति का लाभ उठाकर अपने जीवन को खुशहाल बनाने के लिए निम्न चार कार्यों को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाएँ। पहला - वर्तमान में जिएँ और अपने आसपास नज़र दौड़ाकर देखें कि इस पल आप किस चीज के लिए आभारी हैं। दूसरा - कृतज्ञ हैं तो कृतज्ञता व्यक्त करें। ऐसा करना आपके आसपास के माहौल को ख़ुशनुमा बनायेगा। तीसरा - उन चीजों के लिए भी आभारी रहे जिन्हें आम तौर पर हम महत्वहीन, सामान्य अथवा अपने हक़ के रूप में मान लेते हैं। ऐसा करना आपको छोटे और मुक्त सुखों का आनंद लेने में सक्षम बनाएगा और साथ ही विपरीत और कठिन परिस्थितियों से लड़ने का साहस देगा। चौथा - शुक्रिया के साथ अपने दिन की शुरुआत और अंत करें। ऐसा करना आपके अंदर कृतज्ञता का भाव विकसित करेगा। इसीलिए शायद जी.के. चेस्टरटन ने कहा है, ‘कृतज्ञता का भाव रखना सर्वोत्तम विचार है, यह आश्चर्यजनक रूप से हमारी ख़ुशियों को दोगुना कर देता है।’


चौथा सूत्र - ख़ुद को प्राथमिकता दें

हमेशा चीज़ें या दूसरे लोग ही महत्वपूर्ण नहीं होते हैं, कई बार सबसे महत्वपूर्ण किरदार आप का स्वयं का होता है। इसलिए ख़ुद को प्राथमिकता देकर, प्रोत्साहित करने के मौक़े तलाशें। इसके लिए ख़ुद से प्रश्न करें कि आज मैंने ऐसे कौन से तीन कार्य करे हैं, जिसके लिए मैं अपनी पीठ थपथपा सकूँ। खुद के आत्मसम्मान का ख़्याल रखना अर्थात् ख़ुद के प्रति कृतज्ञता का भाव रखना इस दुनिया का सबसे ज़रूरी कार्य है क्योंकि यह दुनिया अच्छी और खुशहाल तब तक ही है जब तक आप खुशहाल हैं।


दोस्तों आइये आज से उक्त सूत्रों को अपनाकर हम सब अपने जीवन को आनंददायक बनाते हैं...


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com

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