जीवन जीने का रखें जुनून…
- Nirmal Bhatnagar

- Apr 13
- 3 min read
Apr 13, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

सब कुछ पाने की चाह में आज हमने अपने जीवन को एक दौड़ के समान बना लिया है। जहाँ हर काम का उद्देश्य सिर्फ़ मनवांछित परिणाम पाना है। उदाहरण के लिए बच्चे अच्छे से पढ़ाई, अच्छी नौकरी या अच्छे भविष्य के लिए करते हैं; भविष्य में लाभ मिलेगा इस लिहाज से आज संबंध बनाते और निभाते हैं; पहचान बनाने के लिए सेवा करते हैं और तो और लोग अच्छे कर्म भी मृत्यु के बाद स्वर्ग की चाह में करते हैं। नतीजे के तौर पर हम हमारी ख़ुशी को इन उपलब्धियों से जोड़ कर देखने लगते हैं, जो कतई सही नहीं है क्योंकि सच्चाई तो यह ही है कि खुशी परिणाम में नहीं, जुनून में होती है। जब आप किसी काम को सिर्फ इसलिए करते हैं क्योंकि उसमें आपको आनंद आता है, तो वही काम आपकी ऊर्जा बन जाता है, आपकी पहचान बन जाता है। लेकिन जब वही काम सिर्फ परिणाम के लिए किया जाता है, तो धीरे-धीरे वह बोझ बन जाता है।
यकीन मानियेगा, आज की जीवनशैली में अत्यधिक तनाव की असली वजह ‘आनंद’ को जुनून की जगह ‘परिणाम’ से पाने की आस रखना है। आज हम काम ख़ुशी पाने के लिए नहीं, परिणाम पाने के लिए करते हैं और यहीं से हमारे जीवन में ख़ुशी, आनंद और बेहतर जीवन का संतुलन बिगड़ने लगता है।
याद रखियेगा, जीवन कोई लक्ष्य नहीं, बल्कि एक सृजन है, एक ऐसा सृजन जो हमारे जुनून और सहभागिता से बनता है। जी हाँ, जब हम अपने भीतर के आनंद से काम करते हैं, तो वही आनंद हमारे कर्म का कारण भी बनता है और परिणाम भी और यही हमारे जीवन की असली तरक्की होती है। याने यह हमें एक ऐसे विस्तार की ओर ले जाता है, जहाँ जीवन रुकता नहीं, बल्कि लगातार बढ़ता रहता है। लेकिन जब हम केवल सुविधाओं और इच्छाओं के पीछे भागते हैं, तो हम अपनी ऊर्जा को बिखेर देते हैं; क्षीण कर देते हैं। हमें लगता है कि हमारे पास ढेरों विकल्प हैं, चीजों को चुनने की आज़ादी है, लेकिन हकीकत में यह स्थिति हमें अपनी इच्छाओं का गुलाम बना देती है।
सच्ची स्वतंत्रता पैसे से नहीं मिलती है, वह तो हमारे भीतर से उत्पन्न होती है। याने जब आप कुछ पाने के लिए नहीं, बल्कि कुछ रचने के लिए जीते हैं, तब आप सही मायने में स्वतंत्र होते हैं। साथियों, पैसा कमाइए, लेकिन सिर्फ सुविधा के लिए नहीं बल्कि उस विज़न; उस आनंद के लिए, जो आपके भीतर से जन्म लेता है क्योंकि जब आपका उद्देश्य स्पष्ट होता है, तो जीवन खुद आपको वह सब देने लगता है, जिसकी आपको जरूरत है। इसलिए जीवन से कभी यह मत पूछिए कि, “मुझे क्या मिलेगा?” बल्कि यह पूछिए, “मैं क्या रच सकता हूँ?” क्योंकि जब आप अभाव से मांगते हैं, तो डर पैदा होता है और जब आप पूर्णता से रचते हैं, तो सृजन होता है।
इसलिए ख़ुद से पूछें, “क्या मेरा जुनून मेरी इच्छाओं से बड़ा है?” अगर जवाब “हाँ” है, तो यही जुनून आपकी सच्ची रचनात्मकता बन जायेगा और इसी से आपके जीवन को असली अर्थ मिलना शुरू हो जाएगा। याद रखिएगा, जीवन उन लोगों के साथ चलता है जो “जीवित” होते हैं; जो वर्तमान में होते हैं; जो सृजन करते हैं। यह उन लोगों के साथ नहीं चलता जो अतीत की इच्छाओं और डर में उलझे रहते हैं। इसलिए अपने भीतर के मौन से जुड़िए, उसी मौन से आपका असली जुनून जन्म लेगा और जब आपका जुनून आनंद से जुड़ जाता है, तो हर काम सहज हो जाता है। तब आपको यह समझ आता है, आप कुछ “कर” नहीं रहे, बल्कि जीवन आपके माध्यम से “हो” रहा है।
इसलिए सफलता पाने की कोशिश मत कीजिए, जीवन को जीने की कोशिश कीजिए क्योंकि जीवन खुद एक सफलता है। याद रखिएगा, जब आप जीवन का सम्मान करेंगे, तो जीवन आपके जुनून का सम्मान करेगा।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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