जीवन में तभी बनेगी बात…
- Nirmal Bhatnagar

- Jul 8, 2025
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Jul 8, 2025
फिर भी ज़िंदगी हसीन है...

दोस्तों, जीवन में अक्सर हमारे निर्णय दूसरों की कही बातों और अनुभवों पर आधारित होते हैं। शायद इसी वजह से वे हमारे लिए हर बार सही साबित नहीं होते हैं। दूसरे शब्दों में कहूँ तो हर व्यक्ति का अनुभव, उसकी परिस्थिति, समझ और स्थिति पर आधारित होता है, जो हर बार हमारे लिए सही हो जरूरी नहीं है। इस बात को नजरअंदाज करना कई बार हमारे लिए चुनौतीपूर्ण स्थितियों का निर्माण करता है। आइये इसी बात को एक कहानी के माध्यम से समझने का प्रयास करते हैं-
बात कई साल पुरानी है, एक बार गर्मी के मौसम में प्यास से परेशान होकर लकड़बग्घा पानी की तलाश में इधर-उधर घूम रहा था। प्यास से बेहाल उस लकड़बग्घे को काफ़ी देर खोजने के बाद एक नदी नज़र आई। वह भागते हुए नदी किनारे पहुँचा और भरपेट पानी पीकर एकदम तृप्त हो गया। तभी अचानक उसके मन में ख्याल आया, “क्यों ना इस गर्म मौसम में इस ठंडे पानी से नहा भी लिया जाये?” अभी वह कुछ निर्णय लेता उससे पहले ही उसके मन में विचार आया कि अगर नदी गहरी हुई तो वह तैरना ना आने के कारण डूब जायेगा।”
विचार आते ही उसने नहाने के विचार को त्यागने का निर्णय लिया, लेकिन तभी उसका ध्यान नदी के पास ही खड़े ऊँट पर गया, जो अभी-अभी नदी से नहा कर ही निकला था। लकड़बग्घा ऊँट के पास गया और बड़ी विनम्रता के साथ बोला, “नमस्ते ताऊ, क्या आप मुझे बता सकते हैं कि पानी कितना गहरा है? अगर मैं इसमें नहाने जाऊँगा तो डूब तो नहीं जाऊँगा?” ऊँट ने हँसते हुए जवाब दिया, “बिलकुल नहीं, मेरे घुटनों तक पानी है। आराम से नहा आ।”
ऊँट का जवाब सुनते ही लकड़बग्घा खुश हो गया और बिना दिमाग़ लगाए याने बिना सोचे-समझे नदी में छलांग लगा बैठा और तुरंत डूबने लगा। कभी सिर बाहर निकालता, कभी गोते खाता। बड़ी मुश्किल से उसने किसी तरह अपनी जान बचाई और बाहर निकला और सीधे ऊँट के पास जाकर बड़े गुस्से से बोला, “तुमने तो कहा था कि पानी घुटनों तक है, मैं तो मर ही गया था!” लकड़बग्घे की बात सुन ऊँट मुस्कराया और बोला, “बिलकुल सही कहा था बच्चे, लेकिन मेरे घुटनों तक! तेरे नहीं!” इतना सुनते ही लकड़बग्घा चुप हो गया। उसे समझ आ गया कि गलती उसकी थी, वह ख़ुद ही बिना सोचे, बिना समझे, सिर्फ़ दूसरों के अनुभव पर विश्वास करके, पानी में कूद गया था, जो कहीं से भी उचित नहीं था।
दोस्तों, यह कहानी हमें जीवन को बेहतर बनाने के कई प्रेरणादायी सूत्र सिखाती है-
१) हर किसी का अनुभव अलग होता है याद रखें, किसी और के लिए जो आसान है, वो आपके लिए मुश्किल भी हो सकता है। इसलिए अपनी स्थिति को पहचानिए और उसी आधार पर निर्णय लीजिए।
२) विवेक का प्रयोग आवश्यक है जीवन में सही निर्णय वही होते हैं जो सोच-समझकर और परिस्थिति अनुसार लिए जाते हैं। भावनाओं में बहकर या दूसरों की सलाह पर आँख बंद करके भरोसा करना हानिकारक हो सकता है।
३) सावधानी में ही सुरक्षा है निर्णय लेने से पहले खुद स्थिति की जांच करें। दूसरों की सलाह लें लेकिन अंतिम फैसला अपनी समझ से लें।
४) सीखने का नजरिया रखें गलती हर किसी से होती है, लेकिन यदि हम उससे सीख लें, तो वह गलती हमारे लिए अनुभव बन जाती है।
अंत में इतना ही कहूँगा दोस्तों कि जीवन में सफल वही होता है जो अपनी सोच, विवेक और अनुभव से फैसले लेता है। इसलिए सुनें सबकी; बस निर्णय अपने विवेक के आधार पर लें, यही आत्मनिर्भरता का पहला कदम है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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