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जीवन में मिली हर ठोकर आकार देती है हमें…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Jan 18
  • 3 min read

Jan 18, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, प्रतिदिन जब मैं आप सभी से मुख़ातिब होता हूँ, तो ईश्वर की प्रेरणा से मन में एक ही इच्छा होती है, “आज ईश्वर मुझसे कुछ ऐसा कहला दे जो आप सभी की ज़िंदगी में आशा की रोशनी लेकर आए; ईश्वर मुझसे कुछ ऐसा कहलाये जो आपके दिल को छू जाए और आपको आगे बढ़ने की हिम्मत दे। आज की कहानी भी उसी दिशा में एक खूबसूरत प्रेरणा लेकर आई है।


एक नदी अपने लम्बे, कठिन, पहाड़ी सफ़र को पार करते हुए तराई में पहुँची। जहाँ उसके किनारों पर असंख्य पत्थरों का ढेर लगा था. जिनमें से कुछ गोल, कुछ अंडाकार, तो कुछ बिल्कुल बेतरतीब और खुरदरे थे। उन्हीं पत्थरों में से दो पत्थरों के बीच धीरे-धीरे दोस्ती हो गई और दोनों एक-दूसरे से अपने मन की बात करने लगे।


एक दिन खुरदरे पत्थर ने अपने चिकने, चमकदार मित्र से पूछा, “हम दोनों एक ही पर्वत से आए हैं, फिर तुम इतने गोल और आकर्षक हो और मैं इतना बेडौल और अनगढ़ क्यों?” चिकना पत्थर हल्के से मुस्कुराया और बोला, “मित्र! शुरुआत में मैं भी तुम्हारी ही तरह था। फर्क सिर्फ इतना है कि मैंने सफ़र के थपेड़ों को स्वीकार किया।” कुछ क्षणों तक शांत रहने के बाद चिकना पत्थर अपनी बात आगे बढ़ाते हुए बोला, “मित्र! इस रूप को पाने के लिए मैं न जाने कितनी बार तेज़ धार से टकराया हूँ… कितनी ही बार नदी ने मुझे चट्टानों पर पटका है… तूफ़ानों ने मेरी सीमा तक मुझे परखा है। मैं टूटता रहा, घिसता रहा, पर मैंने बहना नहीं छोड़ा। मेरे पास हमेशा विकल्प था कि मैं किनारे पर पड़ा रहूँ और इस यात्रा में मिलने वाले दर्द से बच जाऊँ… पर ऐसी जिंदगी किस काम की? मैंने संघर्ष चुना, और संघर्ष ने ही मेरी पहचान बनाई।”


चिकने पत्थर की बात सुन बेडौल और अनगढ़ पत्थर स्तब्ध था। वह समझ नहीं पा रहा था कि अब क्या कहे या क्या करे। तभी चिकना पत्थर अपने दोस्त की आँखों में आँखे डाल, अपनी बात आगे बढ़ाता हुआ बोला, “तुम भी निराश मत होना। यह रूप तुम्हारा अंत नहीं, बस शुरुआत है। अभी तुम्हें बहना है, घिसना है, टूटना है और जब तुम इन कठिनाइयों को अपनाना सीख लोगे, तब एक दिन तुम मुझसे भी ज़्यादा सुंदर, संतुलित और चमकदार बन जाओगे। आज तुम वही हो जो मैं कल था… कल तुम वही होगे जो मैं आज हूँ… या शायद उससे भी बेहतर।”


दोस्तों, इस कहानी का संदेश बहुत गहरा और दिल को छू लेने वाला है। हम सब अपने जीवन की शुरुआत एक “अनगढ़ पत्थर” की तरह करते हैं। जहाँ अनिश्चिता होती है; रोज़ समस्याएँ हमसे टकराती हैं; परिस्थितियाँ हमें घिसती हैं; लोग हमें चोट पहुँचाते हैं और कई बार जीवन की तेज़ धारा हमें उलझनों में फेंक देती है। पर यही संघर्ष तो हमें असली रूप; हमारे जीवन को आकार देता है। यही चुनौतियाँ हमें मजबूत, परिपक्व, आकर्षक और अनोखा बनाती हैं।


याद रखियेगा, जीवन में “किनारे पड़े रहने” का विकल्प याने आसान रास्ता चुनने का विकल्प हमेशा मौजूद होता है। लेकिन जो लोग आसान विकल्प को छोड़ कर, चुनौतियाँ का सामना करते हुए जीवन में बहने का साहस रखते हैं, वही चमकते हैं। इसलिए दोस्तों, परिस्थितियाँ कैसी भी हों निराश मत होइए और अपनी वर्तमान स्थिति को अंतिम मत समझिए। जीवन में आने वाले संघर्षों को स्वीकार कीजिए और स्वयं को बदलने, निखारने और गढ़ने की ईश्वर की प्रक्रिया पर भरोसा रखिए क्योंकि आज आप जिस रूप में हैं, वही रूप कभी उस चिकने, सुंदर पत्थर का भी था। लेकिन उसने बहना नहीं छोड़ा… वह तूफ़ानों, धारों और टक्करों से गुज़रता रहा और बदलता गया, निखरता गया। इसी तरह कल आप भी वैसे नहीं रहेंगे जैसे आज हैं। संघर्ष और अनुभव आपको और बेहतर, और मजबूत, और अधिक चमकदार बनाएंगे।


इसलिए दोस्तों, स्थिति, परिस्थिति, क़िस्मत, ईश्वर या किसी और को दोष देने के स्थान पर समय के साथ बस बहते रहिए। जीवन की हर ठोकर, हर चुनौती आपको आकार देगी और यकीन मानिएगा, एक दिन आप भी किसी और के लिए उसी चिकने पत्थर की तरह प्रेरणा बन जाएँगे।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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