‘जीवन’ हर सुबह हमें एक अनूठा मौक़ा देता है…
- Nirmal Bhatnagar

- Aug 7, 2025
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Aug 7, 2025
फिर भी ज़िंदगी हसीन है...

दोस्तों, विश्वास रखियेगा ईश्वर ने हमें जैसा जीवन दिया है, वह सर्वोत्तम है। अर्थात् यह जैसा है, वैसा ही ईश्वर का दिया एक बेहतरीन सुंदर उपहार है। इसका असली आनंद हमें तभी मिलता है, जब हम इसे जैसा है वैसा ही स्वीकारते हैं। जी हाँ साथियों, अगर आनंद के साथ जीना चाहते हो तो कभी-कभी, बस कुछ देर के लिए सारी चिंताओं को एक ओर रखना सीखो। याने हर उन छोटी बातों को छोड़ना सीखो, जो तुम्हारे अंतर्मन को नकारात्मकता से घेर लेती हैं।
चलिए एक काम कीजिए, कुछ देर के लिए अभी, इसी पल भूल जाइए कि किसी ने क्या बोला था; जीवन में क्या-क्या पीछे छूट गया; जीवन में क्या मिला, क्या नहीं… बस सबको थोड़ी देर के लिए रोक दीजिए और ज़रा अपनी आँखें बंद कीजिए, एक गहरी साँस लीजिए और फिर धीमे से आँखें खोल कर जरा अपने आस-पास देखिए और महसूस कीजिए कि आसमान कितना नीला और खुला है; फूलों के रंग कितने जीवंत हैं; हवा कितनी ठंडी और ताज़ा है, और सूरज की रोशनी कितनी उदारता से सब पर बिखर रही है, वह भी बिना किसी भेदभाव के, बिना किसी अपेक्षा के।
दोस्तों, ये सब हर दिन हमारे पास होते हैं, लेकिन हम इन्हें देख या महसूस नहीं कर पाते हैं क्योंकि हम अपने मन के बादलों में उलझे रहते हैं। लेकिन जब आप चिंता और शिकवे की चादर उतारते हैं, तब आपको एहसास होता है कि आप इस सृष्टि का एक सुंदर और अहम हिस्सा हैं और यही वो पल होता है जब जीवन हमें अपना अर्थ बताने लगता है और कहता है हमारी सबसे बड़ी दौलत वही है जो हमारे पास है, और जो हम हैं। लेकिन अक्सर हम उस दौलत के पीछे भागते हैं, जो हमारे पास नहीं है। इसलिए हम तुलना करते हैं, शिकायत करते हैं और खुद को कमतर समझने लगते हैं और इस खेल में यह भूल जाते हैं कि हमारे पास क्या है? एक हँसता-खिलखिलाता परिवार, कुछ सच्चे दोस्त, ठीकठाक सेहत, सोचने और समझने की शक्ति, और हर सुबह एक नई शुरुआत का मौका, आदि। दोस्तों, ये सब दौलत नहीं तो और क्या है?
दोस्तों, कृतज्ञता ही वह चाबी है जो जीवन की सुंदरता के दरवाज़े खोलती है। जब आप यह महसूस करने लगते हैं कि आप क्या हैं और आपके पास क्या है, तो आपके भीतर संतोष का दीप जल उठता है। और संतोष से बड़ा सुख इस संसार में कोई नहीं। याद रखिएगा, आप वही बनते हैं, जो आप रोज़ करते हैं। इस आधार पर कहें तो हर दिन हमारे पास एक मौका होता है - खुद को थोड़ा और बेहतर बनाने का। हमारी आदतें, हमारी सोच, हमारी दिनचर्या ही हमें गढ़ती हैं। अगर हम हर दिन थोड़ा धैर्य रखें, थोड़ी दया रखें, थोड़ा क्षमा करें… तो यही छोटे-छोटे अभ्यास मिलकर एक सुंदर चरित्र का निर्माण करते हैं। इसलिए दोस्तों प्रतिदिन खुद से पूछिए, ‘क्या मैं वही अभ्यास कर रहा हूँ, जो मुझे, जैसा मैं बनना चाहता हूँ, वैसा बनायेगा?’
सपनों का जीवन बनाने की इस प्रक्रिया में हमें क्षमा की शक्ति को भी समझना होगा। इस जीवन में कुछ लोग आपको अनजाने में, तो कुछ जानबूझकर दुख भी देंगे और कई बार उन्हें अपने किए पर पछतावा भी नहीं होगा। ऐसे में क्रोध और शिकायत का बोझ अपने मन में लिए हम जीवन में आगे बढ़ते हैं। यह स्थिति बिल्कुल वैसी ही है, जैसे कोई भारी पत्थर को सिर पर उठाए पूरे दिन घूमना या अपना काम करना। याद रखिएगा, क्रोध उस ज़हर की तरह है जो हम खुद, यह सोचकर पीते हैं कि इससे दूसरा व्यक्ति मरेगा।
अगर आप क्रोध के इस जहर से बचना चाहते हैं तो ख़ुद को समझा लें कि ‘क्षमा करना दूसरों के लिए नहीं, खुद के लिए ज़रूरी है।’ जब आप दूसरों को क्षमा या माफ़ करते हैं, तो आप अपने दिल को हल्का करते हैं। आप अपने अंदर की शांति को वापस बुलाते हैं और जब आप शांत होते हैं तब ही आप जीवन की सुंदरता और उसके आनंद को महसूस करते हैं।
दोस्तों, ईश्वर का दिया यह ‘जीवन’ हर सुबह हमारे पास एक अनूठा मौका लेकर आता है — देखने का, सुनने का, मुस्कराने का, जीने का। इसलिए अनावश्यक चिंता की चादर हटाइए, और महसूस कीजिए कि आप पूर्ण हैं; आप सुंदर हैं; आप इस सृष्टि का एक अनमोल हिस्सा हैं, फिर देखियेगा यह जीवन कितना खूबसूरत है। यकीन मानिएगा, जब आप ऐसा करेंगे, तो ज़िंदगी आपको धीरे-धीरे गले लगा लेगी।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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