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  • Writer's pictureNirmal Bhatnagar

जैसा दृष्टिकोण वैसा अंतःकरण !!!

July 19, 2023

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, बात कई साल पुरानी है, गाँव से कोसों दूर, जंगल के बीच में एक बहुत ही सुंदर लेकिन वीरान भवन था। एक बार संयोगवश उस इलाक़े से एक साधु महाराज का निकालना हुआ। जैसे ही उनकी नज़र उस सुंदर भवन पर पड़ी वे मन ही मन बोले पड़े, ‘आहा! शहर के कोलाहल से दूर, एकांत में कितना सुंदर और सुरम्य स्थान है। यहाँ बैठकर ईश्वर का ध्यान करने में कितना आनंद आएगा।’ इतना कहकर साधु वहाँ पर ध्यान लगाकर बैठ गए।


कुछ सप्ताह बाद उसी इलाक़े से एक चोर गुजरा। उस सुंदर से भवन को देख उसके मन में विचार आया, ‘अरे वाह! वीरान इलाक़े में इतना सुंदर भवन। यह स्थान तो चोरी किए सामान को सुरक्षित रखने के लिए सबसे अच्छा स्थान है।’ इन्हीं विचारों को लिए चोरी करने के उद्देश्य से चोर वहाँ से आगे बढ़ गया। कुछ दिनों बाद उस भवन के सामने से एक जुआरी का निकलना हुआ। भवन को देखते ही उसे लगा कि जुआँ खेलने के लिए इससे मुनासिब जगह तो कोई ओर हो ही नहीं सकती है। अगली बार मैं अपने सब दोस्तों को लेकर आऊँगा और इस सुंदर स्थान पर, प्रकृति के समीप बैठ कर जुआँ खेलूँगा। अब अगली बार से मैं यहीं जुआँ खेलूँगा, यह सोचते हुए वह वहाँ से आगे बढ़ गया।


इसी तरह एक बार एक दुराचारी उस इलाक़े से गुजरा तो उसे वह भवन दुराचार करने के लिए एकदम उपयुक्त नज़र आया और तो और एक अपराधी को वह स्थान अपराध करने के लिए उचित लगा। दुराचारी और अपराधी उस वीरान इलाक़े के सुनसान भवन को देख सोच रहे थे कि यहाँ किया गया अपराध किसी को कभी पता ही नहीं चलेगा। इसलिए यह भवन अपराध करने के लिए सर्वथा उपयुक्त या सर्वोत्तम स्थान है।


दोस्तों, भवन तो एक ही था लेकिन उसे देखकर अलग-अलग लोगों के मन में अलग-अलग विचार आए। याने जो जैसा था उसने उसे वैसे ही कार्यों के लिए उपयुक्त पाया। इसी बात को अगर थोड़ा और गहराई से सोचा जाए तो कहा जा सकता है जिसका नज़रिया जैसा था, उसने भवन को उसी नज़र से देखा। इसीलिए दोस्तों कहा जाता है, ‘नज़र को बदलो तो नज़ारे बदल जाते हैं, सोच को बदलो तो सितारे बदल जाते हैं, कश्तियाँ बदलने की ज़रूरत नहीं है, दिशा को बदलो तो किनारे खुद-ब-खुद बदल जाते हैं !!!’


सीधे शब्दों में कहा जाए तो यह जीवन दोस्तों वैसा ही है जैसा आप इसे देखते हैं। अगर आपको यह वरदान लगता है, तो यह वरदान है और अगर आपको यह अभिशाप लगता है तो भी आप सही हैं। स्थिति-परिस्थिति, चुनौती सभी लोगों के सामने एक समान रहती है। परिणाम में फ़र्क़ सिर्फ़ और सिर्फ़ उस स्थिति-परिस्थिति या चुनौती को देखने के आपके नज़रिए से आता है।


याद रखिएगा, यह शरीर सभी इंसानों के लिए एक समान है, लेकिन मानसिक शांति, संतुष्टि और सुख का अंतर विचारों की वजह से आया है। तो आईए दोस्तों, आज से हम अपने नज़रिए याने अपने दृष्टिकोण को बेहतर बनाने का प्रयास करते हैं और इसकी शुरुआत अपने विचारों को सकारात्मक बनाने से करते हैं क्योंकि विचार से सोच बनती है और सोच से नज़रिया याने दृष्टिकोण। दृष्टिकोण आपके निर्णय को प्रभावित करता है और निर्णय आपके कर्म की दिशा तय कर आपको मनमाफ़िक परिणाम देता है। इसीलिए मेरे गुरु हमेशा कहते हैं, ‘सफलता प्रतिभा की जगह दृष्टिकोण पर अधिक निर्भर करती है।’ और साथ ही याद रखिएगा जैसा आपका दृष्टिकोण होगा वैसा ही आपका अंतःकरण होगा।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर



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