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ज्ञानी बनें, जानकार नहीं…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Nov 8, 2023
  • 3 min read

Nov 8, 2023

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

आईए दोस्तों, आज के लेख की शुरुआत एक प्यारी सी कहानी से करते हैं। बात कई साल पुरानी है राजकुमारी की वैराग्यपूर्ण जीवन जीने की इच्छा देख राजा ने उसकी शादी एक ग़रीब लेकिन ज्ञानी माने जाने वाली संन्यासी से करवा दी। इस निर्णय के पीछे राजा का मानना था कि वह संन्यासी राजकुमारी की सोच और भावनाओं की कद्र व सम्मान करेगा। विवाह के पश्चात राजकुमारी और संन्यासी ख़ुशी-ख़ुशी अपनी कुटिया में रहने लगे।


एक दिन राजकुमारी को कुटिया की सफ़ाई के दौरान एक टोकरी में दो सुखी रोटियाँ रखी हुई दिखी। इस विषय में पूछने पर संन्यासी ने अपनी पत्नी को बताया कि अगर कल भिक्षा नहीं मिली तो इन दो रोटियों को खाकर हम अपना काम चला लेंगे। इतना सुनते ही राजकुमारी पहले तो ठहाका मारकर ज़ोर से हंसी, फिर एकदम से गंभीर होते हुए बोली, ‘मेरे पिता ने मेरा आपसे विवाह सिर्फ़ इसलिए किया था क्योंकि वे आपको मेरी तरह वैरागी मानते थे। लेकिन आप वैरागी नहीं, साधारण मानुष है जो भक्ति में लीन रहता है। ऐसा मैं इसलिए कह रही हूँ क्योंकि आप भी सामान्य मनुष्य की तरह कल की चिंता करते हैं। असली वैरागी तो अपने भगवान, अपने इष्ट पर पूरा भरोसा करता है और कल की चिंता नहीं करता। आप स्वयं सोच कर देखिए, जब जानवर कल की चिंता करे बग़ैर अपना पूरा जीवन बिता लेते हैं तो फिर हम तो इंसान हैं। मेरी सलाह मानें और चिंता छोड़ आनंद के साथ प्रार्थना करें। अगर भगवान चाहेगा तो हमें कल भी खाना मिल जाएगा अन्यथा इसी तरह आनंद के साथ भक्ति करते हुए रात बिता लेंगे।’


पत्नी की बातों ने संन्यासी की आँखें खोल दी। उस दिन उसे इस बात का भी एहसास हुआ कि उसकी पत्नी असली संन्यासी है। उसने दोनों हाथ जोड़ते हुए अपनी पत्नी से कहा, ‘आप तो एक राजा की बेटी याने राजकुमारी थी, फिर भी वैराग्य के महत्व को समझकर मुझसे ब्याह कर इस छोटी सी कुटिया में रहने के लिए आ गई। जबकि मैं शुरू से फ़क़ीर था लेकिन उसके बाद भी मुझे कल की चिंता सता रही थी। सिर्फ़ कहने और कपड़े धारण करने से कोई संन्यासी नहीं हो जाता। संन्यास को तो आपको अपने जीवन में उतारना पड़ता है। धन्यवाद, आपने मुझे वैराग्य का महत्व समझा दिया।’


दोस्तों, आध्यात्मिक सी लगने वाली इस कहानी में वैसे हम जैसे गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों के लिए भी सफलता का मंत्र छुपा हुआ है। जिस तरह संन्यासी को वैराग्य का सही अर्थ पता नहीं था और वह संन्यासी के भेष में रहते हुए भी साधारण मनुष्य के भाँति जीवन जी रहा था, ठीक उसी तरह कई बार हमें भी ऐसा लगता है, जैसे किसी विशेष विषय में हम सब कुछ जानते हैं और हम ख़ुद को उस क्षेत्र विशेष का ज्ञानी या विशेषज्ञ मानने और बताने लगते हैं। जबकि हक़ीक़त इसके बिल्कुल उलट होती है। सही मायने में देखा जाए तो किसी विषय की जानकारी याने इनफार्मेशन होना और उस विषय का ज्ञान याने नॉलेज होना दो बिलकुल अलग-अलग बात है। याद रखियेगा किसी भी क्षेत्र का जानकार होना आपको उस क्षेत्र में सफल नहीं बनाता, उसके लिए तो आपको उस क्षेत्र विशेषज्ञ याने ज्ञानी बनना पड़ता है।


अब आप सोच रहे होंगे कि जानकार होने और ज्ञानी होने में अंतर क्या है? तो चलिए इसे भी जान लेते हैं। जब आप किसी क्षेत्र विशेष की जानकारी को अपने दैनिक जीवन में उतारना शुरू कर देते हैं याने आप उस जानकारी को क्षेत्र विशेष में कार्य करते वक़्त उपयोग में लाने लगते हैं, तब आप उस जानकारी याने इन्फ़ॉर्मेशन में अपने अनुभवों को जोड़ कर उसे क्षेत्र विशेष के ज्ञान में परिवर्तित कर लेते हैं। दूसरे शब्दों में कहूँ तो किसी क्षेत्र की जानकारी के साथ जब आपका अनुभव मिल जाता है, तब वह आपको उस क्षेत्र का ज्ञानी बना देता है और जब यह ज्ञान आपको उस क्षेत्र विशेष में बार-बार सफलता दिलाने लगता है तब आप उस क्षेत्र के विशेषज्ञ बनते जाते हैं। सही कहा ना साथियों? इसीलिए तो कहा जाता है, ‘किसी भी क्षेत्र का विशेषज्ञ बनना या उस क्षेत्र में विशेषज्ञ बन सफलता पाना आसान नहीं है। इसीलिए तो कहा जाता है सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, उसके लिए तो आपको मेहनत करना पड़ती है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com

 
 
 

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