top of page
  • Writer's pictureNirmal Bhatnagar

ताक़त से नहीं प्रेम से जीतें…

Feb 7, 2024

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…



आईए दोस्तों, आज के लेख की शुरुआत एक कहानी से करते हैं। बात कई साल पुरानी है, शिवपुर की तंग गलियों में एक ताले-चाबी की दुकान थी। वहाँ के लोग उस दुकान पर नये ताले ख़रीदने और कभी-कभी चाबी गुम हो जाने पर डुप्लीकेट चाबी बनवाने भी आया करते थे। दुकान के अंदर ढेर सारे ताले-चाबियों के साथ बहुत से औज़ार भी रखे हुए थे। इन्हीं औज़ारों में से एक भारी-भरकम हथौड़ा भी था, जो कभी-कभार ताले तोड़ने के काम आता था।


वैसे तो इस हथौड़े का प्रयोग यदा-कदा ही हुआ करता था। लेकिन ताले को तोड़ने के लिए मारी गई ज़ोरदार चोट उसको भी नुक़सान पहुँचाया करती थी। वह अक्सर चाबियों को बहुत ध्यान से देखते हुए सोचा करता था कि आख़िर इन चाबियों के पास ऐसी कौन सी ख़ूबी है जिससे यह बड़े से बड़े और छोटे से छोटे ताले को एक ही बार में बिना तकलीफ़ के खोल देती है, जबकि मुझे इसके लिए कई बार १०-१५ प्रहार करने पड़ते हैं?


एक दिन एक बड़े और मज़बूत ताले को तोड़ते वक़्त अचानक ही हथौड़े का हैंडल टूट गया। जिसके कारण हथौड़े को काफ़ी दर्द सहना पड़ा। उसने उसी पल चाबी से इस विषय में चर्चा करने का निर्णय लिया और दुकान मंगल होने के पश्चात अपने पास ही बैठी छोटी सी चाबी से बोली, ‘बहन, यह बताओ कि आख़िर तुम्हारे अंदर ऐसी कौन सी विशेष शक्तियाँ हैं जिनके कारण तुम ज़िद्दी से ज़िद्दी ताले को भी बड़ी आसानी से, एक ही पल में खोल देती हो?’ प्रश्न सुनते ही चाबी मुस्कुराने लगी। उसे बीच में टोकते हुए हथौड़े ने कहा, ‘हँसो मत, मैं वाक़ई में इसका राज़ जानना चाहता हूँ। मैं इतना बलशाली हूँ लेकिन उसके बाद भी असफल हूँ और तुम इतनी छोटी और कमजोर हो; उसके बाद भी एक पल में ही अपने से कई गुना ज़्यादा बलशाली ताले को खोल देती हो।’


इस बार चाबी मुस्कुराई और बोली, ‘हथौड़े भैया, मेरी बात का बुरा ना मानना, तुम ताले को खोलने के लिए बल का प्रयोग करते हो अर्थात् तुम उसे चोट पहुँचाकर खोलने का प्रयास करते हो। बल प्रयोग या प्रहार करने से ताला खुलता नहीं टूट जाता है। मेरा तरीक़ा आपके तरीक़े से बिलकुल भिन्न है। मैं उसे तोड़ने नहीं, खोलने का प्रयास करती हूँ। इसलिए मैं उसके मन में उतर कर उसके हृदय को स्पर्श करती हूँ; उसके दिल में अपनी जगह बनाती हूँ आर इसके बाद जैसे ही मैं उससे खुलने का निवेदन करती हूँ, वह फ़ौरन खुल जाता है।


दोस्तों, साधारण सी लगने वाली यह बात असल में बहुत गहरी है। मनुष्य का सामाजिक और सांसारिक जीवन भी बिलकुल ऐसा ही है। यहाँ आप लोगों को ताक़त के बल पर नहीं जीत सकते हैं और ना ही ज़बरदस्ती उन पर अपना अधिकार जमा सकते हैं क्योंकि अगर आप लोगों पर अपने विचार ज़बरदस्ती लादने का प्रयास करेंगे या फिर उन्हें किसी भी तरह मजबूर कर अपना बनाने का प्रयास करेंगे, तो नतीजा ताले को हथौड़े से तोड़ने के समान ही होगा। अर्थात् आप रिश्तों की डोर को तोड़कर व्यक्ति की उपयोगिता को हमेशा के लिए नष्ट कर देंगे। इसके विपरीत अगर आपने यही प्रयास प्रेम पूर्वक किया तो आप निश्चित तौर पर उनका दिल जीत कर उन्हें सदा के लिए अपना मित्र बना लेते। अर्थात् प्यार से दिल में उतर कर आप उनकी उपयोगिता को कई गुना बढ़ा सकते हैं। इसलिए दोस्तों, हमेशा याद रखियेगा, ‘हर एक चीज जो बल से प्राप्त की जा सकती है, उसे प्रेम से भी पाया जा सकता है। लेकिन हर एक जिसे प्रेम से पाया जा सकता है, उसे बल से नहीं प्राप्त किया जा सकता।’


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

2 views0 comments
bottom of page