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दर्द की लहरों में छुपे होते हैं आत्म-विकास के संकेत…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • May 5, 2025
  • 3 min read

May 5, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है...

दोस्तों, जीवन की अपनी यात्रा से मैंने एक बड़ी महत्वपूर्ण बात सीखी है, इसमें सुख और दुख, दोनों ही साथी हैं। कभी हम ख़ुशियों की रौशनी में जीते हैं , तो कभी दर्द के अंधकार में ख़ुद को अकेला महसूस करते हुए। लेकिन अगर आज मैं पलटकर अपने जीवन को देखता हूँ तो एक बड़ी विचित्र बात पाता हूँ, दर्द के अंधकार ने ही मुझे निखारा है; बेहतर बनाया है। इसलिए मैं हमेशा कहता हूँ कि अक्सर दर्द की लहरों में ही आत्म विकास के संकेत छुपे होते हैं।


हालाँकि दुख या कठिन दौर में अक्सर कुछ पल ऐसे आते हैं जब हमें सब कुछ ख़त्म सा होता नज़र आता है। हमें लगता है कि हमारे संबंध, हमारे सपने, हमारी प्राथमिकताएँ, हमारी इच्छाओं के अंत का समय आ गया है। लेकिन वही अंतिम पल हमारे भीतर छिपी असीम क्षमताओं और शक्तियों को हमारे समक्ष उजागर करते हैं। याने यही क्षण हमें सिखाते हैं कि हम कितने मजबूत हैं, और कितनी संभावनाएँ अभी हमारे भीतर बाकी हैं।


दूसरे शब्दों में कहूँ तो दुख और कठिन दौर में होश ना खोना और सजगता और सकारात्मकता के साथ हर दिन जीने का मापदंड बनाना, आपको नवीन संभावनाओं को पहचानने के लिए तैयार करता है। प्रसिद्ध लेखिका ब्रायना विएस्ट कहती हैं कि ‘अपने दिन को केवल काम या तनाव के आधार पर देखने के स्थान पर उन सकारात्मक कदमों से देखना चाहिए जो आपने अपने विकास के लिए उठाएँ हैं।’ जी हाँ, जब आप अपने जीवन के हर दिन को किसी को मुस्कान देने में, थोड़ी देर ध्यान करने में, कोई अच्छी आदत अपनाने में, या किसी के लिए मददगार बनने में लगाते हैं, तब ये सभी बातें हमारी मानसिकता को सकारात्मक बनाती हैं और हमें लगातार प्रगति की ओर ले जाती हैं।


लेकिन अक्सर लोग उपरोक्त दृष्टिकोण के विपरीत यह मानते हुए जीवन जीते हैं कि सफलता केवल विशेष प्रतिभा वालों को मिलती है। परंतु सच्चाई यह है कि उत्कृष्टता केवल कौशल नहीं है, बल्कि एक दृष्टिकोण है। जब हम अपने हर काम को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करते हैं, तो वह साधारण सा काम भी असाधारण बन जाता है। यदि हम अपने दैनिक जीवन में उत्कृष्टता का दृष्टिकोण रख लें, तो हर दिन हमें सफलता की ओर ले जाता है। फिर चाहे वह नौकरी हो, परिवार की जिम्मेदारी हो या फिर खुद का आत्म-विकास। इसी बात को समझाते हुए मेरे गुरु श्री राजेश अग्रवाल जी ने कहा है कि “सफलता प्रतिभा की अपेक्षा दृष्टिकोण पर अधिक निर्भर करती है।”


एक बात और आपसे कहना चाहूँगा, जीवन में प्रेम की कमी आपको औपचारिक और दिखावटी जीवन जीने के लिए मजबूर करती है। इसलिए कठिन और दुख भरे समय में भी दिल को सुकून देने वाले मजबूत रिश्तों को बनाए रखिए। भावनात्मक रूप से मजबूत रहना भी आपको कठिन और दुख भरे समय में, सफल होने के मौकों को पहचानने का अवसर देगा।


अंत में इतना ही कहना चाहूँगा कि जीवन में जब दर्द आए, तो उससे भागिए मत, उसे समझिए। तभी आप उसमें छिपे जीवन को बेहतर बनाने वाले पाठ और जीवन को बेहतर बनाने वाले अवसर को पहचान पायेंगे। इसके लिए अपने हर दिन का आकलन उन अच्छी बातों से कीजिए जो आपने खुद को बेहतर बनाने के लिए की हों।


उत्कृष्टता को आदत बनाइए, रिश्तों में प्रेम की बुनियाद को मज़बूत कीजिए और सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीना शुरू कीजिए क्योंकि जब हम सही दृष्टिकोण के साथ जीवन जीते हैं, तब हर कठिनाई हमें ऊँचाई की ओर ले जाने वाली सीढ़ी बन जाती है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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