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  • Nirmal Bhatnagar

दुनिया को बेहतर बनाना है तो दूर करें खुद की कमियाँ…

Dec 12, 2022

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, अगर इस दुनिया में सबसे आसान काम कोई है तो वह है दूसरों की गलती निकालना, दोष देना और फिर उनको सुधारने का प्रयास करना। अगर इसी स्थिति को दूसरे पहलू से देखा जाए तो ऐसे लोग खुद को पूर्ण ज्ञानी मानते हुए अपना पूरा ध्यान दूसरों की ग़लतियाँ निकालने और फिर उन्हें सुधारने का प्रयास करने में लगाते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो उनका लेना-देना सही-ग़लत से ज़्यादा, अपनी बात मानने के लिए दूसरों को बाध्य करना रहता है, जो मेरी नज़र में कहीं से भी सही नहीं है, बल्कि इसे उनकी अज्ञानता से अधिक कुछ भी मानना ही नहीं चाहिए।


एक आँकड़ा बताता है कि इस दुनिया में 90 प्रतिशत से ज़्यादा लोग उपरोक्त आदत के शिकार हैं और मैं ऐसे लोगों को भीड़ का हिस्सा मानता हूँ। इन लोगों से अगर आप थोड़ी सी बात करेंगे तो पाएँगे कि यह लोगों, परिस्थितियों, प्रशासन, सरकार, परिवार आदि सभी में कमियाँ देखते हैं। ऐसे लोग सामान्यतः आपको एक-दूसरे को समझाते हुए जहाँ-तहाँ दिख जाएँगे। जैसे परिवार के एक सदस्य को दूसरे सदस्य में ढेर सारी कमियाँ नज़र आती हैं और वह अपना पूरा समय उनकी कमियों को निकालने, उन्हें बताने और फिर उन्हें दूर करने के लिए समझाने में बर्बाद कर देते हैं। अगर इसके बाद भी सामने वाला उनके अनुसार नहीं समझा तो वे अपना सारा मूड ख़राब कर बैठ जाते हैं। आप स्वयं सोचकर देखिएगा आज तक इससे किसे क्या लाभ मिला है?


लेकिन अगर दोस्तों, आप का लक्ष्य, ‘तुम ऐसा करो या ऐसा ना करो अथवा तुम्हारे लिए यह करना ठीक रहेगा।’ के स्थान पर खुद को बेहतर बनाना या अपनी असीमित क्षमताओं को खोज या पहचान कर उन्हें विकसित करना है, तो आपको सबसे पहले खुद के अंदर झांक कर देखना होगा कि कहीं आप स्वयं उपरोक्त बीमारी के शिकार तो नहीं हैं? क्यूँकि दोस्तों, खुद की असीमित क्षमताओं को पहचानना या उन्हें विकसित करना उपरोक्त आदत को छोड़े बग़ैर सम्भव नहीं है। उपरोक्त आदतें ज्ञानी नहीं बल्कि अज्ञानी होने की निशानी है।


जी हाँ साथियों, ज्ञानी व्यक्ति की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि वह अपना पूरा समय खुद को बेहतर बनाने के लिए लगाता है और दूसरों को तब तक कोई भी सलाह नहीं देता, जब तक वह स्वयं ना पूछे। वह तो मौन में भी मस्त रहना जानता है। वह अपना हर कदम खुद को खोजने या बेहतर बनाने के लिए उठाता है। इन लोगों को मैं ‘क्लास कैटेगरी’ का मानता हूँ। इनकी संख्या इस दुनिया में 10 प्रतिशत से अधिक नहीं है। यह लोग जब भी प्रयास करते हैं, दूसरों को नहीं, खुद को सुधारने के लिए करते हैं।


तो आइए साथियों, आज ही से हम खुद को बेहतर बनाने या क्लास कैटेगरी के 10 प्रतिशत लोगों में लाने के लिए एक निर्णय लेते हैं। आज से हम खुद को समझदार और चतुर व दूसरों मूर्ख मानने के स्थान पर अपना समय खुद की कमियों को पहचान कर उन्हें दूर करने, कुछ नया सीखने में लगाएँगे। सम्पूर्ण जीवन का एकमात्र उद्देश्य, ‘स्वयं का निर्माण करना है।’ जी हाँ, बिना खुद को सुधारे इस समाज को बेहतर और त्रुटि रहित बनाना, उसकी कमियों को दूर करना सम्भव नहीं है। इसीलिए तो शायद कहा गया है, ‘हम सुधरेंगे तो जग सुधरेगा !!!’


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com

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