दूसरों की राय आपका मूल्य तय नहीं करती !!!
- Nirmal Bhatnagar

- Jan 30
- 3 min read
Jan 30, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, आज मैं आपसे एक ऐसी बात साझा करना चाहता हूँ जो सुनने-समझने और अपनाने में सरल होने के साथ-साथ हमारे जीवन की दिशा को बदल देने की क्षमता रखती है। अक्सर मैंने देखा है कि हम ख़ुद को दूसरों की नजरों में ढूँढने लगते हैं और धीरे-धीरे ख़ुद से ही दूर हो जाते हैं। याने हम अपना मूल्य उन लोगों की राय से तय करते हैं, जो अक्सर हमें सही से जानते ही नहीं हैं और इनमें से कई तो ऐसे होते हैं जिन्होंने हमें कभी सच में देखा ही नहीं होता है। याने जिन लोगों ने हमारी मेहनत नहीं देखी; जिन लोगों ने हमारी प्रतिभा को नहीं पहचाना; उन्हीं की नज़रों से हम ख़ुद को आँकते हैं। यहीं से हमारे जीवन में भ्रम पैदा होता है और हम अपनी आत्म-पहचान याने सेल्फ इमेज को नुक़सान पहुँचाना शुरू कर देते हैं। जो सीधे तौर पर हमारे जीवन को प्रभावित करती है।
जी हाँ, आत्म-पहचान याने सेल्फ इमेज, जिसके विषय में आज हम विस्तार से चर्चा कर रहे हैं, हमारे जीवन को सीधे तौर पर अच्छे और बुरे दोनों रूपों में प्रभावित करती है। अगर आप अपनी अच्छी सेल्फ इमेज रखेंगे तो आप जीवन में सकारात्मक रूप से आगे बढ़ेंगे और अगर सेल्फ इमेज सही नहीं होगी तो जीवन में आपको अनावश्यक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। चलिए, इसी बात को हम हैरी पोर्टर की लेखिका जे. के. रोलिंग की कहानी से समझने का प्रयास करते हैं।
आज के समय की सफलतम लेखिका जे. के. रोलिंग एक समय बेरोज़गार थीं, वे आर्थिक संकट में थीं और अपनी किताब की पांडुलिपि लेकर प्रकाशकों के दरवाज़े खटखटा रही थीं और हर जगह उन्हें एक ही जवाब सुनने को मिल रहा था कि “यह कहानी नहीं चलेगी।”, “बच्चे इतनी मोटी किताब नहीं पढ़ेंगे।” लेकिन उन्होंने लोगों के शब्दों को अपनी आत्म पहचान याने सेल्फ इमेज को नुकसान नहीं पहुंचाने दिया और अपनी सोच के आधार पर आगे बढ़ती रही, जिसके परिणामस्वरूप “हैरी पॉटर” जैसी सफलतम कहानी का जन्म हुआ। दोस्तों, उन्होंने अपने भीतर की कहानी को सुना। अपनी कल्पना पर भरोसा किया और वही भरोसा उनका जादू बन गया।
दोस्तों, जब आप खुद को दूसरों के शब्दों से परिभाषित करते हैं, तो आप धीरे-धीरे अपनी आवाज़ खो देते हैं। आप वही बनने लगते हैं, जो लोग आपसे चाहते हैं, न कि वह, जो आप वास्तव में हैं और फिर एक दिन आप रुककर सोचते हैं, “मैं इतना थका क्यों हूँ?” क्योंकि आप अपनी ज़िंदगी नहीं, किसी और की अपेक्षाएँ जी रहे होते हैं।
इसलिए ज़रूरी है कि आप उस राह पर चलें, उस सुनहरे धागे पर चलें, जो आपको आपकी असली कहानी तक ले जाता है। वह धागा क्या है? वह है आपकी रुचि, आपकी जिज्ञासा, आपकी बेचैनी, और वह आवाज़ जो आपको भीतर से बार-बार पुकारती है। उस आवाज़ को अनदेखा मत कीजिए।
दोस्तों, आपके भीतर भी जे. के. रोलिंग की तरह वह जादू है। लेकिन वह तब तक बाहर नहीं आएगा, जब तक आप अपनी भावनाओं, अपने ज्ञान और अपनी यादों का अनुसरण नहीं करेंगे। वही अनुभव, वही दर्द, वही संघर्ष, जो कभी आपको कमज़ोर लगते थे, असल में वही आपकी ताक़त बनते हैं।
आज मैं आपसे एक छोटा-सा आग्रह करता हूँ, खुद को उन लोगों की नज़रों से देखना बंद करिए, जिन्होंने आपको कभी नहीं समझा। खुद को उन शब्दों से बनाना बंद करिए, जिनमें आपकी सच्चाई नहीं थी और उस रास्ते पर चलिए, जो आपको बार-बार आपकी आत्मा की ओर लौटने को कहता है क्योंकि जिस दिन आप अपनी कहानी को स्वीकार कर लेते हैं, उसी दिन आपका असली जीवन शुरू होता है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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