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  • Writer's pictureNirmal Bhatnagar

धैर्य और संयम से जीतें विपरीत दौर में भी…

Feb 26, 2024

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…



दोस्तों, विपरीत से विपरीत चुनौती भरे समय में डरने या घबराने के स्थान पर संयम और धैर्य से काम लेना, आपको विजेता बनाता है। इसीलिए हमारे यहाँ बचपन से ही सिखाया जाता है कि ‘डर के आगे जीत है!’ चलिए दोस्तों अपनी बात को मैं आपको एक कहानी से समझाने का प्रयास करता हूँ।


गाँव के बाहरी इलाक़े में मंगू नाम का एक बहुत ही अलसी लेकिन बुद्धिमान नाई रहा करता था। वह हमेशा आईने के सामने बैठे-बैठे अपने बाल संवारते हुए पैसे कमाने के आसान रास्तों के विषय में सोचा करता था। इसी वजह से वह कभी भी अपनी बुद्धि का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता था। मंगू के आलसीपन से परेशान होकर एक दिन उसकी बूढ़ी माँ ने उसे घर से निकाल दिया। मंगू कुछ देर तक तो ख़ुद को अपमानित महसूस करता रहा। लेकिन जल्द ही उसे एहसास हो गया कि वह अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल ना करके कुल मिलाकर अपना समय और जीवन ही बर्बाद कर रहा है। एहसास होते ही वह एक पेड़ के नीचे बैठकर भविष्य की संभावनाओं और योजनाओं पर विचार करने लगा। साथ ही वह ईश्वर की भी प्रार्थना करने लगा कि वे उसे सही मार्ग दिखाएँ।


अभी वह इसी उधेड़बुन में खोया हुआ था कि अचानक ही उसका सामना एक राक्षस से हो गया। राक्षस नाई के रूप में अपने शिकार को देख बहुत खुश हो गया और तरह-तरह की डरावनी आवाज़ें निकालते हुए नाचने लगा। विशालकाय डरावने राक्षस को देख मंगू नाई बहुत डर गया, पर किसी तरह उसने अपने डर को क़ाबू में लिया और राक्षस के साथ ही नाचने लगा। मंगू को ख़ुशी-ख़ुशी नाचते देख राक्षस अचंभित रह गया। उसने मंगू से पूछा, ‘तुम क्यों नाच रहे हो?’ मंगू साहस बटोर कर हंसते हुए बोला, ‘मेरी छोड़ो तुम अपनी बताओ क्योंकि मेरी बात सुनने के बाद तुम ख़ुशी मनाने लायक़ ही नहीं रहोगे।’ राक्षस मंगू के आत्मविश्वास को देख हैरान था। उसने एक बार फिर मंगू को डराने का प्रयास करते हुए कहा, ‘मैं इसलिए नाच रहा हूँ क्योंकि आज मुझे तुम्हारा नरम-नरम मांस खाने को मिलेगा। वैसे, तुम क्यों नाच रहे हो?’ राक्षस की बात सुन डरने के स्थान पर नाई ठहाका लगाते हुए बोला, ‘मेरे पास इससे भी बढ़िया कारण है। हमारा देश का राजकुमार सख्त बीमार है। चिकित्सकों ने उसे एक सौ एक राक्षसों के हृदय का रक्त पीने का उपचार बताया है। महाराज ने मुनादी करवाई है जो कोई यह दवा लाकर देगा, उसे वे अपना आधा राज्य देंगे और राजकुमारी का विवाह भी उससे कर देंगे। मैंने सौ राक्षस तो पकड़ लिए हैं और १०१ वें राक्षस के रूप में अब तुम मेरी गिरफ़्त में हो।’ इतना कहते हुए मंगू ने अपनी जेब से आईना निकाला और उसे राक्षस की आँखों के सामने कर दिया। आईने में ख़ुद का प्रतिबिंब देख राक्षस डर गया। उसे लगा कि वह वाक़ई मंगू की गिरफ़्त में आ गया है। आतंकित राक्षस ने थर्-थर् काँपते हुए मंगू से विनती की, कि वह उसे छोड़ दे, पर मंगू ने नाटक करते हुए उसे डाँट दिया। तब राक्षस ने मंगू को लालच दिया कि वह उसे सात राज्यों के ख़ज़ाने के बराबर धन देगा, लेकिन मंगू टस से मस नहीं हुआ। राक्षस ने एक प्रयास और करते हुए कहा, ‘शायद तुम्हें मेरी बातों पर यक़ीन नहीं है। चलो मैं तुम्हें तुम्हारे घर के पीछे, नीम के पेड़ के नीचे गड़ा ख़ज़ाना दिखाता हूँ। अगर तुम चाहोगे तो मैं पलक छपकते ही उस ख़ज़ाने को तुम्हारे घर पर पहुँचा दूँगा। इतना कहते हुए राक्षस ने पेड़ को जड़ सहित उखाड़ दिया और उसके नीचे से हीरे-मोतियों से भरे सोने के सात कलश बाहर निकाल दिये, जिसकी चमक से मंगू की आँखें चौंधिया गई। लेकिन मंगू ने अपनी भावनाओं को छिपाते हुए बड़े रौब से उसे आदेशात्मक स्वर में कहा, ‘जाओ इस ख़ज़ाने को मेरे घर पर रख कर आओ।’ राक्षस ने पलक झपकते ही ख़ज़ाने को मंगू के घर पहुँचा दिया। इसके बाद जब राक्षस ने मंगू को आज़ाद करने के लिए कहा तो पहले उसने राक्षस से अपने खेत की फसल कटवाई, उसके बाद उसे चालाकी के साथ उल्टा आईना दिखा कर आज़ाद करने का नाटक किया। राक्षस ने बड़े गौर से आईने को कई बार देखा और बार जब उसे उसमें अपनी छवि नहीं दिखी तो वह खुश हो गया और नाचता-गुनगुनाता वहाँ से चला गया। उसके जाते ही मंगू ने राहत की साँस ली।


दोस्तों, अगर आप उपरोक्त कहानी पर गौर करेंगे तो पायेंगे कि मंगू ने विपरीत स्थिति को सिर्फ़ और सिर्फ़ धैर्य और संयम के बल पर अपने पक्ष में किया था। दोस्तों, जब भी आप विपरीत परिस्थिति को चुनौती मान कर उसका डटकर साहस के साथ मुक़ाबला करते हैं, आप जीत जाते हैं। इसीलिए तो कहा जाता है, ‘धैर्य और संयम से बड़ी से बड़ी मुसीबतें भी टल जाती हैं और साहस से बड़ी कोई शक्ति नहीं होती है !!!’


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

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