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  • Writer's pictureNirmal Bhatnagar

निर्णय लेना, उसके सही होने से ज़्यादा ज़रूरी है…

June 25, 2023

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, ट्रेनिंग और काउन्सलिंग के अपने कैरियर में मैंने अक्सर देखा है कि लोगों के परेशान, दुखी या असहज रहने की सबसे बड़ी वजह निर्णय ना लेना है। जी हाँ, अनिर्णय की स्थिति में रहना ही वह कारण है जिसकी वजह से सामान्यतः लोग अपना स्वयं का नुक़सान या अहित कर लेते हैं। उदाहरण के लिए तबियत ठीक महसूस ना होने के बाद भी डॉक्टर को ना दिखाना और बाद में ज़्यादा परेशान होना अथवा कार्यों को अंतिम तिथि तक टालना और तनाव मोल लेना, आदि।


अगर आप मेरी बात से सहमत ना हों तो अपने अतीत में या फिर किसी असफल व्यक्ति के जीवन में झांक कर देख लीजिएगा। आप पाएँगे कि हर असफलता के पीछे की मुख्य वजह सही समय पर, सही निर्णय ना ले पाना है। जी हाँ साथियों, सफलता के लिए सही निर्णय लेने से ज़्यादा ज़रूरी सही समय पर निर्णय लेना है। अपनी बात को मैं आपको धीरूभाई अम्बानी के जीवन से जुड़े एक किस्से से समझाने का प्रयास करता हूँ। एक बार एक पत्रकार ने धीरूभाई से प्रश्न किया, ‘सर, आप जीवन में कब सफल हुए थे?’ प्रश्न सुनते ही धीरूभाई बोले, ‘गैस स्टेशन पर काम करते वक्त जिस वक्त मेरे मन में यह विचार आया कि एक दिन मैं भी यह व्यवसाय करूँगा, उस दिन।’ उनका जवाब सुन पत्रकार उलझन में पड़ गया और बोला, ‘लेकिन आपने तो उसके कई वर्षों बाद व्यवसाय करना शुरू किया था?’ इस बार धीरूभाई मुस्कुराए और बोले, ‘हाँ यह सही है, लेकिन मैं सफल तो उसी दिन हुआ था जिस दिन मैंने निर्णय लिया था, बाक़ी तो प्रोसेस में लगने वाला टाइम था।’ उनके जवाब से पत्रकार अचंभित था। उसने बात आगे बढ़ाते हुए अगला प्रश्न किया, ‘तो फिर मैं आपसे पूछना चाहूँगा कि आपको यह कैसे पता चला कि जो निर्णय आप ले रहे हैं वह सही है।’ धीरूभाई पूरी गम्भीरता के साथ बोले, ‘मैं इस पचड़े में पड़ा ही नहीं, मैंने तो बस जब ज़रूरत थी तब निर्णय लिए और उन्हें सही साबित करने के लिए अथक प्रयास किए। जिन निर्णयों से मुझे मनमाफ़िक परिणाम मिले मैंने उन्हें दोहराया और जिनमें असफलता मिली, उन्हें हमेशा के लिए वहीं छोड़ दिया।’


वाह!!! क्या जवाब था, दोस्तों अगर आप ध्यान से उनके दिए गए जवाब का आँकलन करेंगे तो पाएँगे कि उसी में उनकी सफलता का मूल मंत्र छुपा हुआ है। लेकिन अगर आप इसे साधारण नज़रिए से देखेंगे तो आपको लगेगा कि इसमें तो कोई नई बात नहीं है। यह तो सब हमें पहले से पता है, तो मैं आपसे कहूँगा कि जानने के बाद भी रोज़मर्रा के जीवन में ज़्यादातर समय आप किंतु-परंतु, लेकिन, लोग क्या कहेंगे, लोग क्या सोचेंगे आदि सोच कर अनिर्णय की स्थिति में क्यों रहते हैं? याद रखिएगा, अनिर्णय में रहना, एक प्रकार से असफलता और खुद के अहित को चुनना है।


दोस्तों, अगर आप अपने जीवन में दुःख से दूर रहकर सफल होना चाहते हैं, तो आज से निर्णय लेने का कोई मौक़ा छोड़िएगा मत और इसके लिए खुद को बार-बार याद दिलाइएगा, ‘यह ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है कि लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं? महत्वपूर्ण तो यह है कि मैं स्वयं अपने बारे में क्या सोचता हूँ?’ यह प्रश्न आपको अनावश्यक रूप से निराश होने और नकारात्मक सोचने से बचाएगा और साथ ही नकारात्मक भावों को आपके ऊपर हावी नहीं होने देगा। तो आइए दोस्तों, मझदार में फँसे नाविक के समान अनिर्णय की स्थिति में फँसे रहने के स्थान पर, उचित-अनुचित के फेर में फँसे बिना, अपने विवेक के आधार पर निर्णय लेना शुरू करते हैं क्योंकि हम जानते हैं कि उचित और अनुचित मार्ग के निर्धारण में समय गँवाने के स्थान पर जीवन के मूलभूत उद्देश्यों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना ही इस दुनिया की सबसे मूल्यवान चीज़, समय को साधने में मदद करता है।


सफलता के लिए हमें आज से ही निम्न तीन बातों को अति आवश्यक रूप से अपने जीवन में उतारना होगा। पहली - फैसले लेना, दूसरी - साहसी फैसले लेना और अंत में तीसरी बात, सही समय पर फैसले लेना, जिससे हम अपने जीवन को बेहतर बना सकें।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर


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