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  • Nirmal Bhatnagar

नेकी कर, दरिया में डाल

Jan 10, 2023

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

हाल ही में एक सज्जन से मुलाक़ात हुई। मुलाक़ात के दौरान हुई बातचीत में उनका पूरा फ़ोकस सिर्फ़ यह बताने में था कि आज तक उन्होंने क्या-क्या दान किया है और किस-किस तरीक़े से लोगों की मदद की है। शुरू में तो मुझे उनकी बातों को सुनने में बड़ा मज़ा आ रहा था लेकिन थोड़ी देर बाद मुझे उसमें उनका दम्भ या शायद दूसरों से तारिफ़ सुनने की भूख नज़र आने लगी। जब मैंने उनसे इस विषय में इशारों में बात करते हुए कहा, ‘सर कहते हैं, जब दाएँ हाथ से दान किया जाता है तो बाएँ हाथ को भी पता नहीं चलना चाहिए। इस विषय में आपके क्या विचार हैं।’ तो उन्होंने कहा, ‘सर!, मैं आपकी इस बात से सहमत नहीं हूँ।’ मेरे क्यों पूछने पर वे बोले, ‘जब आप कोई गलती करते हैं तो वह पूरी दुनिया में फैला दी जाती है, लेकिन कहीं भी, कोई भी आपकी अच्छाई पर बात नहीं करता है।’ उनके उत्तर पर कोई भी प्रतिक्रिया देने के स्थान पर मैंने उनसे अगला प्रश्न किया, ‘इसका अर्थ यह हुआ कि अगर लोग हमारी अच्छाई पर बात करेंगे तो ही हम अच्छे होंगे?’ तो वे बोले, ‘लोग हमारे बारे में जो जानेंगे, उसी से हमारे बारे में धारणा बनाएँगे। इसलिए जो किया है वह बताना चाहिए। वैसे भी अगर आपने अच्छा किया है तो लोगों को बताने में क्या नुक़सान है?’


वैसे तो मेरे मन में और भी प्रश्न आ रहे थे जैसे, अगर आप गलती करते तो भी क्या उसे इसी तरह सबको बताते है? लेकिन मैंने बात को वही खत्म करना उचित समझा। वैसे समाज में एक और तरह के लोग पाए जाते हैं जो मृत्योपरांत स्वर्ग जाने के उद्देश्य से अच्छा कार्य करते हैं और उसका लेखा-जोखा भी रखते हैं। वे भूल जाते हैं कि ईश्वर ने हमें इस दुनिया में कर्म फलों का निर्धारण करने नहीं, अपितु कर्म करने के लिए भेजा है। वैसे भी खुद के कर्मों के फलों का निर्धारण हम नहीं कर सकते हैं, यह कार्य प्रकृति या परमपिता परमेश्वर का है। याद रखिएगा, जो मनुष्य सद्कार्य या अच्छे कर्म या फिर दूसरों की मदद या भला कर भूल जाते हैं, उनका हिसाब प्रकृति स्वयं किया करती है और जो लोग उसे खुद गिना करते हैं, उनके हिसाब को प्रकृति द्वारा भुला दिया जाता है।


दूसरे शब्दों में कहूँ तो, आप जो भी अच्छे या पुण्य कार्य करते हैं, प्रकृति स्वयं उन कार्यों का यथा योग्य फल हमें देती है फिर भले ही हमें अपना अच्छा कार्य याद रहे या नहीं। अगर आप वाक़ई इंसानियत या अच्छाई के साथ अपना जीवन जीना चाहते हैं तो बस एक बात याद रखिएगा, इंसान केवल कर्मों का खाता रख सकता है, उसका परिणाम घोषित नहीं कर सकता। यह अधिकार तो ईश्वर या प्रकृति ने अपने पास रखा है। जब आप परिणाम घोषित नहीं कर सकते अर्थात् किए गए कर्मों का फल क्या होगा इसका निर्णय नहीं ले सकते तो कर्मों का हिसाब रखने, उन्हें याद रखने, उसका गुणगान करने से क्या फ़ायदा?


अगर आप वाक़ई अच्छाई भरा जीवन जीना चाहते हैं तो आज से ही अपने जीवन को उसूलों के आधार पर जीना शुरू करें। जी हाँ साथियों, हमारे अपने जीवन जीने के कुछ उसूल होना चाहिए। जब आप उसूलों पर आधारित जीवन जीते हैं तो आप उसूलों के आधार पर कर्म करते हैं। अर्थात् उसूलों का होना आपके जीवन को दिशा देता है। साथ ही आपको बार-बार अपने कर्मों को परखना नहीं पड़ता कि मैंने सही किया है या नहीं और रही बात अंतिम परिणाम की, तो उसकी चिंता हमें करना ही नहीं है, वह प्रकृति का कार्य है। इसलिए सिर्फ़ लोगों का भला करो और भूल जाओ, उचित समय आने पर प्रकृति स्वयं आपको उसका उचित परिणाम या ईनाम देगी।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

dreamsachieverspune@gmail.com


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