top of page
  • Writer's pictureNirmal Bhatnagar

प्रतिकूल परिस्थिति को भी जिएँ पूर्णता के साथ…

Mar 8, 2023

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, आज एक प्रश्न के साथ लेख की शुरुआत करना चाहूँगा। बताइए, जीवन में आप अपना सर्वश्रेष्ठ कब देते हैं? अर्थात् सम्भावनाओं को उपलब्धियों में बदलने के लिए अपनी पूरी क्षमताओं का प्रयोग करने का प्रयास करते हैं? क्या कहा आपने, विपरीत समय या परेशानियों के दौर में? बिलकुल सही साथियों! जीवन में जब-जब विपरीत समय आया है, याने परिस्थितियाँ हमारे अनुकूल नहीं रही हैं, तभी हमने सभी कष्ट सहते हुए, प्रतिकूल क्षणों में बेहतर कार्य करते हुए अपने लक्ष्यों को पाया है। जी हाँ साथियों, प्रतिकूल परिस्थितियाँ, परेशानियाँ, कष्ट हमें जीवन के वास्तविक सत्य का अनुभव कराते हुए आगे बढ़ाते हैं।


दोस्तों, अगर आप मेरी बात से सहमत ना हों, तो एक बार अपने या अपने जानने, पहचानने वाले लोगों के जीवन को याद करके देख लीजिएगा। आप पाएँगे कि विपरीत स्थितियों, परेशानियों, कष्ट के दिनों में किए गए कार्यों ने ही हमारे जीवन के स्तर को सामान्य या उससे भी बेहतर बनाया है। इसकी मुख्य वजह विपरीत या प्रतिकूल समय या परिस्थितियों में हमारी सोच और कार्य करने की क्षमता में आया विशेष बदलाव होता है। जीवन में सकारात्मक रूप से आगे बढ़ने की प्रबल भावना या इच्छा हमें तमाम चुनौतियों के बाद भी बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित करती है।


दोस्तों, जिस तरह सम्मान, लोगों से मिली प्रेरणा या शाबाशी जीवन में आगे बढ़ने, कुछ बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित करते है ठीक उसी तरह असफलता, लोगों से मिला तिरस्कार, कष्ट पहले तो हमारे व्यक्तित्व को अंदर से निखार कर मज़बूत बनाता है और फिर हमें इन्हें बदलने के लिए आंतरिक ऊर्जा देकर अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए तैयार करता है। इसीलिए मैंने पूर्व में कहा था असफलता, विपरीत समय, चुनौतियाँ, दुःख भरे दिन ही असल में आपको बेहतर बनाते हैं, जीवन में कुछ बड़ा करने के लिए तैयार करते हैं।


इसलिए दोस्तों प्रतिकूल, विपरीत, चुनौती भरा समय या कष्ट आने पर घबराओ मत, बस सजग रहते हुए एक-एक छोटा कदम योजनाबद्ध तरीके से उठाओ। बिलकुल वैसे ही जैसे, संकरी गलियों, जानवरों के बीच, भीड़ भरे रास्तों, घने ट्राफ़िक या ट्राफ़िक नियमों के विरुद्ध अनाप-शनाप चल रहे वाहनों के बीच हम सावधानीपूर्वक अपनी गाड़ी निकालकर, समय से अपने गंतव्य तक पहुँचा देते हैं। दूसरे शब्दों में कहूँ दोस्तों, तो जिस तरह घनी अंधेरी रात चमकीली सुबह आने की निशानी होती है और हमें उस चमकीली सुबह से सर्वोत्तम लाभ लेने के लिए तैयारी करने का मौक़ा देती है। ठीक वैसे ही विपरीत समय, अच्छे या अनुकूल समय आने की निशानी होता है। यह समय खुद को आने वाली ख़ुशियों या सफलताओं के लिए तैयार करने का समय होता है। याद रखिएगा, जितना विपरीत समय होगा, जितनी असफलताएँ होंगी, उतनी ही बड़ी सफलता उसके पीछे-पीछे आएगी।


तो आइए साथियों, आज नहीं अभी से ही एक निर्णय लेते हैं कि जीवन में अब कभी भी विपरीत परिस्थिति, असफलता, कष्ट, दुःख याने प्रतिकूलता आने पर यह नहीं सोचेंगे कि ‘मैं अब क्या करूँ?’ या ‘अभी तो समय मेरे अनुकूल नहीं है।’ या फिर ‘मेरी तो क़िस्मत फूटी हुई है।’ और ना ही अब हम क़िस्मत बदलने या मौक़ा मिलने के लिए इंतज़ार करेंगे, अब तो बस हम इस जीवन में पूरे साहस और क्षमता के साथ अवसरों का निर्माण करेंगे ताकि विपरीत परिस्थितियों में जीवन को अच्छे से जी पाएँ।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर


1 view0 comments
bottom of page