प्रसन्नता ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है…
- Nirmal Bhatnagar

- Jun 18, 2025
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June 18, 2025
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, ना तो हममें से किसी को अपने पूर्वजन्म के बारे में पता है और ना ही हम अगले जन्म के विषय में कुछ जानते हैं। इसलिए मेरा मानना है कि जो कुछ भी हमारे हाथ में है वो यही जीवन है और यह जीवन एक-एक दिन कर रोज हमारे हाथों से फिसल रहा है। ठीक उसी तरह जैसे हर शाम सूरज अस्त होता है, ठीक वैसे ही पल-पल हमारी ज़िंदगी भी धीमे-धीमे ढलती जाती है। इसलिए दोस्तों यह आवश्यक है कि हम इस जीवन को सिर्फ़ काटे नहीं जिएँ, वह भी प्रसन्नता के साथ।
लेकिन कई बार हम सोचते हैं कि जब जीवन में सब कुछ ठीक हो जायेगा, तब ही हम खुश हो पायेंगे। अर्थात् जब हमारे पास सारे संसाधन होंगे, जीवन में किसी तरह की कोई कमी नहीं होगी, सब कुछ अच्छा चल रहा होगा, तब हम खुश हो जाएँगे। मेरी नजर में हमारी यही सोच, हमारी सबसे बड़ी भूल होती है। जिस तरह हमारे पास दुखी रहने की हज़ार वजहें होती हैं, ठीक वैसे ही हमारे पास ख़ुश रहने के भी हज़ार कारण होते हैं। बस आपको गहराई से, मन लगाकर इस विषय में सोचना होगा।
जी हाँ दोस्तों, जैसे सामान्य नजर से देखा जाये तो नीम के वृक्ष की पत्तियाँ कड़वी होती है, लेकिन अगर आप ध्यान से उसकी विशेषताओं को देखेंगे तो पायेंगे कि वही कड़वी पत्तियाँ कई औषधीय गुणों से भरपूर होती है। ठीक इसी तरह जीवन में भी कुछ घटनाएँ, अनुभव या संबंध हमें कटु लग सकते हैं, लेकिन उनसे मिली सीख हमारे जीवन को सकारात्मक रूप आगे बढ़ा सकती है। अभी भी सहमत ना हों दोस्तों, तो किसी नदी या तालाब के किनारे को याद करके देख लीजिएगा। वहाँ आपको कीचड़ भी नजर आएगा और सुंदर कमल भी। अब यह आपके ऊपर है कि आप कीचड़ को देख कर नाक सिकुड़ते हैं या कमल को देखकर प्रसन्न होते हैं। दूसरे शब्दों में कहूँ तो हमारी नज़र उस नज़ारे को अच्छा या बुरा बना रही है। ठीक इसी तरह दोस्तों, जीवन के प्रति हमारा दृष्टिकोण तय करता है कि हम दुखी रहेंगे या सुखी।
इसके साथ दोस्तों हमें एक और महत्वपूर्ण बात को हमें समझना होगा कि सुख हमेशा हमारे नियंत्रण में नहीं होता, पर प्रसन्नता निश्चित तौर पर हमारे भीतर की उपज है। जब हम यह मान लेते हैं कि बाहर की परिस्थितियाँ हमारे मूड और मन को तय करेंगी, तो हम हर समय दूसरों के और हालात के गुलाम बन जाते हैं। लेकिन जब हम यह स्वीकार करते हैं कि प्रसन्न रहना हमारी अपनी जिम्मेदारी है, तभी सच्चे अर्थों में हम आज़ाद होते हैं।
कभी-कभी छोटी-छोटी बातें, जैसे किसी की मुस्कान, सूरज की पहली किरण, बच्चों की हँसी, बरसात की बूंदें या किसी पुराने दोस्त की आवाज़, हमारी दिन भर की उदासी को मिटा सकती हैं। ज़रूरत है तो बस इन्हें देखने और महसूस करने की। अगर सहमत हों दोस्तों, तो आइए आज से एक नई शुरुआत करते हैं और निम्न बातों को अपने जीवन का हिस्सा बनाते हैं-
1) शिकायतें कम करें, धन्यवाद अधिक दें।
2) कीचड़ नहीं, कमल को देखें अर्थात् लोगों में बुराइयों को नहीं, बल्कि अच्छाइयों को देखें।
3) काँटे नहीं, गुलाब को महसूस करें अर्थात् जीवन में मिले नकारात्मक अनुभवों को याद करने के स्थान पर अच्छे और सकारात्मक पलों को अधिक समय दें।
4) बाहरी हालात नहीं, अपने भीतर की खुशी को प्राथमिकता दें।
क्योंकि दोस्तों हमारा जीवन रोज़ ढल रहा है पर हमारी मुस्कान उसे हर पल जीने लायक़ बनाती है। इसलिए दोस्तों सदैव प्रसन्न रहो क्योंकि यही आपकी सबसे बड़ी पूंजी है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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