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बीते कल के सबक से बनाएँ उज्ज्वल भविष्य…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Jun 27
  • 3 min read

June 27, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

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दोस्तों, हर इंसान का एक अतीत होता है; कुछ मीठी, तो कुछ खट्टी यादों से भरा। अर्थात् कई बार इसमें सफलताओं के मीठे अनुभव होते हैं तो कई बार असफलताओं या कठिन अनुभवों की सीख। कुल मिलाकर कहा जाए तो अतीत हमेशा अच्छे-बुरे अनुभवों से लबालब रहता है। अतीत के अच्छे अनुभव जहां ख़ुशी देते हैं, वहीं बुरे अनुभव हमें सिखाते हैं कि भविष्य में क्या नहीं दोहराना चाहिए। इसलिए मैं हमेशा कहता हूँ कि अतीत के बुरे अनुभव हमें ना सिर्फ़ मजबूत बनाते हैं बल्कि हमारे भविष्य को बेहतर दिशा देने का रास्ता दिखाते हैं।


लेकिन अक्सर हम अतीत के बुरे अनुभवों से भविष्य की दिशा देखने के स्थान पर अतीत याने भूतकाल की गलतियों में ही उलझे रह जाते हैं और सोचते हैं कि काश ऐसा न किया होता, वैसा ना कहा होता, आदि। इसके विपरीत याने अतीत को कोसने के स्थान पर अगर हमने इससे सीख लिया होता और उन ग़लतियों को दोहराने से बचते तो यकीनन हम बुद्धिमान कहलाते; बेहतर जीवन जीते।


इसी तरह दोस्तों, अगर हम अपनी कमजोरियों को भी पहचानकर, उन्हें दूर करना शुरू कर दें, तो निश्चित तौर पर हम बेहतर जीवन की ओर एक कदम और आगे बढ़ जाएँगे। याने अपने जीवन के स्तर को और ऊपर ले जाएँगे। इसीलिए सेल्फ रिफ्लेक्शन याने आत्मनिरीक्षण कर, अपनी सीमाओं को पहचानना और उन्हें चैलेंज करते हुए जीवन में आगे बढ़ना याने ख़ुद को पहचान कर रोज़ ख़ुद को बेहतर बनाना ही सेल्फ डेवलपमेंट याने आत्म विकास की राह पर आगे बढ़ना है। दूसरे शब्दों में कहूँ तो आत्म विकास याने सेल्फ डेवलपमेंट की असली नींव आत्मनिरीक्षण करना, खुद की सीमाओं को समझना, और उन्हें सुधारना है।


हमारा जीवन हमें एक और बड़ी सीख देता है, हमें अपने समय और अपनी खुशियों को उन चीज़ों पर बर्बाद नहीं करना चाहिए, जो हमारे नियंत्रण में नहीं हैं। कई बार हम मौसम, लोगों के व्यवहार, समाज की सोच, या दूसरों की प्रतिक्रिया जैसी बातों पर दुखी हो जाते हैं। लेकिन अगर हम समझ जाएं कि ये सब हमारे बस में नहीं है, तो हम अपनी मानसिक शांति और ऊर्जा को बचा सकते हैं। इसीलिए कहा जाता है, “सबसे बुद्धिमान व्यक्ति वह है, जो अनियंत्रित परिस्थितियों पर अपनी शांति नष्ट नहीं करता।”


इसी बात को सिग्मंड फ्रायड ने समझाते हुए कहा था, “आज जो संघर्षपूर्ण दिन लगते हैं, वो ही भविष्य में सबसे सुंदर स्मृतियाँ बनते हैं।” दोस्तों, यह वाक्य जितना सरल लगता है, उतना ही गहरा भी है । ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि आज जो मुश्किलें हैं, वही कल आपके आत्मबल का आधार बनेंगी। इसलिए, संघर्ष से डरिए मत, उसे स्वीकार कीजिए, क्योंकि वही आपको संवारता है।


दोस्तों, अगर आप वाकई एक बेहतर जीवन जीना चाहते हैं तो अपने भूतकाल को बार-बार दोहराने की जगह, एक किताब की तरह पढ़ें। अपनी कमजोरियों को स्वीकारें और अपनी गलतियों को अपना गुरु बनायें, जिससे हम अपने अतीत से सीखते हुए आत्म-विकास की यात्रा पर आगे बढ़ सकें। इस यात्रा में सिर्फ़ उन बातों पर ध्यान दें जो आपके हाथों में हैं, बाक़ी को ईश्वर पर छोड़ दें। इसके साथ ही हर दिन की शुरुआत आभार के साथ कीजिए, और जो कुछ भी मिला है, उसके लिए ईश्वर को धन्यवाद दीजिए। याद रखियेगा, अतीत सिर्फ़ आपका मार्गदर्शक है, लेकिन वर्तमान आपका कर्म क्षेत्र। अगर आप अतीत से सही मार्गदर्शन लेकर वर्तमान के कर्म क्षेत्र में अच्छे से कार्य करेंगे तो आपको अच्छे भविष्य का पुरस्कार मिलेगा। इसलिए, जो बीत गया, उसमें जियो मत, उससे सीखो, अपने आज को संवारो और कल पर मुस्कराओ।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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