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बुद्धि से लें काम…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Nov 27
  • 3 min read

Nov 27, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

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दोस्तों, आज हम ऐसे युग में जी रहे हैं जहाँ हमारी फिंगर टिप्स याने हमारी उँगलियों पर दुनिया भर की सारी जानकारी उपलब्ध है। जी हाँ, आज के युग में किताबों, लेखों और समाचार पत्रों के अतिरिक्त इन्फॉर्मेशन का भंडार हमें फ़ोन, कंप्यूटर या अन्य डिजिटल डिवाइस पर इंटरनेट के माध्यम से, सहजता के साथ उपलब्ध है। वह भी इतनी अधिक मात्रा में कि हमारे मन को भटकने या उलझने में एक क्षण भी नहीं लगता और इसी वजह से शायद हम इस सच्चाई को भूल गए हैं कि “ज्ञान” और “बुद्धि” दोनों एक नहीं हैं। दोनों में आसमान-ज़मीन का अंतर है। इसी अंतर को समझाते हुए राल्फ वाल्डो इमर्सन ने कहा है, “Knowledge is knowing what to do. Wisdom is doing what you know.”


चलिए, थोड़ा गहराई से इस विषय पर चर्चा करते हैं और समझते हैं कि ज्ञान क्या है? ज्ञान याने वह बात या चीज जो हम सीखते हैं और यह हमें पढ़ने, सुनने, देखने और अनुभव करने से मिलता है। जब आप कोई किताब पढ़ते हैं, कोई नई तकनीक सीखते हैं, कोई तथ्य या जानकारी जुटाते हैं, किसी नए विचार के साथ समय बिताते हैं, तब आप ज्ञानी बनते हैं। इसलिए ही कहा जाता है कि “आज की सूचना, कल का ज्ञान है।” इस आधार पर थोड़े सपाट शब्दों में कहूँ तो जानकारियों को दिमाग में भरने का नाम ज्ञानी होना है, लेकिन दोस्तों, दिमाग़ में जानकारी भर लेने भर से यानी ज्ञानी होने भर से जीवन नहीं बदलता। उसके लिए तो आपको बुद्धि को समझना होगा।


दोस्तों, ज्ञान का सही उपयोग ही बुद्धि है। याने बुद्धि वह क्षमता है, जिससे आप सही समय पर सही बात समझते हैं, सही निर्णय लेते हैं और सीखे हुए को जीवन में लागू करते हैं। इसी बात को और सरल शब्दों में कहूँ तो बुद्धि, ज्ञान की रौशनी है। जैसे दीये में बत्ती रख घी भर देने से अँधेरा नहीं मिटता, उसके लिए दीपक को जलाना पड़ता है। ठीक वैसे ज्ञान इकट्ठा कर लेने से जीवन का अंधकार नहीं मिटता, उसके लिए बुद्धि से काम लेना पड़ता है।


चलिए, इसी बात को हम एक प्रचलित कहानी से समझते हैं। नाव से बड़ी झील पार कर रहे विद्वान पंडित ने नाविक से कहा, “क्या तुमने भूगोल पढ़ा?” नाविक बोला, “नहीं।” जवाब सुन विद्वान हँसा और बोला, “तुमने आधा जीवन यूँ ही गँवा दिया। भूगोल पढ़ लेते तो दिशा और दूरी का ज्ञान प्राप्त कर अपने जीवन को यूँ बर्बाद होने से बचा लेते।” कुछ देर बाद तूफ़ान आया और नाव डगमगाने लगी, जिसे देख नाविक चिल्लाया, “पंडित जी! तैरना आता है?” विद्वान पंडित घबरा कर बोला, “नहीं!” उत्तर सुन नाविक झील में छलांग लगाता हुआ बोला, “तो आपने पूरा जीवन गँवा दिया। भूगोल पढ़ने में समय बर्बाद करने के स्थान पर तैरना सीख लेते तो बेहतर रहता।”

दोस्तों, पंडित जी को ज्ञान तो बहुत था, पर बुद्धि याने तैरने का कौशल नहीं था।”


दोस्तों, यही जीवन का सत्य है, ज्ञान ना तो जीवन चला सकता है और ना ही बचा सकता है, लेकिन बुद्धि यह दोनों कार्य कर सकती है। इसलिए ही मैं कहता हूँ जीवन जीने के लिए ज्ञान का होना काफी नहीं है। इस दुनिया में बहुत से लोगों के पास अच्छे विचार होते हैं, लेकिन फिर भी वे बुरे निर्णय लेते हैं। इसी तरह बहुत से लोगों को धैर्य का महत्व पता है, लेकिन फिर भी वे क्रोध में गलत बोल देते हैं और तो और स्वास्थ्य का मतलब हम सब जानते हैं लेकिन फिर भी ग़लत आदतों में कई लोग जीवन बर्बाद करते हैं। कुल मिलाकर कहा जाए तो ज्ञान बता सकता है कि ‘क्या सही है’, लेकिन बुद्धि हमें ‘सही कैसे और कब करना है’, बताती है।


दोस्तों, जैसा मैंने पूर्व में बताया था कि जानकारी इकट्ठा करके हम ज्ञानी बन सकते हैं, लेकिन अगर आप बुद्धि विकसित करना चाहते हैं तो निम्न चार सूत्रों को अपना लें-

१) रोजमर्रा के जीवन में सफलता मिले या असफलता दोनों से ही अनुभव लें क्योंकि अनुभव बुद्धि का सबसे बड़ा विद्यालय हैं।

२) उतावलेपन के स्थान पर धैर्य से काम लें क्योंकि बुद्धि का जन्म शांति में होता है।

३) सजग रहते हुए अपने आस-पास घट रही हर घटना से जीवन का पाठ सीखें। याद रखिएगा, दूसरों की गलतियों से सीखना भी बुद्धि बढ़ाता है।

४) अनुशासित रहना और हर स्थिति-परिस्थिति में जानते हुए अच्छा करना भी बुद्धि बढ़ाता है।


अंत में इतना कहूँगा कि आज दुनिया को और बेहतर बनाने के लिए सिर्फ “ज्ञानी” नहीं, बुद्धिमान लोग चाहिए। याने हमें उन लोगों की आवश्यकता है, जो ज्ञान को जीवन में उतारने की शक्ति रखते हों। याद रखिएगा, “ज्ञान रास्ता दिखाता है, बुद्धि उस रास्ते पर चलना सिखाती है।” इसलिए सिर्फ़ जानकारी इकट्ठा करने में समय ना लगायें, उसे जीवन में उतारें, अपनाएँ, और खुद को बदलते हुए देखें।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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