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  • Writer's pictureNirmal Bhatnagar

बुरे वक़्त में जीवन को सुखमय बनाने के 11 अचूक सूत्र - भाग 3

May 16, 2023

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, जीवन अच्छी बुरी याने उतार-चढ़ाव वाली घटनाओं का चक्र है। समय अच्छा हो तो हम सभी खुश, संतुष्ट और सुखी रह लेते हैं और बुरा हो तो स्थितियाँ बदल जाती है। पिछले 2 दिनों में हमने बुरे वक्त में भी सुखमय जीवन जीने के लिए आवश्यक 11 सूत्रों में से प्रथम 8 सूत्र सीखे थे। आइए आगे बढ़ने से पहले उन्हें संक्षेप में दोहरा लेते हैं-


पहला सूत्र - दिन की सकारात्मक शुरुआत करें

अपने मस्तिष्क को ऊर्जा से भरने और दिन भर प्रेरणा प्राप्त करने के लिए सकारात्मक अफरमेशंस के साथ दिन की शुरुआत करें।


दूसरा सूत्र - सकारात्मक लोगों के बीच रहें

बेहतर, सफल और सकारात्मक लोगों के बीच रहकर आप यह जान सकते हैं कि वे विपरीत और विषम परिस्थितियों में किस तरह स्वयं को ऊर्जावान और सकारात्मक बनाए रखते हैं।


तीसरा सूत्र - स्वास्थ्य का रखें विशेष ध्यान

खुद का सर्वश्रेष्ठ संस्करण बनने के लिए शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का अच्छा होना आवश्यक है, इसका विशेष ध्यान रखें।


चौथा सूत्र - समस्याओं को काग़ज़ पर परिभाषित करें और उससे पार पाने की योजना बनाएँ

समस्याओं को काग़ज़ पर लिखना उसकी सीमा, उससे होने वाले नुक़सान, सम्भावित हल, हल से होने वाले लाभ आदि को स्पष्ट तौर पर एक साथ देखने, समझने का मौक़ा देता है। जिससे हम सी॰एम॰एस॰ याने कंट्रोल, मॉनिटरिंग और सस्टेनेबल हल खोज पाते हैं।


पाँचवाँ सूत्र - नई आदतें डालें और माहौल को बदलें

मेरी नज़र में रोज़मर्रा की ज़िंदगी में किया जाने वाला हर कार्य, एक आदत है। इसीलिए कहा जा सकता है कि हमारे आज के हालात के लिए हमारी आदतें ज़िम्मेदार हैं। आदतें अच्छी होंगी तो अच्छा होगा और आदतें बुरी होंगी तो बुरा होगा। आदतों को बदलते समय माहौल को बदलना आत्मविश्वास बढ़ाता है। याद रखिएगा, शारीरिक याने फ़िज़िकल बदलाव विचार बदलने में मदद करता है।


छठा सूत्र - ग़लतियों को स्वीकारें और रोज़ कुछ नया सीखें

ग़लतियों को ना स्वीकारना आपके अंदर ग़लत आदतों को जन्म देता है। इसके विपरीत उन्हें स्वीकार कर दूर करना आपको बेहतर बनाता है। इसलिए हर पल, हर हाल में, हर किसी से सीखें और रोज़ खुद से बेहतर बनें।


सातवाँ सूत्र - प्राथमिकताओं पर कार्य करते हुए अनुशासित जीवन जिएँ

स्व-अनुशासन के साथ प्राथमिकतानुसार जीवन जीना आपको बिखराव और संकटों से बचाकर योजनाबद्ध तरीके से लक्ष्य पाने, सफल होने का मौक़ा देता है। उपरोक्त सभी सूत्र भी आपको अधिकतम लाभ तब देते हैं जब आप प्राथमिकताओं पर कार्य करते हुए अनुशासित जीवन जीते हैं।


आठवाँ सूत्र - जोखिम लें

सुरक्षित खेलकर जीवन में बड़ी सफलता पाना या खुद की क्षमताओं को पहचान पाना असंभव ही है। जब आप अपनी सीमाओं को चुनौती देकर जीवन में जोखिम लेते हैं, तब आप अपना सर्वश्रेष्ठ देकर खुद को खुद से बेहतर बनाते हैं।


चलिए अब हम अंतिम तीन सूत्र सीखते हैं-


नवाँ सूत्र - अंतिम विचार पर विशेष ध्यान दें

ऐसा माना जाता है कि रात का अंतिम विचार या भाव आपके अगले दिन का पहला विचार या भाव होता है क्योंकि आपका अंतर्मन आपके सोने के बाद, पूरी रात, इस अंतिम विचार पर कार्य करता है। अतः सोते समय किसी भी प्रकार के भय या शंका के बारे में ना सोचें और सुनिश्चित करें कि अंतिम विचार सकारात्मक हो। इसका सर्वश्रेष्ठ तरीक़ा है सोने के पूर्व किसी अच्छे विचार को बार-बार दोहराना। वैसे आप ईश्वर, प्रकृति और सभी के प्रति आभारी रहते हुए; उन्हें धन्यवाद देते हुए भी सोने जा सकते हैं।


दसवाँ सूत्र - करें खुद से ये सवाल

दोस्तों खुद से सवाल करना आपको आत्ममंथन करने; खुद को बेहतर तरीक़े से समझने का मौक़ा देता है। इसलिए प्रतिदिन खुद से निम्न प्रश्न पूछें-

1) क्या मैंने खुद के और जीवन के बारे में नकारात्मक सोचना छोड़ दिया है?

2) क्या मैं उत्साह और आत्मविश्वास के साथ अपना जीवन जी रहा हूँ?

3) कहीं मैं अवसरों के चक्कर में मौक़ापरस्त तो नहीं बनता जा रहा हूँ?

4) क्या मैं दृढ़ निश्चय के साथ योजनाबद्ध तरीके से जीवन में आगे बढ़ रहा हूँ?

5) क्या मैं रोज़ कुछ नया सीख रहा हूँ?

6) क्या मैं रोज़ खुद से बेहतर बन रहा हूँ?

7) क्या आज मैंने जोखिम लेकर कुछ नया करने का प्रयास किया?

8) क्या आज मैंने खुद का सर्वश्रेष्ठ दिया?

9) क्या मैं खुश, संतुष्ट और सुखी रहते हुए जीवन में आगे बढ़ रहा हूँ?

10) क्या मैं रोज़ ईश्वर, परिजनों और साथियों के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ?

अगर आपको ज़्यादातर प्रश्नों के उत्तर हाँ में मिल रहें तो यक़ीन मानिएगा आप सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अन्यथा आपको अपनी सोच में बदलाव लाकर उपरोक्त सूत्रों को फिर से अपनाना होगा।


ग्यारहवाँ सूत्र - आभारी रहें

आप स्वस्थ हैं, सफलता या खुद को बेहतर बनाने के विषय में सोच रहे हैं। आपको अपनों का साथ मिल रहा है। आप कुछ नया सोच और सीख पा रहे हैं इसलिए आभारी रहें। याद रखिएगा, सफल होने के लिए आवश्यक प्रतिभा और योग्यता ईश्वर के आशीर्वाद से मिली है और ख्याति समाज से, इसलिए आभारी रहें। दोस्तों आभारी रहना आपको सुखी और स्वस्थ बनाता है और ना रहना आपको घमंडी बना नकारात्मक भावों की ओर ले जाता है।


दोस्तों, जो एक सबसे महत्वपूर्ण बात जो मैंने इन सूत्रों में नहीं बताई है वह है खुद से प्यार करना। अगर आप खुद से प्यार करते हैं तो निश्चित तौर पर आपके लिए खुद को परेशान करने वाली सभी चीजें गौण हो जाती है। इसी आशा के साथ कि आप खुद को प्यार करने के साथ-साथ आप उपरोक्त ग्यारह सूत्रों से अपने चुनौती भरे, बुरे वक्त को सुखमय बना पाएँगे।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

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