top of page
Search

भरोसा रखो, सपना जियो…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Nov 17, 2025
  • 3 min read

Nov 17, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, भरोसा दिल का वह पुल है जो दो आत्माओं को जोड़ता है। लेकिन अगर यह किसी कारण से टूट जाए तो ऐसा लगता है कि अब जीवन में किसी पर विश्वास करना संभव नहीं और रही बात उस व्यक्ति की जिसने भरोसा तोड़ा है, तो आप जानते ही हैं कि एक बार भरोसा टूटने के बाद उसे फिर से जोड़ने में पूरा जीवन लग जाता है। इसलिए जीवन की सबसे कठिन बातों में से एक, कब किस पर और कितना भरोसा करें, माना जाता है। इसका एक कारण यह भी है कि हम सभी ने कभी न कभी दोस्तों से, अपनों से, या खुद से भी धोखा खाया है और उस क्षण ऐसा भी महसूस किया है कि ‘अब किसी पर विश्वास करना संभव नहीं है।’ लेकिन दोस्तों, जीवन से अगर भरोसा पूरी तरह चला जाए या यूँ कहूँ जीवन से अगर भरोसे की रोशनी बुझ जाए तो हमारे सपने अँधेरे में खो जाते हैं। इसलिए मेरा मानना है कि सपना और भरोसा दोनों एक ही मिट्टी के बने हैं, टूटते हैं तो दर्द देते हैं, पर बनते हैं तो दुनिया बदल देते हैं।


वैसे दोस्तों, भरोसा करना साहस का काम है। कई बार लोग इसे अंधा निर्णय भी मानते हैं याने उनका मानना होता है कि भरोसा अंधा होता है। पर हकीकत में ऐसा नहीं होता, इसके लिए बस हमें दिल से देखने की दृष्टि विकसित करना पड़ती है और इस स्वीकारोक्ति के साथ जीवन जीने की आदत डालना होती है कि ‘अच्छाई अब भी इस दुनिया में जीवित है।’ लेकिन यह तभी कारगर सिद्ध होगा जब आप अपने निर्णयों, अपने इरादों और अपने मार्ग पर भरोसा करते हैं, तब दुनिया की कोई शक्ति हमें विचलित नहीं कर सकती। हाँ! यह सही है कि ‘भरोसा’ करे बिना भी जीवन जिया जा सकता है, क्योंकि ऐसा करने से आप जीवन में अनावश्यक चोट खाने से बच जाते हैं लेकिन याद रखियेगा ऐसा करना आपको इंसानियत से दूर कर सकता है क्योंकि भरोसा करना हमें इंसान बनाता है। याने दोस्तों, गंभीरता के साथ सोचा जाए तो ‘भरोसा’ इंसानियत की नींव भी है।


इसी तरह दोस्तों, मैं सपनों को विश्वास की उड़ान मानता हूँ। सपनों के महत्व को बताते हुए मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने कहा था, “आप सपना देखने वाले को तो मार सकते हैं, लेकिन सपने को नहीं।” यह वाक्य हमें याद दिलाता है कि सपनों की जड़ें हमारे आत्मविश्वास और भरोसे में होती हैं। जब हम किसी सपने पर विश्वास करते हैं, तो वह सिर्फ़ एक कल्पना नहीं रहता। वह जीवन की दिशा बन जाता है। इतिहास में ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं। जैसे महात्मा गांधी, नेल्सन मंडेला, एपीजे अब्दुल कलाम आदि। इन सभी ने अपने सपनों पर भरोसा किया, भले ही दुनिया ने उन्हें हज़ार बार तोड़ा, फिर भी वे झुके नहीं। उन्होंने सिखाया कि सपने तभी साकार होते हैं, जब हम खुद पर और अपने मार्ग पर अटूट भरोसा रख पाते हैं।


उपरोक्त दोनों बातों के आधार पर देखा जाए तो भरोसा और सपना, दोनों जीवन के दो पंख हैं। एक के बिना दूसरा अधूरा है। भरोसे के बिना सपना डर में बदल जाता है, और सपनों के बिना भरोसा दिशाहीन हो जाता है। थोड़ा और गहराई से इसे समझा जाए तो भरोसा वह बीज है जो भीतर बोया जाता है, और सपना वह वृक्ष है जो बाहर फलता है। अगर हम भीतर का बीज सींचें, यानी खुद पर और अपने कर्म पर विश्वास रखें, तो बाहर का पेड़ अपने आप मजबूत बनता है।


दोस्तों, अगर आप सपनों के जीवन को जीना चाहते हैं तो आपको भरोसे की शक्ति को समझना होगा और निम्न तीन बातों को अपने जीवन का हिस्सा बनाना होगा-

1. हर कोई भरोसे के लायक नहीं होता, लेकिन इसके बाद भी भरोसा करने की क्षमता कभी मत खोइए।

2. हर सपना पूरा नहीं होता, पर फिर भी सपने देखने का साहस करना कभी मत छोड़िए।

3. जब भरोसा और सपना साथ चलते हैं, तब असंभव भी संभव हो जाता है।


इसलिए दोस्तों, “भरोसा रखो, सपना जियो”, क्योंकि दुनिया तुम्हें तोड़ सकती है, पर तुम्हारे भीतर की रोशनी को बुझा नहीं सकती।”


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

Comments


bottom of page