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  • Writer's pictureNirmal Bhatnagar

मनचाहे परिणाम के लिए विश्वास रख करें प्रयास…

Feb 22, 2023

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, हाल ही में एक विद्यालय में पत्रकारों को सम्बोधित करने का मौक़ा मिला। सेशन शुरू करने के पूर्व ही मैं जानता था कि इन विशिष्ट बुद्धिजीवियों को सम्बोधित करना आसान नहीं रहेगा। जी हाँ साथियों, जमाने के बीच रहना और अपनी आँखों के सामने खबरों को बनते देखना, उसको अलग-अलग ऐंगल से देखकर तौलना, इन्हें विशेष, जागरूक और बुद्धिमान बनाता है। ख़ैर, अभी हम आगे बढ़ते है और मुख्य बिंदु पर आते हैं।


सेशन के दौरान एक पत्रकार खड़े हुए और बोले, ‘सर, मुझे तो आप वह एक शब्द बता दीजिए जो निश्चित तौर पर जीवन बदलने का दम रखता हो।’ प्रश्न करते समय उन सज्जन का नज़रिया कुछ इस प्रकार था मानो, ‘ट्रेनिंग में बताई जाने वाली सब फ़ालतू की बातें हैं। इन सबसे जीवन नहीं चलता।’ या यह भी हो सकता है कि वे मुझे अपनी स्केल पर परखना चाह रहे हों जिससे वे यह निर्णय ले सकें कि उन्हें बचा हुआ सेशन सुनना चाहिए या नहीं या वे सुनिश्चित करना चाह रहे होंगे कि उनका समय बर्बाद ना हो।


ख़ैर, उनका प्रश्न सुनते ही मैं मुस्कुराया और बोला, ‘विश्वास!’ इस एक शब्द को कहने के बाद मैं कुछ पलों के लिए ख़ामोश हो गया फिर बात आगे बढ़ाता हुआ बोला, ‘वैसे, यह सिर्फ़ मैं नहीं कह रहा हूँ, बल्कि स्वामी विवेकानंद जी ने किसी सज्जन द्वारा यह पूछे जाने पर कि, ‘सब कुछ चले या खत्म हो जाने के बाद किस भरोसे सब कुछ पाया जा सकता है?’, पूछने पर जवाब देते हुए कहा था, ‘विश्वास!’ अगर आपको सबसे पहले खुद पर, फिर ईश्वर पर और अंत में अपने कर्मों पर विश्वास है तो आप निश्चित तौर पर सब-कुछ पा सकते हैं।


जी हाँ साथियों, वैसे भी यह दुनिया किसी ना किसी रूप में एक दूसरे पर विश्वास रखने के कारण ही तो चल रही है। इसी विश्वास के बूते आप बिना जान-पहचान वाले ड्राइवर की गाड़ी की सवारी कर लेते हैं, एक डॉक्टर को अपने शरीर पर चाकू चलाने देते हैं अर्थात् शल्य चिकित्सा करवाते हैं, एक दूसरे के साथ व्यवहारिक रिश्ता रखते हैं, अपने छोटे-छोटे बच्चों को विद्यालय या किसी अन्य कक्षा में अनजान व्यक्ति के पास छोड़ देते हैं। इसीलिए तो शायद यह भी कहा गया है कि विश्वास पर ही दुनिया टिकी हुई है।


याद रखिएगा, इस छोटे से शब्द ‘विश्वास’ में बड़ा सामर्थ्य है, इसकी सहायता से एक अच्छा जीवन, अच्छे सम्बन्ध, अच्छा कार्य, अच्छा भविष्य सब कुछ पाया जा सकता है। इतना ही नहीं साथियों, अगर विश्वास रखा जाए तो बंद दरवाज़े को भी खोला जा सकता है और तो और ईश्वर को भी पाया जा सकता है। तो आइए साथियों आज से हम अपने और अपनों पर विश्वास रखते हुए, परमपिता परमेश्वर के सभी निर्णयों को पूर्ण आस्था और विश्वास के साथ स्वीकार कर आनन्दमय जीवन की ओर कदम बढ़ाते हैं क्योंकि, आशा और निराशा दोनों हमारे आत्मविश्वास पर ही निर्भर करती है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

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