मन का पहरेदार बनना ही खुशियों का राज़…
- Nirmal Bhatnagar

- Aug 17, 2025
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Aug 17, 2025
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, आज के इस प्रेरणादायक सफ़र में हम बात करेंगे उस छोटे लेकिन सबसे ताक़तवर रहस्य की, जो हमारी ज़िंदगी को पूर्णतः बदल सकता है। आपने निश्चित तौर पर इस विषय में किसी ना किसी से सुना होगा कि एक छोटी सी चींटी अपने नन्हें आकार और ना के बराबर शारीरिक शक्ति के बावजूद भी एक विशाल हाथी को बेचैन कर सकती है। जानते हैं कैसे? बस उसकी सूँड़ या कान में घुसकर।
दोस्तों, यह छोटा सा किस्सा हमें जीवन के कई महत्वपूर्ण सूत्र सीखा सकता है क्योंकि जितना यह चींटी और हाथी के लिए सही और सटीक है, उतना ही सटीक यह हमारे मन के लिए भी है। हमारे मन के कान भी हाथी के कानों के समान ही बड़े और संवेदनशील होते हैं। इसमें अगर कोई बात घुस जाये, तो वह आसानी से बाहर नहीं निकलती है और फिर हमारे पूरे जीवन पर असर डालती है। अब अगर वह बात सकारात्मक होगी तो सकारात्मक असर डालेगी और अगर यह आलोचना, ताने या अफ़वाह के रूप में नकारात्मक होगी तो नकारात्मक असर कर हमें बेचैन कर देगी और हम ख़ुद को ख़ुद की नजरों के स्थान पर, दूसरों के शब्दों के आधार पर देखने लगेंगे।
सोच कर देखियेगा, अगर आप रोज़-रोज़ सुनें कि “तुममें कुछ कमी है…”, “तुम बदसूरत हो…”, “तुम्हें कोई बात एक बार में समझ ही नहीं आती है…” — तो क्या होगा? बीतते समय के साथ आप धीमे-धीमे इन शब्दों को सच मानने लगेंगे और खुद पर से भरोसा खो देंगे। लेकिन इसके विपरीत आपके वही कान याने मन रोज अच्छी और प्रेरणादायी बातें सुनने लगे, तो निश्चित तौर पर आपका सोचने का ढंग ही बदल जाएगा।
इसलिए दोस्तों, हमें हमेशा सजग रहना होगा ताकि कोई भी गलत बात हमारे मन को दूषित ना कर सके। यही वजह है मैं हमेशा कॉन्शियस माइंड को चौकीदार कहता हूँ क्योंकि यही हमारे सब कॉन्शियस माइंड को ग़लत प्रोग्राम होने से बचा सकता है। इसी के माध्यम से हम सुनिश्चित कर सकते हैं कि जो कुछ भी हमारे अंदर जाये वो सकारात्मक, अच्छा और प्रेरणादायी हो। इसलिए जब कभी किसी की कमी निकालने का मन हो तो एक पाल ठहर कर सोचियेगा कि क्या मैं कमियों की जगह उसके गुण देख सकता हूँ? क्योंकि जब हम हर व्यक्ति में अच्छाई ढूँढना शुरू कर देते हैं, तो हमारे रिश्ते बदल जाते हैं। वो बोझिल नहीं, बल्कि हल्के और खूबसूरत बन जाते हैं।
याद रखिएगा दोस्तों, आपका व्यवहार ही आपकी असली पहचान है और आपका नज़रिया ही आपकी सबसे बड़ी ताक़त है। यह दोनों मिलके ही आपका चरित्र बनायेंगे और वह आपकी पहचान; आपकी ख़ुशबू या सच्चाई बन आसपास के लोगों को प्रभावित करेगा या यूँ कहूँ आपके चरित्र की ख़ुशबू लोगों के जीवन को इस तरह महकाएगी कि वे उम्रभर उसे भूल ना पाएँगे। इसलिए ही तो कहते हैं, “रूप की चमक वक्त के साथ फीकी पड़ जाती है, लेकिन चरित्र की खुशबू हमेशा महकती रहती है।
तो आइए दोस्तों, आज हम यह ठान लेते हैं कि हम नकारात्मकता के उस छोटे-से, “चींटी जैसे” असर को अपने मन में जगह नहीं देंगे। हम हमेशा अपनी आँखों से देखेंगे, दिल से समझेंगे, और गुणों को पहचानेंगे क्योंकि जब मन का दरवाज़ा साफ़ रहता है, तो ज़िंदगी भी साफ़ और खूबसूरत नज़र आती है और इस सबके लिए आपको इतना ही याद रखना है कि मन का पहरेदार बनना ही, खुशियों का सबसे बड़ा राज़ है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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